भाई की शादी में बहन — खुशियों के बीच चुपचाप बदलता एक रिश्ता
भाई की शादी में सब सही लगता है—but बहन के लिए यह सिर्फ celebration नहीं, एक ऐसा पल है जहाँ बचपन की यादें और रिश्ता चुपचाप बदल जाता है।
Meera को पता था यह दिन आएगा।
सब जानते हैं। शादियाँ होती हैं। भाई की शादी होगी — यह कोई surprise नहीं था।
फिर भी।
Mandap पर बैठे Rohan को देखा — sherwani में, माला लिए, थोड़ा nervous, थोड़ा overwhelmed — और Meera को अचानक याद आया।
वो Rohan जो रात को डर जाता था। जो उसके कमरे में आता था — “दीदी, आज मेरे साथ सोना।” वो Rohan जिसे मार्कशीट छुपानी होती थी तो Meera के पास आता था। जो पहली bike चलाते वक्त गिरा था और Meera से कहा था — “माँ को मत बताना।”
वो Rohan आज शादी कर रहा था।
Ceremony के बीच Meera ने उसे एक बार देखा।
वो दूसरी तरफ था — वार्ष्णेय जी के बगल में, फेरों की तैयारी थी।
उनकी नज़रें मिलीं।

Rohan ने एक second के लिए एक छोटी सी smile दी — वो वाली smile जो सिर्फ Meera को पता थी। वो जो कहती थी — “देख रही हो? Main theek hoon।”
Meera ने वापस smile की।
और फिर उसकी आँखें भर आईं।
वो रोना planned नहीं था।
वो इसलिए नहीं रोई कि भाई जा रहा था। वो इसलिए नहीं रोई कि सब बदल जाएगा।
वो इसलिए रोई क्योंकि अचानक realize हुआ — वो छोटा भाई जो उसके कमरे में आता था, जो उससे homework करवाता था, जो उसकी पुरानी cycle चुराता था — वो अब किसी और का सबसे ज़रूरी इंसान बन रहा था।
और यह ग़लत नहीं था।
यह सही था।
यह होना चाहिए था।
Bidaai के वक्त Rohan रुका।
Meera के पास आया।
कुछ नहीं कहा — बस एक second के लिए हाथ पकड़ा।
“दीदी।”
“हाँ।”
“माँ का ध्यान रखना।”
पहले यह काम Rohan का था — घर में। वो छोटा था लेकिन माँ के पास रहता था। अब वो जा रहा था।
और यह ज़िम्मेदारी — इतनी naturally — Meera को दे रहा था।
“रखूँगी।” Meera ने कहा।
Rohan गया।
रात को घर शांत था।
माँ सो गई थीं — थकी हुई थीं। Papa बाहर बैठे थे।
Meera Rohan के खाली कमरे के दरवाज़े पर खड़ी रही।
वही कमरा। वही बिस्तर। वही पुरानी cricket poster जो उसने कभी नहीं हटाई।
Meera ने दरवाज़ा बंद किया।
और पहली बार उसने सोचा —
अब घर थोड़ा बड़ा लगेगा।
और थोड़ा छोटा भी।





