माँ का पुराना दर्पण — जो हर सुबह का गवाह था
A daughter finds her mother’s old mirror while packing the house — and notices something she had missed for years.
घर pack हो रहा था।
माँ-पापा नए flat में जाने वाले थे — smaller, easier to manage। 30 साल का पुराना घर छोड़ना था।
Kavya आई थी help के लिए।
पहले दिन आसान था — बड़े furniture, boxes, labels। दूसरे दिन वो माँ के कमरे तक पहुँची।
वहाँ एक पुराना dressing table था।
Teak का। पुराना। Mirror थोड़ा hazy था edges पर।
“यह जाएगा?” Kavya ने पूछा।
माँ रुकीं।
“नहीं। यह रखेंगे।“
यह dressing table Kavya को याद था — बचपन से।
माँ हर सुबह यहाँ बैठती थीं। 10 मिनट। सिर्फ 10 मिनट — बाल बनाना, बिंदी लगाना, थोड़ा सा काजल।
फिर वो kitchen में होती थीं। फिर school छोड़ने जाती थीं। फिर दिन।
Kavya ने कभी ध्यान नहीं दिया था उन 10 मिनटों पर।
पुरानी drawer खोली — कुछ चीज़ें थीं अंदर।
एक पुरानी lipstick — शायद 15 साल पुरानी, almost खाली। एक broken bangle — अकेली, बिना जोड़े की। कुछ old photos — माँ की शादी से पहले की। माँ 22-23 साल की थीं उनमें।
Kavya ने एक photo उठाई।
माँ — young, मुस्कुराती हुई, एक dupatta ओढ़े, कहीं खड़ी थीं।
“यह कहाँ की है?”
माँ ने देखा।
“मेरे maike में। शादी से पहले।”
“आप कितनी young हैं इसमें।”
“हाँ।” माँ ने photo रखी। “तब थी।“
शाम को सब pack हो रहा था।
Movers आने वाले थे। List long थी।
लेकिन Kavya वहीं बैठी थी — dressing table के सामने, उस mirror में खुद को देखते हुए।
Mirror hazy था edges पर। लेकिन center clear था।
उसने सोचा — माँ ने इसी mirror में खुद को देखा होगा। हर सुबह। 30 साल तक।
जब Kavya छोटी थी — इसी mirror में।
जब Kavya का पहला result आया — इसी mirror में।
जब Kavya की शादी हुई — इसी mirror में।
30 साल के हर दिन की सुबह — इसी mirror ने माँ को देखा।

माँ आईं।
“चाय पियोगी?”
“हाँ।”
माँ जाने लगीं।
“माँ।”
“हाँ?”
Kavya ने कुछ नहीं कहा — एक second रुकी। फिर।
“कुछ नहीं। चाय बनाइए।”
माँ चली गईं।
Kavya ने mirror को एक बार देखा।
फिर उठी।
कुछ चीज़ें कहनी नहीं होतीं।
वो feel होती हैं — और वही काफ़ी है।





