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But Why…?

“अहं ब्रह्मास्मि” — फिर भी हम अपनी self worth क्यों नहीं समझते? | But Why…?


हम पूरी life validation ढूँढते रहते हैं… लेकिन शायद सबसे बड़ी problem ये है कि हम अपनी value खुद नहीं समझते।

— by Team InnaMaxNews | “But Why…?” Editorial Series


क्यों हम अपनी value खुद सबसे कम समझते हैं?

“अहं ब्रह्मास्मि”
— उपनिषद

मतलब…
“मैं ही ब्रह्म हूँ।”
“मेरे अंदर भी वही शक्ति है।”

लेकिन funny बात ये है कि इतने powerful विचारों के बीच भी…
अधिकतर लोग अंदर से खुद को छोटा ही समझते हैं।

किसी और की तारीफ सुनकर लगता है —
“वो deserve करता है… मैं नहीं।”

किसी opportunity के सामने खड़े होकर लगता है —
“शायद मैं enough नहीं हूँ।”

और धीरे-धीरे ये feeling normal लगने लगती है।

हम सोचते हैं self doubt सिर्फ confidence की कमी है।
लेकिन कई बार ये सालों की conditioning होती है।

बचपन से comparison सुनते-सुनते…
“देखो शर्मा जी का बेटा…”
“उससे सीखो…”
“इतना भी नहीं आता?”


Young Indian boy feeling emotionally isolated during family comparison conversation
हर comparison धीरे-धीरे इंसान की अपनी नजर बदल देता है।

धीरे-धीरे इंसान अपनी identity achievements से जोड़ देता है।

Marks अच्छे आए → मैं valuable हूँ।
Job अच्छी मिली → मैं important हूँ।
लोग notice करें → मैं matter करता हूँ।

और जब ये चीजें नहीं मिलतीं…
तो अंदर से value भी गिरने लगती है।

Problem ये नहीं कि हम imperfect हैं।
Problem ये है कि हमने खुद को सिर्फ results के हिसाब से measure करना शुरू कर दिया।


Young Indian person scrolling social media alone at night feeling emotionally low
कभी-कभी screen चमक रही होती है… लेकिन अंदर confidence धीरे-धीरे dim हो रहा होता है।

Social media ने भी चीजें आसान नहीं कीं।

हर जगह लोग अपनी best moments दिखा रहे हैं।
Success. Trips. Fitness. Relationships. Luxury.

और हम अपनी behind-the-scenes life को उनकी highlight reel से compare करने लगते हैं।

फिर धीरे-धीरे एक silent belief बनता है —
“शायद मैं उतना खास नहीं हूँ।”

सबसे dangerous बात ये है कि बाहर से normal दिखने वाले लोग भी अंदर से खुद को reject कर रहे होते हैं।

कई लोग compliments accept तक नहीं कर पाते।

कोई कहे —
“तुम बहुत अच्छा करते हो…”

तो तुरंत जवाब आता है —
“नहीं यार… बस ठीक-ठाक है।”

क्यों?

क्योंकि कहीं अंदर लगता है कि अगर हमने अपनी value मान ली…
तो लोग हमें arrogant समझेंगे।

इसलिए हम खुद को छोटा दिखाने लगते हैं।
Safe feel होता है।

लेकिन irony देखो…

दुनिया आपको उतना ही seriously लेने लगती है
जितना seriously आप खुद को लेते हो।

Self worth loud होने से नहीं आती।
ना ही दूसरों से ऊपर feel करने से।

वो आती है ये समझने से कि
आपकी value सिर्फ productivity नहीं है।
सिर्फ salary नहीं है।
सिर्फ validation नहीं है।

कुछ लोग कमरे में आते ही peace ले आते हैं।
कुछ लोग बिना बोले भी भरोसा दे देते हैं।
कुछ लोग टूटकर भी दूसरों को संभालते रहते हैं।

ये भी value है।

लेकिन ऐसी चीजें report card में नहीं दिखतीं।
इसलिए हम उन्हें count ही नहीं करते।

शायद इसी वजह से इतने capable लोग भी अंदर से empty feel करते हैं।

क्योंकि उन्होंने दुनिया की नजर से खुद को देखना सीख लिया…
अपनी नजर से नहीं।

“अहं ब्रह्मास्मि” शायद ego की line नहीं थी।

शायद उसका मतलब ये था कि
आप खुद को जितना छोटा समझ रहे हो…
आप उससे कहीं ज्यादा हो।

और शायद life का सबसे बड़ा struggle यही है —
दूसरों को prove करना नहीं…

खुद को पहचानना।


Silhouette of person standing peacefully on rooftop during sunrise
शायद healing शुरू तब होती है… जब इंसान खुद को कम समझना बंद करता है।

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