नौकरी गई, दोस्ती बची और शुरू हुआ अपना सफर: निशा-प्राची की कहानी
निशा और प्राची बचपन से ही एक-दूसरे की परछाइयाँ थीं। लखनऊ के एक ही स्कूल में साथ पढ़ीं, फिर एक ही कॉलेज से इंटर और ग्रेजुएशन किया। दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि लोग अक्सर कहते, “तुम दोनों सगी बहनें लगती हो।”
स्कूल के दिनों से ही उनके बीच एक ऐसा भरोसा था, जिसमें छोटी खुशियों से लेकर बड़े सपनों तक के लिए जगह थी।
गुस्सा हो, खुशी हो, कोई छोटा-सा सपना हो या जिंदगी को लेकर कोई बड़ा फैसला—दोनों एक-दूसरे से बात किए बिना शायद ही कुछ तय करती थीं।
फिर सपनों ने उन्हें लखनऊ से दिल्ली पहुँचा दिया।
प्राची ने एक Management Company में PRO के तौर पर काम शुरू किया, जबकि निशा ने एक प्रतिष्ठित अख़बार में Reporter की जिम्मेदारी संभाली।
दिल्ली की तेज रफ्तार जिंदगी में भी उनकी दोस्ती की रफ्तार धीमी नहीं हुई। मौका मिलता तो दोनों मिलतीं, पुरानी बातें करतीं और अपने स्कूल-कॉलेज के दिनों को याद करतीं।
लेकिन एक दिन उनके सामने ऐसा professional conflict आया, जिसने उनकी दोस्ती ही नहीं, उनके अपने मूल्यों की भी परीक्षा ले ली।

यह कहानी निशा सिंह द्वारा साझा किए गए अनुभव पर आधारित है।
एक Press Conference में दोस्ती और Profession आमने-सामने थे
प्राची की कंपनी ने एक बड़ा Press Conference आयोजित किया।
निशा अपने अख़बार की जिम्मेदारी के तहत उसी Press Conference को cover करने पहुँची।
मंच पर प्राची अपने professional role में थी और सामने Reporter की भूमिका में निशा।
दोनों ने एक-दूसरे के साथ दोस्ती का व्यवहार नहीं, बल्कि अपने-अपने profession की मर्यादा निभाई।
निशा ने सवाल पूछे, facts note किए और अपनी पत्रकारिता की जिम्मेदारी पूरी की।
प्राची ने भी अपनी कंपनी और event की जिम्मेदारी निभाई।
उस वक्त शायद दोनों को अंदाजा भी नहीं था कि असली परीक्षा Press Conference में नहीं, उसके बाद शुरू होगी।

जब एक खबर ने निशा के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया
अख़बार लौटने के बाद निशा को उसके Editor ने बुलाया।
उसे निर्देश दिया गया कि Press Conference की खबर इस तरह तैयार की जाए कि कंपनी की image खराब हो।
कारण भी साफ था—कंपनी से अख़बार को विज्ञापन नहीं मिल रहा था।
निशा के लिए यह सिर्फ एक खबर लिखने का सवाल नहीं था।
जिस कंपनी की खबर उसे लिखनी थी, उसकी PRO उसकी बचपन की दोस्त प्राची थी।
निशा ने अपने Editor को यह बात साफ तौर पर बताई।
लेकिन उस पर दबाव बढ़ता गया।
एक तरफ नौकरी थी।
दूसरी तरफ पत्रकारिता की अपनी समझ और वर्षों से चली आ रही दोस्ती।
और आखिरकार निशा ने वह फैसला लिया, जिसने उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
उसने इस्तीफा दे दिया।

नौकरी छोड़ने के बाद क्या दोनों ने अपनी राह खुद चुन ली?
निशा दिल्ली की नौकरी छोड़कर पटना वापस आ गई।
फैसला आसान नहीं था।
एक तरफ career था, शहर था और professional पहचान थी।
दूसरी तरफ उसके लिए यह सवाल था कि वह अपने principles के साथ कितना समझौता कर सकती है।
निशा ने नौकरी छोड़ना चुना।
उसके पास उस वक्त कोई बड़ा business plan नहीं था। लेकिन उसके पास एक चीज जरूर थी—अपने फैसले पर विश्वास।
जब प्राची को पूरी बात पता चली, तो वह भी इस स्थिति से प्रभावित हुई। उसने भी नौकरी और उन परिस्थितियों से दूरी बनाने का फैसला किया और निशा के पास पटना आ गई।
दोनों ने बैठकर अपनी निराशा और आगे की अनिश्चितता पर बात की।
फिर दोनों ने तय किया कि अब किसी और के दबाव में नहीं जीना है—अपनी राह खुद बनानी है।
निशा की सच्चाई और reporting की समझ के साथ प्राची की PR और communication skills थीं।
यही उनकी दोस्ती आगे उनके काम की ताकत बनने वाली थी।

