नाना का Radio — Memory, Routine और एक पोती की चुप कहानी
नाना के जाने के बाद, 8 बजे वही radio फिर बजा। एक पोती ने महसूस किया—कुछ रिश्ते कभी खत्म नहीं होते, बस चलते रहते हैं।
— InnaMax News Desk
Radio पुराना था।
Murphy का। Brown रंग। Dial पर उँगलियों के निशान जैसे अब भी जमे हुए थे — जहाँ नाना रोज़ रुकते थे।
8 बजे।
Neha ने plug लगाया। Switch दबाया।
एक सेकंड… दो सेकंड…
फिर — static।
वह थोड़ी झुकी। Dial धीरे-धीरे घुमाया।
जैसे कोई पुरानी आदत याद करने की कोशिश कर रहा हो।
घर वैसा ही था।
कुर्सी वही — जिस पर नाना बैठते थे।
अलमारी वही — जिसमें उनकी files अब भी सजी थीं।
Diary भी वही — last page आधा लिखा हुआ।
बस… आवाज़ नहीं थी।
नाना गए थे पिछले साल।
अचानक नहीं। धीरे-धीरे।
जैसे कोई radio volume कम करता है — और फिर एकदम silence।
Neha तब नहीं आ पाई थी।
Office deadlines। Flights नहीं मिलीं।
Excuses बहुत थे।
यह तीसरी बार थी जब वह घर आई थी उसके बाद।
पहली बार — सब कुछ भारी लगा।
दूसरी बार — सब कुछ चुप।
इस बार — उसने radio उठा लिया।
Static फिर से उभरा।
फिर… एक हल्की सी clarity।
“यह All India Radio है…”
Neha freeze हो गई।
वही voice।
Wahi rhythm।
Wahi 8 बजे का bulletin।
उसने घड़ी देखी।
8:01।
वह धीरे से नीचे बैठ गई।
कुर्सी के पास। जमीन पर।
जैसे पहले बैठती थी — homework करते हुए — जब नाना news सुनते थे।
तब वह irritate होती थी।
“नाना, TV देख लेते हैं ना…”
“News boring है…”
नाना हँसते थे।
“News boring नहीं होती… बस समझने में time लगता है।”

तब उसे समझ नहीं आया था।
अब भी शायद नहीं आता था।
पर आवाज़… वही थी।
दरवाज़े पर हल्की आहट हुई।
नानी अंदर आईं।
धीरे-धीरे। बिना आवाज़ के।
उन्होंने Neha को देखा।
Radio को देखा।
कुछ नहीं बोलीं।
बस आकर उसके पास बैठ गईं।
दोनों चुप।
Bulletin चलता रहा।
“देश-विदेश की ख़बरें…”
“मौसम का हाल…”
“आज के मुख्य समाचार…”
हर line जैसे किसी और समय से उठकर आ रही थी।
एक ऐसा समय — जहाँ सब normal था।
Neha ने एक बार नानी की तरफ देखा।
उनकी आँखें radio पर थीं।
जैसे वह सिर्फ सुन नहीं रहीं…
याद कर रही हों।
Bulletin खत्म हुआ।
Theme music फिर बजा।
और फिर — silence।
नानी ने धीरे से कहा,
“यही उनका वक्त था…”
Neha ने कुछ नहीं कहा।
“रोज़ 8 बजे… इसी station पे…”
“कहते थे — ‘news सुनने के बाद नींद अच्छी आती है।’”
Neha ने radio की तरफ देखा।
उसने कभी notice नहीं किया था कि नाना कब सोते थे।
या कब उठते थे।
बस इतना याद था —
कि 8 बजे के बाद वह disturb नहीं करते थे।
क्योंकि “नाना news सुन रहे हैं।”
उसने धीरे से switch off किया।
कमरे में फिर वही silence।
पर इस बार… अलग था।
खाली नहीं।
भरा हुआ।
अगले दिन — 7:58 पर — Neha खुद से पहले ही उस कमरे में आ गई।
Radio वहीं रखा था।
Plug लगा हुआ।
उसने बिना सोचे switch on किया।
Static।
Dial।
Click।
“यह All India Radio है…”
8:00।
वह मुस्कुराई नहीं।
बस बैठ गई।
इस बार — बिना सोचे।
जैसे यह routine उसका था।
नानी इस बार पहले से बैठी थीं।
कुछ नहीं कहा दोनों ने।
बस सुना।
तीसरे दिन —
Neha ने diary खोली।
Last page।

आधा लिखा हुआ।
“आज news में…”
बस इतना।
आगे blank।
उसने pen उठाया।
सोचा — क्या लिखे?
फिर बंद कर दिया।
कुछ चीज़ें पूरी नहीं होतीं।
शायद इसलिए… कि कोई और उन्हें आगे लिखे।
रात को —
8 बजे — radio फिर चला।
Bulletin फिर आया।
Voice वही।
Theme वही।
घर वही।
बस… लोग बदल गए थे।
और फिर भी —
कुछ नहीं बदला था।
“कुछ चीज़ें ख़त्म नहीं होतीं।
वो बस एक हाथ से दूसरे हाथ में आ जाती हैं।”
Neha ने उस रात phone उठाया।
Contacts खोले।
नाना का number अब भी saved था।
Call नहीं किया।
बस देखा।
फिर phone रख दिया।
Radio बंद किया।
Lights off कीं।
और बिना कुछ सोचे — सो गई।
अगली सुबह —
नानी ने पूछा नहीं।
Neha ने बताया नहीं।
Radio वहीं रखा था।
8 बजे का इंतज़ार करता हुआ।

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