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घूंघट से Dublin तक — अंजली त्रिपाठी की ज़िंदगी एक उपन्यास है


वो इलाहाबाद की एक गली में खड़ी थीं।

बाहर निकलने का मौका मिला था। शायद उन्हीं दिनों में से एक जब निकलने की इजाज़त मिली।

रोडवेज की बस गुज़री। चिड़िया सुनाई दी। लोग दिखे।

और उन्हें अचानक एहसास हुआ — कि दुनिया में वो भी गिनती की थीं।

यह कोई metaphor नहीं था। यह उनकी असलियत थी।

उनका नाम अंजली त्रिपाठी है। पहले अंजली पांडे थीं — Varanasi की। फिर Allahabad की, फिर Mumbai की, फिर Dublin की।


वो कहानी जो किसी किताब में नहीं मिलेगी — इसलिए हम लिख रहे हैं

PROFILE AT A GLANCE

  • क्यों उन्हें बचपन में अकेले स्कूल जाने तक की अनुमति नहीं थी।
  • एक ₹800 की मिक्सी खरीदने पर उन्हें घंटों तक क्यों सुनना पड़ा।
  • वह कौन-सा पल था, जब उन्हें पहली बार लगा— “दुनिया में मेरी भी गिनती है।”
  • क्यों वह मानती हैं कि ज़िंदगी बदलने के लिए सिर्फ़ एक मौका काफी होता है।
  • आख़िर Dublin पहुँचकर उन्हें ऐसी कौन-सी आज़ादी मिली, जिसकी तलाश बरसों से थी।

वो एक lawyer की बेटी हैं — जिसे class 9 के बाद अकेले school जाने की इजाज़त नहीं थी।

वो एक बहू हैं — जिसे ₹800 की मिक्सी खरीदने पर घंटों तक सुनना पड़ा।

वो एक माँ हैं — जिनके दो बच्चे Dublin में पले-बढ़े, जिनकी बेटी Trinity College Dublin में है, Ireland Debating Championship में First Runner-Up है, TED Talk दे चुकी है।

और वो एक professional हैं — जो Dublin में Amazon और Microsoft दोनों में Data Center Specialist के तौर पर काम कर चुकी हैं।

यह कहानी UP के उन लाखों घरों की है जहाँ लड़कियों की ज़िंदगी दूसरों की मर्ज़ी से चलती है। और यह उस एक औरत की है — जो निकली। और निकलती रही।


जिस दिन उन्होंने किसी के साथ स्कूल जाना चाहा — उसी दिन स्कूल छूट गया


पापा — Varanasi के वकील। मम्मी — Geography की teacher। भाई उनसे 11 साल छोटा था, इसलिए बचपन का बड़ा हिस्सा अकेले बीता।

घर का माहौल काफ़ी अनुशासित था। Class 8 तक मम्मी उन्हें खुद स्कूल छोड़ने और लेने जाती थीं।


Illustration of young Anjali Tripathi leaving home for school for the first time while a cycle rickshaw waits outside.
Illustrative representation of Anjali’s childhood, when strict family rules shaped her early years.

जब GGIC में admission हुआ, तब पहली बार अकेले स्कूल जाने की अनुमति मिली। घर से स्कूल काफ़ी दूर था, इसलिए रिक्शा लगाया गया था। पापा की एक ही हिदायत थी—

“सीधे स्कूल जाना है और सीधे घर आना है। कहीं और गए, तो स्कूल बंद करवा देंगे।”

यह बात अंजली आज भी याद करती हैं। उनके मुताबिक, उस समय का वह डर आज भी कहीं न कहीं उनके भीतर मौजूद है।

Hindi medium background होने की वजह से Allahabad में कॉलेज के शुरुआती दिनों में English समझने में समय लगा।

फिर भी उन्होंने CPMT की परीक्षा दी। लेकिन चयन से सिर्फ़ 17 नंबर पीछे रह गईं।

B.Ed. में सिर्फ़ आठ नंबर से merit list छूट गई।

B.Sc. में admission मिला, लेकिन तब तक घर में शादी की बातें शुरू हो चुकी थीं।

“कुछ भी करो, कर्ज़ा लो, बेच दो — शादी करके हटा दो।”

आख़िरकार शादी हो गई।

इसके बाद उनका नया जीवन शुरू हुआ—और उसके साथ एक नया संघर्ष भी।


जिस उम्र में सपने पूरे होते हैं… वो रसोई में बीत गई


बीस से छब्बीस — जिस उम्र में लड़कियों की अपनी दुनिया होती है — उनके पास सुबह से रात तक सिर्फ काम था।

