माँ का Dabba: 3 साल बाद मिली वो chit… जो कभी पढ़ी ही नहीं गई थी
तीन साल… calls होते रहे, “सब ठीक है” चलता रहा।
लेकिन एक छोटी chit — जो कभी पढ़ी ही नहीं गई — सब बदलने वाली थी।
InnaMax News Desk | StoryLab Originals
Tiffin तीन साल बाद मिला।
Shifting के वक्त। एक पुरानी bag के अंदर। Plastic का orange dabba — वही जो माँ ने पहले दिन दिया था।
Kabir ने खोला।
अंदर एक chit थी।
Fold की हुई। बार-बार fold की हुई — जैसे किसी ने सोच-समझ के रखी हो।
लिखा था —
“खाना ठीक से खाना। रात को देर मत करना। और जब याद आए घर की — याद रखना, हम यहाँ हैं। — माँ”

Kabir वहीं बैठ गया।
तीन साल हो गए थे।
Kitni baar phone किया था।
Kitni baar news share की थी।
Kitni baar “सब ठीक है” कहा था।
लेकिन यह chit कभी नहीं ढूँढी।
उसने wallet निकाला।
Chit carefully अंदर रखी।
फिर माँ को call किया।
Ring गई।
“Haan beta?”
“Kuch nahi माँ… बस ऐसे ही।”
दूसरी तरफ थोड़ी देर की खामोशी।
फिर माँ की आवाज —
“रुक… chai बना रही हूँ। बात करते हैं।”
Kabir ने आँखें बंद की।
तीन साल की दूरी — एक call में नहीं मिटती…
लेकिन शुरू तो होती है।

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