“आँख के बदले आँख…” — लेकिन revenge हमें अंदर से क्यों तोड़ देता है? — But Why…?
कभी-कभी revenge सामने वाले को hurt करने के लिए नहीं…खुद के अंदर टूटे हुए हिस्से को शांत करने के लिए होता है।
लेकिन आखिर क्यों pain खत्म होने के बजाय और गहरा हो जाता है?
— by Team InnaMaxNews | “But Why…?” Editorial Series
“आँख के बदले आँख…”
— महात्मा गांधी
लेकिन सच ये भी है कि जब कोई हमें hurt करता है…
उस पल revenge सही लगता है।
ऐसा लगता है कि सामने वाले को वही pain महसूस करवाना जरूरी है।
वरना अंदर कुछ अधूरा रह जाएगा।
शायद इसलिए लोग silent treatment देते हैं।
कुछ लोग public insult का इंतज़ार करते हैं।
कुछ लोग सालों तक grudges पकड़कर रखते हैं।
और कुछ लोग आगे बढ़ ही नहीं पाते।
क्यों?
क्योंकि revenge अक्सर सामने वाले के लिए नहीं होता।
वो हमारे अंदर टूटे हुए हिस्से के लिए होता है।
जब कोई हमें ignore करता है, cheat करता है, disrespect करता है…
तो सिर्फ situation hurt नहीं करती।
हमारा ego, trust, self-worth —
सब एक साथ हिल जाते हैं।
फिर दिमाग quietly ये deal बनाता है:
“जब तक उसे दर्द नहीं होगा… तब तक मुझे शांति नहीं मिलेगी।”

चुप्पी करती है।
और यही जगह dangerous होती है।
क्योंकि उस moment में हम healing नहीं चाहते।
हम balance चाहते हैं।
लेकिन problem ये है कि revenge कभी balance नहीं बनाता।
वो बस pain को direction बदल देता है।
कुछ देर के लिए अच्छा लगता है।
लगता है हमने जीत लिया।
लेकिन बाद में?
Mind फिर भी वही रहता है।
Overthinking फिर भी होती है।
उस इंसान का असर फिर भी खत्म नहीं होता।
कभी notice किया है?
जिस इंसान से हम सबसे ज्यादा नफ़रत करते हैं…
धीरे-धीरे वही इंसान हमारे thoughts control करने लगता है।
हम अपनी energy उसके reactions पर खर्च करने लगते हैं।
और तब revenge punishment कम…
emotional attachment ज्यादा बन जाता है।

लेकिन उनका असर अंदर चलता रहता है।
असल में कई बार हमें इंसान से नहीं…
उस feeling से बदला चाहिए होता है जो उसने हमारे अंदर छोड़ी।
वो humiliation।
वो helplessness।
वो “मैं इतना weak क्यों feel कर रहा हूँ?” वाला सवाल।
लेकिन किसी और को hurt करके वो feeling पूरी तरह जाती नहीं।
क्योंकि अंदर की चोट logic से नहीं भरती।
इसीलिए कुछ लोग revenge लेने के बाद भी empty feel करते हैं।
क्योंकि उन्हें closure नहीं मिला…
बस distraction मिला।
और शायद maturity का सबसे मुश्किल part यही है —
हर दर्द का जवाब reaction नहीं होता।
कुछ चीज़ें छोड़ना weakness नहीं होता।
कभी-कभी वही सबसे बड़ा control होता है।
क्योंकि हर लड़ाई जीतना जरूरी नहीं।
कुछ लड़ाइयों से बाहर निकलना ज्यादा जरूरी होता है।
और शायद peace तब शुरू होती है…
जब हम ये समझ लेते हैं कि
किसी को hurt करके हमारा दर्द छोटा नहीं हो जाता।

जब हम हर दर्द का जवाब देना छोड़ देते हैं।
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