Allahabad में पति का coaching institute था। गरीब बच्चों को free पढ़ाते थे — नेक काम, लेकिन किराया और loan की EMI रोज़ का दबाव था।

घर में जब रिश्तेदार आते तो movie देखने जाते, कटरा घूमने जाते, नैनी जाते। अंजली नहीं जा सकती थीं। खाना कौन बनाएगा? रात के 11 बजे जब सब लौटते, रोटी चाहिए होती।

मुझे गर्मी नहीं लगती थी” — वो बताती हैं, हल्की हँसी के साथ। “घमौरियां निकली रहती थीं।

2005 में पति Gorakhpur गए किसी काम के लिए। उसी रात institute में चोरी हो गई — सारा setup, कोई insurance नहीं।

इसी बीच, Allahabad के बाद Mumbai आए, और 2009 में अंजली ने अपने छोटे-छोटे पैसे जोड़कर ₹800 की एक local मिक्सी खरीदी।

घर आईं। उसे टेबल पर रखवाया गया। फिर किनारे बुलाया गया।

घंटों चला — “बेवकूफ औरतबिना पूछे ले आई।”

“सुनने की आदत थी। सुनती रही। पर अंदर कहीं — सब दर्ज होता जा रहा था।”


Anjali Tripathi with her husband at their home in Dublin, Ireland.
Anjali Tripathi and her husband at their home in Dublin after years of struggle and rebuilding life abroad.

₹1,000 लेकर निकले — Dublin में घर बनाया


2007 में उनके पति ने एक बड़ा फैसला लिया।

जेब में सिर्फ़ ₹1,000 लेकर वे Mumbai पहुँचे।

एक जान-पहचान के driver के साथ chawl में ठिकाना मिला। रात को न तकिया था, न बिस्तर। कई दिन बिस्किट खाकर गुज़ारे।

करीब तीन महीने बाद Threes Infotech में ICICI Bank के client के लिए पहली नौकरी मिली। Salary थी ₹7,000।

उसी ₹7,000 की नौकरी के सहारे पत्नी और डेढ़ साल की बेटी को Mumbai बुलाया। Nala Sopara में किराये का घर मिला।

₹25,000 का security deposit उस समय किसी पहाड़ से कम नहीं था।

“उस टाइम लगता था—बाप रे! इतने पैसे कहाँ से आएँगे?”

अंजली पहली बार Allahabad से बाहर निकलीं।

Mumbai ने उन्हें एक बिल्कुल अलग दुनिया दिखाई। उन्होंने भी अपने स्तर पर कमाना शुरू किया। घर पर तोरण (door hangings) बनाती थीं। पैसे कम थे, लेकिन पहली बार अपनी मेहनत की कमाई हाथ में आई थी।

2010 में उनके पति Polaris में Citibank project पर काम करने लगे। 2011 में Dublin जाने का अवसर मिला।

दोनों ने सोचा था कि दो साल बाद वापस लौट आएँगे।

अंजली मुस्कुराकर कहती हैं, “मेरे मन में था कि नहीं होगा। हम वहीं रहेंगे। लेकिन यह मैंने किसी को नहीं बताया।”

2024 में वे अपनी शादी की 25वीं सालगिरह मनाने भारत लौटीं। तब तक Dublin ही उनका घर बन चुका था।


जिस interview में उन्होंने गलत जवाब दिया — और job मिली


Ireland में पहला job interview था। Montessori school।

Interviewer ने पूछा — Tell me about yourself.

अंजली ने कहा —

I am the mother of my children, the wife of my husband, the princess of my father

बस इतना। Interview खत्म।

Job मिली — 10 Euro per hour।

वो ₹1,000 per hour था उस वक्त। वही ₹1,000 जो पति लेकर Mumbai निकले थे।

“वो emotion मेरे लिए क्या था — वो ₹1,000।”

इसके बाद — Amazon। फिर Microsoft। फिर दोबारा Amazon

Data Center में Media Protection का काम। Servers। Decommissioning। Confidential data की security।

PGDCA और BEd की degrees थीं। वही काम आईं।

आज वो 4-5 men की team में अकेली woman हैं — और सबसे सुनी जाती हैं।

“Touchwood — मेरा respect, मेरी बात सब सुनते हैं।”


Anjali Tripathi with her husband, daughter Khushi and son Ishaan enjoying family time outdoors.
Years after leaving India, Anjali Tripathi now enjoys a fulfilling family life with her husband and children.

