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Draft में रह गया “I Like You” | College Last Day Love Story


यह कहानी उनके बारे में नहीं है…
यह उन बातों के बारे में है जो उनके बीच रह गईं।


An InnaMax StoryLab Original

उसने पानी की bottle खोली… एक sip लिया… फिर cap बंद करके बस हाथ में पकड़े रहा।”


Farewell hall के बाहर इतना शोर था कि silence छुप सकता था वहाँ।

किसी corner में लोग shirt पर signatures करवा रहे थे। कोई रोने का acting कर रहा था। Speaker पर old Bollywood songs चल रहे थे जिन पर अब कोई dance नहीं कर रहा था।

Kabir corridor की railing से टिककर खड़ा था।
White farewell shirt की sleeves उसने दो बार fold की थीं… फिर वापस नीचे कर लीं।

नीचे lawn में juniors photos ले रहे थे। हवा में deodorant, perfume और canteen की cold coffee सब mixed था।

“तू यहाँ क्या कर रहा है?”

वह मुड़ा।

Aarohi।

Black kurti। खुले बाल। हाथ में वही blue file जो वह हर presentation में लेकर आती थी — चाहे अंदर कुछ हो या नहीं।

Kabir ने हल्का सा smile किया।
“बस… noise से break ले रहा था।”

“झूठ।”

“क्या?”

“तू crowd avoid कर रहा है।”

Kabir कुछ बोला नहीं।

Aarohi उसके बगल में आकर railing पर झुक गई। नीचे देखा। फिर बिना उसकी तरफ देखे पूछा—

“Packing हो गई Bangalore की?”

“हम्म।”

“Excited?”

उसने answer देने से पहले bottle खोली। एक sip लिया।
“पता नहीं।”

“मतलब नहीं है।”

Kabir हँसा।
“तू अभी भी सब समझ जाती है?”

“तू अभी भी सब छुपा लेता है?”


Two unfinished cold coffee cups on college corridor railing during sunset
कुछ conversations खत्म नहीं होतीं… बस रुक जाती हैं।

दोनों चुप।

नीचे से किसी ने चिल्लाया—
Kabir bhai! One photo!”

उसने नीचे देखा। हाथ हिलाया। गया नहीं।

Aarohi धीरे से मुस्कुराई।

“याद है first year में तू कितना बोलता था?”

“गलतफहमी है।”

“नहीं। सच में। Orientation वाले दिन तूने मुझे पूरा campus घुमा दिया था बिना पूछे कि मुझे घूमना भी है या नहीं।”

Kabir हँसा।
“तू खो जाती।”

“मैं नहीं खोती।”

“तू library ढूँढते-ढूँढते mechanical block पहुँच गई थी।”

Aarohi भी हँस पड़ी।

कुछ seconds के लिए सब वापस normal लगने लगा। जैसे college खत्म नहीं हो रहा। जैसे यह बस एक और शाम है।

फिर वही feeling वापस आ गई।

वह वाली…
जो पिछले एक साल से दोनों ignore कर रहे थे।

Aarohi ने railing पर उँगली से कुछ बनाना शुरू किया।
Invisible circles।

Kabir उसे देख रहा था।

उसे हमेशा लगता था Aarohi कुछ बोलने से पहले अपने हाथ busy कर लेती है।

“Tu…” वह रुकी।
“छोड़।”

“नहीं बोल।”

“नहीं… stupid लगेगा।”

Kabir ने पहली बार सीधे उसकी तरफ देखा।
“हमारे बीच इससे ज़्यादा stupid चीज़ें हुई हैं।”

वह हँसी। हल्की सी।

फिर धीरे से बोली—

“तुझे कभी लगा… college बहुत जल्दी खत्म हो गया?”

