बारह साल बाद… आख़िरी बेंच ने दो दोस्तों को फिर मिला दिया | Friendship Story
“भाई… आख़िरी बेंच हमारी ही रहेगी।”
आठवीं क्लास के आख़िरी दिन निखिल ने हँसते हुए कहा।
आर्यन ने डेस्क पर पेंसिल से लिखा—
“Friends Forever.”
दोनों को लगा…
स्कूल कभी ख़त्म नहीं होगा।
फिर बोर्ड की परीक्षा आई।
किसी ने साइंस चुनी…
किसी ने कॉमर्स।
धीरे-धीरे…
स्कूल सिर्फ़ एक याद बन गया।
बारह साल बाद…
स्कूल का रीयूनियन था।
आर्यन बहुत उत्साह से पहुँचा।
पुरानी क्लास में गया।
वही ब्लैकबोर्ड…
वही खिड़की…
और वही आख़िरी बेंच।
उसने मुस्कुराकर डेस्क पर हाथ फेरा।
पेंसिल से लिखा हुआ…
“Friends Forever”
अब भी वैसा ही था।
तभी पीछे से आवाज़ आई—
“अब भी मिटा नहीं?”
आर्यन पलटा।
निखिल खड़ा था।
दोनों कुछ सेकंड तक बस एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर बिना कुछ कहे…
गले लग गए।
न कोई शिकायत…
न ये कि किसने फोन नहीं किया…
न ये कि कौन कितना बदल गया।
रीयूनियन खत्म होने लगा।
सब लोग जाने लगे।
निखिल ने जाते-जाते वही पुरानी बात दोहराई—
“भाई…
आख़िरी बेंच हमारी ही रहेगी।”
आर्यन मुस्कुरा दिया।
कुछ रिश्ते…
रोज़ बात करने से नहीं चलते।
बस…
एक पुरानी बेंच उन्हें ज़िंदा रखती है।
— समाप्त —
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