उन्होंने अपने बच्चों को वो बचपन दिया — जो उन्हें कभी नहीं मिला


2007 में जब उनके पति पहली बार America गए।

खुशी तब बहुत छोटी थी। जब भी ऊपर से कोई plane गुज़रता, वह आसमान की ओर मुक्का दिखाकर कहती—

“खुद चले गए… मुझे छोड़ दिया!”

जब उनके पति वापस आए तो खुशी मासूमियत से बोली—

“अब तुम्हें मेरे लिए plane खरीदना पड़ेगा, क्योंकि मुझे dance करना है।”

जिस बच्ची ने कभी आसमान की ओर देखकर कहा था—”खुद चले गए… मुझे छोड़ दिया!”, वही खुशी आज Ireland Debating Championship में First Runner-Up रह चुकी है, TED Talk दे चुकी है और Trinity College Dublin की पहली merit list में अपना स्थान बना चुकी है।

एक बार school में उसे कुछ present करना था। अंजली को अपनी मम्मी याद आईं, जो Geography की teacher थीं। उन्हें रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता याद थी। उन्होंने उसे English में ढाला और खुशी ने उसे school में प्रस्तुत किया।

उसकी teacher इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने वही प्रस्तुति Ireland के Education Minister को भी दिखाई।

Principal ने पहले से ही अंजली की तरफ tissue box बढ़ा दिया था।

2013 में ज़िंदगी ने एक और खुशखबरी दी—ईशान। Doctors ने कहा था कि दोबारा conceive होने की संभावना बहुत कम है। यह बात सिर्फ़ अंजली और उनके पति जानते थे। उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा।

अंजली आज भी उस पल को याद करते हुए मुस्कुराती हैं।

यह वही माँ थीं जिन्हें कभी movie देखने तक नहीं जाने दिया गया। जो सुबह 4–5 बजे उठकर 40–50 लोगों के लिए खाना बनाती थीं। जिन्हें ₹800 की मिक्सी खरीदने पर घंटों तक सुनना पड़ा था।


Anjali Tripathi with her daughter Khushi during a visit to Hobbiton Movie Set in New Zealand.
Anjali Tripathi with daughter Khushi during their visit to the famous Hobbiton Movie Set in New Zealand.

आज वही माँ अपनी बेटी को Trinity College Dublin के दरवाज़े तक छोड़कर लौटती हैं।


इतना सब होने के बाद… उन्होंने ज़िंदगी से क्या सीखा?


Appreciation एक ज़रूरत है, luxury नहीं।

अंजली कहती हैं — Ireland में पहली बार जब किसी ने “Good job” कहा, तब वो लगभग तीस साल की थीं। उसी दिन उन्हें एहसास हुआ कि appreciate न होना इंसान को अंदर से कितना खोखला कर देता है।
तब से वो छोटी-से-छोटी बात पर भी लोगों की तारीफ़ करना नहीं भूलतीं।

“People need appreciation. It can change someone’s day.”

Language सिर्फ communication नहीं — survival है।

Dublin में जब पहली बार doctor के पास जाना पड़ा और “शरीर में झनझनाहट हो रही है” English में समझाना था, तब असली struggle समझ आया। “Tingling” — वो एक शब्द याद ही नहीं आ रहा था।

नया देश, नई भाषा। Doctor को अपने symptoms बताने हों, दुकान से खरीदा हुआ दूध return करना हो, या रोज़मर्रा का कोई छोटा-सा काम — हर चीज़ उसी भाषा में करनी पड़ती है।

“जितनी जल्दी language सीखो, उतना आसान जीवन हो जाता है।”

एक मौका — बस एक — काफी होता है।

PGDCA की degree थी। B.Ed. किया था। रात-रात भर काम करने की आदत भी थी। कमी सिर्फ़ एक चीज़ की थी—एक मौके की।

Interview में उनसे पूछा गया, “Work pressure संभाल पाएँगी?”

