WA
Breaking News और ज़रूरी updates — सीधे WhatsApp पर
InnaMax News WhatsApp Channel join करें
Join WhatsApp
StoryLab

दो दोस्त — एक शहर, दस साल बाद


10 साल बाद मिले — वही शहर, वही café।
शुरुआत awkward थी… फिर एक पुराना किस्सा आया, और distance जैसे थी ही नहीं।


Aakash पहले पहुँचा।
वही café था जो उन्होंने choose किया था — middle point। दोनों अब उसी शहर में थे — पहली बार 10 साल में।

Nikhil आया 7 मिनट बाद।

Aakash ने उसे door पर देखा — थोड़ा वज़न बढ़ा था, बाल थोड़े कम, glasses नए थे।
Nikhil ने उसे देखा — थोड़ा lean था, beard था, jacket अच्छी थी।

दोनों ने एक second के लिए एक-दूसरे को देखा।
फिर दोनों हँसे।

शुरुआत awkward थी।

“कब आए?”
“तीन हफ्ते हुए। तुम?”
“छह महीने।”
“और कभी मिले नहीं।”
“हाँ।”

Coffee आई। दोनों ने menu देखा — जैसे ज़रूरी हो।

फिर Nikhil ने कहा — “याद है, जब हम दोनों Principal के room में बुलाए गए थे?”

Aakash हँसा।
“कौन सी बार — पहली या दूसरी?”

वहाँ से conversation खुल गई।


do dost das saal baad cafe first meeting awkward warm moment hindi story
10 साल बाद — वही शहर, वही table, बस थोड़ी सी झिझक और बहुत सी यादें।

School के किस्से आए। वो teacher जो सबको डराते थे। वो canteen जहाँ lunch की जगह cricket होता था। वो exam जिसमें दोनों ने एक-दूसरे की copy देखी थी।

10 साल की दूरी — जैसे थी ही नहीं।
लेकिन थी।

बीच-बीच में दोनों रुकते थे। कोई reference आता जो दूसरे को नहीं पता था — क्योंकि वो उन 10 सालों का था जो साथ नहीं बिताए थे।

Aakash की एक job का किस्सा — Nikhil को नहीं पता था।
Nikhil की शादी — Aakash को invite नहीं हुआ था। शायद message कहीं छूट गया था। यह topic आया ही नहीं।

दो घंटे बाद निकलते वक्त Nikhil ने कहा:
“यार, पहले क्यों नहीं मिले।”
“Busy थे।”
“हाँ।” Nikhil ने coffee का last sip लिया। “लेकिन actually वो reason नहीं था।”

Aakash ने उसे देखा।

“शायद डर था।” Nikhil ने कहा। “कि मिलने के बाद पता चले कि बहुत कुछ बदल गया है।”

Aakash ने सोचा।
“बदला तो है।”
“हाँ।”
“लेकिन यह हँसी नहीं बदली।”

Nikhil ने एक second देखा। फिर मुस्कुराया।
“नहीं बदली।”

बाहर निकले।

“अगली बार कब?” Aakash ने पूछा।
“इतने साल मत लगाना।”
“Same city में हैं।”
“हाँ। इस बार excuse नहीं है।”

दोनों अलग-अलग directions में गए।

Aakash metro की तरफ था। चलते-चलते उसने सोचा — 10 साल में बहुत कुछ बदला। Jobs बदलीं। शहर बदले। लोग बदले।

लेकिन वो 7 मिनट की lateness — वो Principal वाला किस्सा — वो हँसी — वो नहीं बदली।

शायद दोस्ती ऐसी ही होती है।
वो pause पर नहीं जाती।
बस wait करती है।


do dost alag directions me chalte hue shaam dosti time hindi story
मंज़िलें अलग हो सकती हैं…
लेकिन कुछ रिश्ते बीच रास्ते में खत्म नहीं होते।

यह भी पढ़ें:

— पापा की घड़ी

— बेटे की पहली गलती

— माँ का पुराना दर्पण — जो हर सुबह का गवाह था

बेटे की Drawing — जिसमें Papa थे, लेकिन घर में नहीं


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

⚡ TODAY
👉 आज का सुविचार: “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर...” — कबीर 👉 BUT WHY...? हम सब सीख तो रहे हैं… लेकिन useful क्यों नहीं बन पा रहे? 👉 आज का सवाल: आप value दे रहे हो… या सिर्फ दिख रहे हो? आज का सुविचार पढ़ें →