Kabir ने तुरंत answer नहीं दिया।

क्योंकि सच कुछ और था।

उसे लगता था जो खत्म हो रहा था… वह college नहीं था।

वह Aarohi थी।

उसका रोज दिखना।
Random notes भेजना।
Lab में pen माँगना जबकि pen उसके पास होता था।
Presentation से पहले “मुझे नहीं आता” बोलना… और फिर सबसे अच्छा बोल जाना।

Kabir ने नीचे देखा।

“हाँ,” उसने आखिर में कहा।
“थोड़ा।”

Aarohi ने उसे देखा। जैसे वह कुछ और सुनना चाहती थी।

पर Kabir वहीं रुक गया।

जैसे हमेशा रुक जाता था।


शाम और orange हो गई थी।

Corridor खाली होने लगा।

दूर farewell hall में कोई “Kabira” गा रहा था बेसुरा होकर।

Aarohi अचानक हँसी।
“यह song सुनके मुझे हमेशा तेरी याद आएगी।”

Kabir का दिल literally एक second रुक गया।

“क्यों?”

“क्योंकि second year fest में तूने इसी song पर guitar बजाने की कोशिश की थी।”

“कोशिश?”

“हाँ। तीन chords गलत थे।”

“तुझे आज तक याद है?”

“तू गलत चीज़ें confidence से करता था। इसलिए याद है।”

Kabir कुछ बोल सकता था यहाँ।

कुछ भी।

बस एक line।

मत जा।
Stay.
I like you.
कुछ भी।

पर उसी समय नीचे से फिर आवाज़ आई—

“Aarohi! Group photo!”

वह मुड़ी।
“आ रही!”

फिर उसने Kabir की तरफ देखा।

दोनों के बीच कुछ अटका हुआ था। साफ़ महसूस हो रहा था।

Aarohi ने धीरे से पूछा—
“तू नीचे आ रहा है?”

Kabir ने होंठ खोले।
फिर बंद कर लिए।

“हाँ… बस आता हूँ।”

वह कुछ seconds वहीं खड़ी रही। शायद wait कर रही थी।

फिर उसने सिर हिलाया।
“Okay.”

और चली गई।

Kabir उसे जाते हुए देखता रहा।

Black kurti। Blue file। धीरे चलते कदम।

वह बस एक बार मुड़ जाती… तो शायद वह बोल देता।

पर वह नहीं मुड़ी।


उस रात hostel unusually quiet था।

Kabir ने suitcase pack किया।
दो t-shirts वापस निकालीं। फिर रखीं।

Phone बार-बार unlock किया।

Aarohi chat open की।

“Reached room?”
type किया।

delete।

“आज कुछ कहना था।”
delete।

उसने phone bed पर फेंक दिया।

Ceiling fan घूमता रहा।


साल निकल गए।

Jobs। Cities। Deadlines।

Kabir ने धीरे-धीरे खुद को convince कर दिया कि वह बस college crush था।

फिर एक रात — 1:47 AM।

Phone vibrate हुआ।

Unknown number।

एक YouTube link।


Smartphone glowing in dark hostel room with late night WhatsApp message
कुछ songs वापस नहीं आते… वे सब कुछ वापस ले आते हैं।

उसने खोला।

“Kabira — Live Acoustic.”

Kabir सीधा बैठ गया।

नीचे बस एक line थी—

“आज यह song कहीं सुना… और तू याद आ गया।”

उसके हाथ अचानक ठंडे हो गए।

इतने साल बाद भी।

इतना simple message।

इतना असर।

उसने तुरंत reply नहीं किया।

बस screen देखता रहा।

फिर धीरे-धीरे type किया—

“तूने उस दिन कुछ कहना था?”

Typing…

रुक गया।

फिर वापस आया।

Aarohi का reply:

“था शायद।”

Kabir ने आँखें बंद कर लीं।

Room में सिर्फ AC की आवाज़ थी।

और इतने साल पुरानी एक शाम… वापस लौट आई थी।

उसने फिर type किया—

“फिर कहा क्यों नहीं?”

इस बार reply आने में थोड़ा time लगा।

बहुत थोड़ा।

लेकिन उतना… जिसमें कोई पूरी जिंदगी सोच ले।

फिर message आया—

“तूने भी तो नहीं कहा।”


Half-open window with distant city lights and quiet night atmosphere
जो कहना था….वह शायद अब भी बाकी है।

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