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दादी और पोते का आखिरी खेल


जाने से एक रात पहले — दादी के साथ खेला गया एक आखिरी game, जो सिर्फ खेल नहीं था… एक याद थी, जो Aryan अपने साथ ले गया।


Aryan कल जाने वाला था।

College। Pune। Hostel। पहली बार घर से इतना दूर।

Bag packed था। Documents ready थे। माँ ने list बनाई थी — सब checked था।

रात को 10 बजे वो अपने कमरे में था — phone पर।
दादी आईं।

“Aryan।”
“हाँ दादी।”
“एक game खेलेगा?”


दादी और पोता चारपाई पर रात में ताश खेलते हुए, एक गर्म और भावुक पारिवारिक पल
एक साधारण ताश का खेल — जो एक याद बन गया

दादी को ताश पसंद था।

बचपन से — जब Aryan 6-7 साल का था — दादी उसे “सात-आठ” खेलना सिखाया था।
गर्मी की छुट्टियों में घंटों खेलते थे।

Aryan जीतता था तो दादी कहती थीं — “तू चीट करता है।”
Aryan हँसता था।

अब वो 18 का था। जाने वाला था।

दादी के हाथ में पुराना ताश का deck था।


दोनों बैठे। दादी के कमरे में।
वही पुरानी चारपाई। वही पुराना बल्ब।

दादी ने cards बाँटे।

Aryan ने cards देखे — किस्मत अच्छी थी आज।

“दादी, आप फिर हारेंगी।”
“चुप। खेल।”

पहला game Aryan जीता।

दादी ने cards फिर shuffle किए।
“एक और।”


तीन game हुए।

Aryan दो जीत गया —
उसे लगा शायद दादी ने उसे जानबूझकर जीतने दिया।
लेकिन दादी का face serious था।
वो genuinely खेल रही थीं।


बीच में माँ आईं —
“Aryan, सो जाओ, कल जल्दी उठना है।”

“बस एक game।”

माँ ने दादी को देखा।
दादी ने cards देखे।

माँ चली गईं।


आखिरी game के बाद दादी ने cards रखे।
वो कुछ देर चुप रहीं।

“Pune में ठीक रहेगा?”
“हाँ दादी।”

“खाना ठीक खाना।”
“हाँ।”

“रात को अकेले बाहर मत जाना।”

“दादी, मैं 18 का हूँ।”

“तो क्या हुआ।”
दादी ने उसे देखा —
“मेरे लिए तू वही है।”

Aryan ने कुछ नहीं कहा।


दादी ने cards उठाए। Aryan की तरफ बढ़ाए।

“यह रख।”
“यह ताश?”

“हाँ। वहाँ किसी से दोस्ती होगी — खेलना इनसे।

Aryan ने cards लिए।
पुराने थे। थोड़े worn out।

“दादी ये पुराने हैं।”

“हाँ। मेरे साथ खेला है इनसे।
तेरे साथ भी खेलेंगे।


अगले दिन Aryan गया।

Station पर सब थे — माँ, पापा, छोटी बहन।
दादी नहीं आई थीं — घुटने थे, भीड़ थी।


युवा के हाथ में पुराने ताश के पत्ते, ट्रेन की खिड़की के पास भावुक सफर का पल
कुछ चीज़ें साथ नहीं जातीं… पर उनकी यादें चली जाती हैं

Aryan ने train में bag रखा। Seat ली।

Pocket में हाथ डाला।
ताश था।

उसने एक card निकाला —
इक्का।
पुराना, थोड़ा मुड़ा हुआ।

खिड़की के बाहर platform था —
धीरे-धीरे पीछे जा रहा था।

Aryan ने card वापस रखा।


Pune में hostel की पहली रात —
roommate मिला।
वो भी थोड़ा nervous था।

Aryan ने bag से ताश निकाला।

“खेलोगे?”


दो युवा छात्र hostel कमरे में पहली रात ताश खेलते हुए, नई दोस्ती की शुरुआत
कुछ खेल खत्म नहीं होते… वो बस आगे बढ़ जाते हैं

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