बेटी का पहला वेतन — जब याद सबसे बड़ा तोहफ़ा बन गई
पहली salary सिर्फ कमाई नहीं होती।
कभी-कभी वो एक छोटा सा फैसला होती है — जिसमें प्यार दिखता है, और यादें बोलती हैं।
Salary credit का message आया रात को 11:47 पर।
Priya ने screen देखी। ₹24,500।
पहली salary।
उसने phone रखा। फिर उठाया। फिर रखा।
कुछ करना चाहती थी — celebrate करना चाहती थी — लेकिन room में वो अकेली थी। Pune में। घर से 800 किलोमीटर दूर।
उसने WhatsApp खोला। माँ को message करने लगी।
फिर रुकी।
कुछ और सोचा।
अगले दिन office से निकलते हुए वो एक दुकान पर रुकी।
माँ को साड़ी पसंद थी — cotton की, हल्की, जो घर में पहन सकें। ज़्यादा expensive नहीं। बस अच्छी।
उसने दो देखीं। एक नीली, एक हल्की पीली।
माँ को नीला पसंद था। उसने याद किया — हाँ, नीला।
₹1,200।
उसने नीली ली।
घर courier किया। तीन दिन लगे।
जिस दिन parcel पहुँचा — माँ का call आया।
“यह क्या भेजा है?”
“साड़ी है।”
“यह क्यों?”
“पहली salary थी।“
माँ चुप हो गईं।
Priya को लगा — शायद कुछ गलत हो गया। शायद माँ को पसंद नहीं आई। शायद size गलत था।
“माँ?”
“हाँ।”
“ठीक है?”
“हाँ।” एक pause। “नीली है।”
“हाँ — आपको नीला पसंद है न?”
“हाँ।” फिर pause। “तुझे याद था।”

Priya को पता नहीं था कि यह line इतनी heavy होगी।
“तुझे याद था।”
माँ ने नहीं कहा — “thank you।” नहीं कहा — “bahut achhi hai।” बस यह कहा कि उसे याद था।
जैसे यही सबसे बड़ी बात थी।
रात को Priya ने सोचते हुए सोचा — माँ को कितनी चीज़ें याद रहती हैं।
उसे mango shake पसंद है — माँ को याद है। वो exam में blue pen use करती थी — माँ को याद है। उसे सोने से पहले कमरे में थोड़ी रोशनी चाहिए — माँ को याद है।
यह सब माँ ने कभी list नहीं बनाई। बस याद रहा।
और Priya को एक साड़ी का रंग याद था।
माँ रोई होंगी — उसे पता था। माँ कभी phone पर नहीं रोतीं। लेकिन बाद में, अकेले में, ज़रूर रोई होंगी।
वो रोना दुख का नहीं था।
अगले दिन माँ ने एक photo भेजी।
साड़ी पहनी हुई थीं। घर के आँगन में खड़ी थीं। सूरज की रोशनी थी।
Caption में सिर्फ एक emoji था।
दिल वाला।
Priya ने वो photo wallpaper लगा ली।
₹24,500 की पहली salary में से ₹1,200 गई।
और जो मिला — वो किसी account में नहीं आता।

और जो मिला — वो कहीं दिखता नहीं।




