कमरा नंबर 6 में रात 1:07 पर क्या होता है? | Delhi PG Horror
दिल्ली के इस PG में एक अजीब नियम है—रात 1:07 पर दरवाज़े की आवाज़ को कभी जवाब मत देना।
नेहा ने एक बार अनदेखा किया… और फिर जो उसने अपने फोन में रिकॉर्ड किया, वो उसे इस कहानी का हिस्सा बना गया।
by InnaMax StoryLab
दिल्ली में कोचिंग के लिए आई नेहा को बहुत मुश्किल से एक सस्ता पीजी मिला।
तीसरी मंज़िल… पुरानी बिल्डिंग…
और उसका कमरा — नंबर 6।
मालकिन ने चाबी देते हुए बस इतना कहा—
“रात में ज़्यादा शोर मत करना… और… अगर कुछ सुनाई दे तो ध्यान मत देना।”
नेहा ने सोचा—पुरानी बिल्डिंग है, आवाज़ें तो आएँगी ही।
पहली रात सब ठीक था।
दूसरी रात…
करीब 1 बजे…
उसे हल्की “खट-खट” सुनाई दी।
जैसे कोई धीरे-धीरे दरवाज़े पर उँगली से नॉक कर रहा हो।
उसने सोचा कोई मज़ाक कर रहा होगा।
दरवाज़ा खोला—
बाहर कोई नहीं।
कॉरिडोर खाली… लाइट हल्की टिमटिमा रही थी।
वो वापस आकर सो गई।
तीसरी रात…
फिर वही आवाज़।
इस बार थोड़ा साफ—
“टक… टक… टक…”
नेहा ने डरते हुए पूछा—
“कौन है?”
कोई जवाब नहीं।
वो कुछ देर चुप रही… फिर हिम्मत करके दरवाज़ा खोला।
फिर से… कोई नहीं।
लेकिन इस बार… उसे एक अजीब बात दिखी—
दरवाज़े के नीचे… फर्श पर
गीले पैरों के निशान थे।
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जैसे कोई अभी-अभी वहाँ खड़ा था।
अगली सुबह उसने मालकिन से पूछा—
“आंटी, रात में कोई आता है क्या?”
आंटी ने नज़रें चुराईं—
“नहीं… तुम ध्यान मत दो।”
अब नेहा बेचैन रहने लगी।
उसने तय किया—आज दरवाज़ा नहीं खोलेगी।
उस रात…
ठीक 1:07 बजे…
फिर वही आवाज़—
लेकिन इस बार… तेज़।
“टक-टक-टक-टक!”
नेहा ने कंबल ओढ़ लिया।
आवाज़ रुक गई।
कुछ सेकंड की शांति…
फिर—
“ठक… ठक…”
इस बार आवाज़ दरवाज़े से नहीं…
कमरे के अंदर से आ रही थी।
नेहा का खून जैसे जम गया।
उसने धीरे से कंबल हटाया…
कमरा खाली था।
लेकिन… आवाज़ साफ थी—
अलमारी के अंदर से।
उसका दिल जोर से धड़क रहा था।
वो उठी… धीरे-धीरे अलमारी के पास गई…
और काँपते हाथ से दरवाज़ा खोला—
अंदर कुछ नहीं था।
बस नीचे कोने में…
गीले पैरों के वही निशान।

अब वो समझ नहीं पा रही थी—
ये मज़ाक है… या कुछ और।
उसने उसी रात अपना फोन कैमरा ऑन करके रिकॉर्डिंग चालू कर दी।
सुबह…
उसने वीडियो देखा।
पहले कुछ नहीं था।
फिर 1:07 पर…
वीडियो में दिखा—
दरवाज़े के पास…
फर्श पर पानी जैसा कुछ फैल रहा है…
धीरे-धीरे…
पैरों के निशान बनते हैं।
और वो निशान…
चलकर अलमारी तक जाते हैं।
अलमारी अपने आप खुलती है…
और फिर—
वीडियो में कुछ सेकंड के लिए एक औरत दिखती है।
भीगी हुई… बाल चेहरे पर…
और आँखें सीधा कैमरे में।
फिर वो गायब।
नेहा का हाथ काँपने लगा।
वो भागकर मालकिन के पास गई।
इस बार मालकिन चुप नहीं रही।
धीरे से बोली—
“दो साल पहले… इसी कमरे में एक लड़की रहती थी…
बारिश वाली रात… वो गायब हो गई थी…”
नेहा ने पूछा—
“लाश मिली?”
आंटी ने सिर हिलाया—
“नहीं… बस कमरे में पानी…
और गीले पैरों के निशान थे…”
नेहा ने उसी दिन पीजी छोड़ दिया।
लेकिन असली बात…
वो बाद में समझ आई।
जब उसने आखिरी बार अपना फोन खोला—
वीडियो फिर से चला।
इस बार आखिरी फ्रेम में…
वो औरत नहीं थी।
नेहा खुद थी।
भीगी हुई…
अलमारी के अंदर खड़ी…
और बाहर… कमरा खाली।

अब अगर कोई नया किरायेदार आता है…
तो कमरा नंबर 6 में…
रात 1:07 पर…
दरवाज़े पर हल्की सी आवाज़ आती है—
“टक… टक…”
कहानी यहीं खत्म नहीं होती… कभी-कभी कोई वापस भी नहीं आता।
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