पापा की पहली Video Call — सिर्फ चेहरा देखने की खुशी समझिए
एक पिता ने पहली बार video call सीखी — सिर्फ अपने बेटे का चेहरा देखने के लिए।
दो मिनट की बात, लेकिन एहसास उससे कहीं ज़्यादा।
Rajan को उस दिन याद नहीं था।
वो office में था। दोपहर के 2 बज रहे थे। Meeting से निकला था — थोड़ा थका हुआ, थोड़ा hungry।
Phone vibrate हुआ।
Video call।
Unknown number नहीं था — माँ का number था। लेकिन यह video call था। माँ कभी video call नहीं करती थीं।
उसने उठाया।
Screen पर पापा थे।
Camera थोड़ा ऊपर था — माथा ज़्यादा दिख रहा था, चेहरा कम। पापा ने phone को adjust किया। फिर से adjust किया।
“हाँ — दिख रहा हूँ?”
“हाँ पापा। दिख रहे हैं।”
पापा ने glasses ठीक किए।
“यह video वाला call है।”
“हाँ।”
“Shivam ने सिखाया।” Shivam छोटा भाई था। “बोला इसमें face दिखता है।”
“हाँ पापा।”
पापा ने एक बार ध्यान से देखा — जैसे screen में कुछ confirm कर रहे हों।
“ठीक हो?”
“हाँ पापा। आप?”
“ठीक हैं।”
दो मिनट की call थी।
माँ ने पीछे से पूछा — “दिख रहा है?” पापा ने कहा — “हाँ।” माँ आई नहीं screen पर — बस आवाज़ थी।
पापा ने office का background देखा।

“Office है?”
“हाँ।”
“बड़ा है।”
“थोड़ा।”
पापा ने फिर ध्यान से देखा — Rajan का चेहरा, उसका collar, उसके पीछे की wall।
“खाना खाया?”
“अभी जाने वाला था।”
“जाओ। ठंडा मत खाना।“
“हाँ पापा।”
“ठीक है।”
Call खत्म।
Rajan lunch में अकेला बैठा था।
वो call दो मिनट की थी। कुछ special नहीं हुआ। कोई बड़ी बात नहीं हुई। “ठीक हो” — “ठीक हैं।” बस।
लेकिन कुछ था।
पापा ने खुद सीखा था — Shivam से। पापा, जो अभी तक सिर्फ phone call करते थे। पापा, जिन्होंने कभी WhatsApp पर message नहीं किया था। पापा, जो technology से हमेशा थोड़ा दूर रहे।
उन्होंने video call सीखी।
सिर्फ इसलिए — कि Rajan का face देख सकें।
शाम को Rajan ने Shivam को message किया।
“पापा को video call सिखाई?”
“हाँ भाई। बोले तेरा face देखना है।”
Rajan ने phone रखा।
खिड़की के बाहर शहर था — busy, loud, अपनी ही धुन में।
और एक बाप था — 900 किलोमीटर दूर — जिसने glasses ठीक करके, camera adjust करके, नई technology सीखकर, दो मिनट के लिए बेटे का face देखा।
और पूछा — “ठंडा मत खाना।”
बस इतना काफ़ी था।