अंजली मुस्कुराकर बोलीं, “बताइए क्या करना है। सीख लेंगे। बस एक मौका दीजिए।”

वो कहती हैं,

“ज़िंदगी में कई बार talent नहीं, पहला मौका सबसे बड़ा फ़र्क़ पैदा करता है।”


InnaMax View

अंजली त्रिपाठी की कहानी में कोई एक villain नहीं है।

एक system है—जो लड़कियों को बहुत धीरे-धीरे, बिना शोर किए तोड़ता है। स्कूल जाने पर लगी शर्तें। समय से पहले हुई शादी। ₹800 की एक मिक्सी — और ऐसी अनगिनत छोटी-छोटी बातें, जिन्हें दुनिया अक्सर “सामान्य” कहकर आगे बढ़ जाती है।

धीरे-धीरे वही छोटी बातें किसी लड़की को यह यक़ीन दिलाने लगती हैं कि उसकी ज़िंदगी पर उसका अपना हक़ नहीं है।

और फिर—वो निकलीं।

₹1,000 से…23 किलो के एक bag के साथ…Dublin तक।

आज वो 22 देशों की यात्रा कर चुकी हैं—अकेले भी, दोस्तों के साथ भी। लेकिन उनकी सबसे बड़ी यात्रा शायद Allahabad से अपने भीतर तक की रही।

आज अंजली अपनी आज़ादी को एक मुस्कान के साथ यूँ बयान करती हैं—

“घूँघट निकालकर जींस पहन रही हूँ—किसी को कोई मतलब नहीं।”

अंजली त्रिपाठी की यह कहानी उन लाखों लड़कियों के लिए है, जो आज भी किसी Allahabad की गली में खड़ी होकर यही सोच रही हैं कि क्या दुनिया में उनकी भी गिनती है।


सूर्यास्त के समय Santorini में दिल का आकार बनाते हुए अंजली त्रिपाठी
कुछ सफ़र मंज़िल तक नहीं, खुद तक पहुँचाते हैं।

— InnaMax News Desk


▌आपके मन में भी यही सवाल होगा


Ireland में settle होने के लिए English कितनी ज़रूरी है — और अगर नहीं आती तो क्या होता है?

बहुत ज़रूरी। शुरुआती दिनों में अंजली को doctor के सामने “शरीर में झनझनाहट” English में explain करनी थी — और वो word नहीं आया। दूकान में expired दूध return करना था — वहाँ भी language एक दीवार बन गई। Ireland का system supportive है, लेकिन वो support तभी मिलती है जब आप खुद को express कर पाएँ। जितनी जल्दी language सीखो — उतना बेहतर।


Dublin में Indian community 2012 से अब तक कितनी बदली है?

ज़मीन-आसमान का फर्क। 2012 में Dublin में 20 Indians भी मुश्किल से दिखते थे। अंजली कहती हैं — “अब तो लगता है Irish passport पर Indian चेहरे आम हो गए हैं।” Amazon, Microsoft, Citibank, Google — सबने Indian talent को Dublin में attract किया। Community है, events हैं, Indian stores हैं। जो अकेलापन पहली generation ने झेला, वो अब बहुत कम है।


Amazon और Microsoft में Data Center की job के लिए क्या background चाहिए — कोई IT degree ज़रूरी है?

ज़रूरी नहीं। अंजली की background PGDCA और BEd थी — pure IT नहीं। Amazon का पहला role Media Protection था — confidential data की physical security। यह काम discipline, attention to detail, और reliability माँगता है — coding नहीं। Ireland में tech sector broad है। Entry point वो होता है जो आपके existing skills से match करे — बाकी learning on the job होती है।


Ireland में बच्चों की schooling कैसे होती है — Indian parents के लिए क्या जानना ज़रूरी है?

Government schools यहाँ practically free हैं — voluntary contribution 60-70 Euro per year है, देना आप पर है। School system pace-based है — pressure नहीं, pace देखता है। अंजली की बेटी खुशी एक local school में गई जहाँ Principal ने उनके पूरे परिवार को — literally — support दिया। एक बड़ी बात: यहाँ बच्चों को घर में mother tongue में बात करने के लिए actively encourage किया जाता है। अंजली को उनके doctor ने पहले दिन यही बताया था।


Ireland में vegetarian रहना कितना मुश्किल है?

शुरुआती साल में बहुत। जब Dublin में McDonald’s गईं तो “vegetarian” माँगा — वो बोले fish है। बिस्किट में अंडा, bread में अंडा, ice cream में अंडा। पहले 4-5 साल बाहर खाना मुश्किल था। अब बहुत बदल गया है — Indian stores हैं, options बढ़े हैं। लेकिन 2012 में जो थे, उनके लिए khichdi और Maggi ही घर का खाना था।


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