क्या उनकी दोस्ती में ही छिपा था पहला Business Idea?
दोनों ने मिलकर एक छोटे से startup की शुरुआत की—एक Media और Communication Firm, जो reporting और PR services में transparency और ईमानदारी को महत्व देती थी।
शुरुआत आसान नहीं थी।
सीमित capital, काम की कमी और competition—तीनों उनके सामने थे।
लेकिन दोनों ने अपनी-अपनी strengths के हिसाब से जिम्मेदारियाँ संभालीं।
निशा ने अपनी reporting की साख और content की समझ से काम संभाला, जबकि प्राची ने clients के साथ communication और branding की जिम्मेदारी ली।
धीरे-धीरे उनकी कंपनी का नाम लोगों तक पहुँचने लगा।
Clients ने उनकी transparency, ethics और creativity को सराहा।
कुछ ही महीनों में उनका छोटा startup अच्छे track पर आ गया और उनके लिए यह सिर्फ नौकरी का विकल्प नहीं रहा, बल्कि अपनी शर्तों पर काम करने की एक नई शुरुआत बन गया।
निशा और प्राची की कहानी सिर्फ एक startup की कहानी नहीं है।
यह उस फैसले की कहानी भी है, जो मुश्किल समय में किसी व्यक्ति को अपने मूल्यों और अपने भविष्य के बीच लेना पड़ता है।
निशा के लिए वह फैसला नौकरी छोड़ने का था।
प्राची के लिए अपनी दोस्त के साथ खड़े होने का।
और दोनों के लिए अगला फैसला था—परिस्थितियों के आगे रुकने के बजाय अपनी राह खुद बनाने का।
कभी-कभी किसी career setback का अंत किसी नए रास्ते की शुरुआत भी बन सकता है।
निशा की ईमानदारी और प्राची की communication skills जब साथ आईं, तो वही दोस्ती उनके लिए एक business idea बन गई।
और शायद यही उनकी कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा है—
कभी-कभी सही दोस्त वह नहीं होता जो आपको मुश्किल से बचा ले, बल्कि वह होता है जो मुश्किल के बाद आपके साथ खड़ा होकर नया रास्ता बनाने लगे।
दोस्ती से Partnership तक पहुँचने से पहले क्या समझना चाहिए?
क्या दोस्ती और Professional Partnership के बीच boundaries तय करना जरूरी है?
हाँ। दोस्ती में भरोसा महत्वपूर्ण है, लेकिन Professional Partnership में roles, responsibilities और decision-making को स्पष्ट रखना भी जरूरी होता है।
क्या दो अलग-अलग skills मिलकर Business Opportunity बन सकती हैं?
बिल्कुल। अलग-अलग expertise जब किसी common goal के लिए साथ आती हैं, तो वे एक-दूसरे की strengths को complement कर सकती हैं और नए काम की संभावना पैदा कर सकती हैं।
Startup शुरू करते समय सबसे जरूरी चीज Capital ही होती है?
Capital महत्वपूर्ण है, लेकिन idea की clarity, relevant skills, execution, customer understanding और trust भी शुरुआती business के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
क्या Career Setback हमेशा नुकसान ही होता है?
जरूरी नहीं। कभी-कभी setback व्यक्ति को अपनी priorities, skills और future direction पर दोबारा सोचने का अवसर भी देता है।
Professional Relationship में Trust क्यों जरूरी है?
Trust communication को मजबूत करता है और clients, colleagues तथा business partners के साथ लंबे समय के professional relationships की नींव तैयार करता है।
— StoryLab की और कहानियाँ
रात 2 बजे CCTV में जो दिखा, उसने सब कुछ बदल दिया
WFH Permanent था… फिर एक Monday Morning Call आ गई
पापा ने अपने लिए नए shoes कभी क्यों नहीं खरीदे? | A Story of Quiet Pride
रात के 2 बजे भी Scrolling क्यों करते रहते हैं? Sleep & Screen Time Psychology
लड़कियां पढ़ाई में आगे, घर में भी ज़िम्मेदार — फिर भी “settle” होने का pressure उन पर ज़्यादा क्यों?




