Dr. Ishtpreet Mann — जो हर मरीज़ को वैसे ही देखती हैं, जैसे पहला
इस Profile में…
🔹 एक doctor जिसने inspiration अपने doctor से ली
🔹 Government hospital की रोज़मर्रा की दुनिया
🔹 मुश्किल cases और उनके पीछे की भावनाएँ
🔹 Cataract surgery से लेकर cornea donation तक
🔹 क्यों patients ने उन्हें patience सिखाया
OPD में सुबह के दस बज रहे हैं।
बाहर लाइन है। अंदर एक के बाद एक मरीज़ आते हैं — कोई railway driver, कोई बुज़ुर्ग, कोई माँ अपने बच्चे को लेकर। हर किसी की अलग तकलीफ़। हर किसी की अलग कहानी।
Dr. Ishtpreet हर एक को उतना ही वक़्त देती हैं।
यह छोटी बात नहीं है। Government hospital की OPD में — जहाँ मरीज़ों की संख्या हमेशा doctors से ज़्यादा होती है — हर मरीज़ को बराबर तवज्जो देना एक choice है। एक conscious, रोज़ की choice।
यही उनकी पहचान है। बाकी सब — designation, hospital, qualifications — बाद में आता है।
एक doctor, एक system, एक तरीका
Northern Railway Central Hospital। Connaught Place, Delhi।
यहाँ कोई premium experience नहीं है। कोई appointment app नहीं। बस एक queue है, एक कमरा है, और एक doctor है जो उस कमरे में रोज़ आती है।
Dr. Ishtpreet Ophthalmologist हैं — Eye Surgeon। लेकिन उनसे बात करो तो जो सबसे पहले समझ आता है वो यह नहीं कि वो कितनी surgeries कर चुकी हैं। जो समझ आता है वो यह है कि वो अपना काम seriously लेती हैं — हर मरीज़ के लिए, हर बार।
“आँखों को लोग समझते नहीं। आँखें लाल हुईं तो सोचते हैं ठीक हो जाएंगी। लेकिन आँख लाल होने के बहुत कारण होते हैं — और सही time पर न आए तो नज़र हमेशा के लिए थोड़ी कम हो सकती है।”
यह वो बात है जो वो हर मरीज़ को समझाती हैं। बिना जल्दी के। बिना यह जताए कि अगला मरीज़ बाहर इंतज़ार कर रहा है।

शुरुआत — जो inspire करता है, वो inspire करता रहता है
बचपन में खुद चश्मा था।
एक eye doctor के पास जाती थीं — Dr. S.P. Singh। उनका तरीका था — हर मरीज़ को ध्यान से सुनना, care से देखना।
“उनका nature इतना अच्छा था, उस care से देखते थे — कि मुझे लगा मुझे भी एक दिन आँखों की doctor बनना है।”
वो बीज वहीं पड़ा। Medical college हुई। Ophthalmology choose की। Hostel में admission के पहले दिन वो उन्हीं doctor से मिलने गईं — उस पल को silently celebrate करने जो उन्होंने बरसों पहले तय किया था।
एक doctor ने inspire किया। और अब एक doctor inspire करती है। शायद किसी ऐसे मरीज़ को जो आज उनकी OPD में बैठा है और कल खुद कुछ बनने का सोचेगा।
यह cycle किसी को दिखती नहीं। लेकिन यही medicine की असली continuity है।
मुश्किल cases, मुश्किल दिन
Low feel होता है।
Dr. Ishtpreet यह openly कहती हैं — कोई surgery perfect नहीं गई, कोई case मन पर भारी रहा, कोई दिन था जब OPD ठीक से handle नहीं हुई।
एक case याद है — एक छोटे बच्चे की आँख में tumor था। जान बचाने के लिए दूसरी आँख भी निकालनी पड़ी। वो बच्चा हमेशा के लिए blind हो गया।
“ऐसे decisions doctor के लिए भी उतने ही difficult होते हैं। इसको हल्के में नहीं ले सकते।”
लेकिन उनका एक rule है जो उन्होंने खुद बनाया है।
घर जाते समय वो hospital की दहलीज़ पर ही छोड़ देती हैं उसे जो अंदर हुआ। नकारात्मक energy घर नहीं ले जातीं।
और घर में उनकी cats हैं। जो हर दिन के बाद एक reset की तरह काम करती हैं।
यह कोई बड़ा philosophy नहीं है। बस एक इंसान का तरीका है — जो रोज़ मुश्किल काम करता है और रोज़ वापस आता है।
काम — जो दिखता है और जो नहीं दिखता
Cataract surgery में एक moment होता है।
पट्टी खुलती है। मरीज़ देखता है। उसकी आँखों में कुछ आता है जिसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता।
किसी को नज़र वापस देना — यही उनका passion है।
लेकिन उस एक moment के पीछे बहुत कुछ होता है जो दिखता नहीं।
वो मरीज़ जिसे समझाना पड़ा कि चश्मा लगाने से चश्मा नहीं बढ़ता — चश्मा न लगाने से आँख कमज़ोर होती है। वो माँ जिसे बताया कि उसके बच्चे को बाहर खेलने देना ज़रूरी है — screen नहीं, धूप चाहिए आँखों को। वो diabetic मरीज़ जो साल भर से retina check नहीं करवाया था।
यह सब OPD का काम है। Unglamorous। Repetitive। लेकिन ज़रूरी।
और cornea donation — जिसे लोग डर से देखते हैं — उसे वो बिना drama के explain करती हैं।
वो समझाती हैं कि eye ball नहीं निकाली जाती। सिर्फ सामने का cornea लिया जाता है — एक button की तरह। बाकी सब वैसा ही रहता है। एक व्यक्ति जाते-जाते चार लोगों की ज़िंदगी में रोशनी ला सकता है।

वो एक बात जो साथ रह गई
Patients से patience
Dr. Ishtpreet कहती हैं कि जितने लोगों से एक दिन में मिलती हैं — हर किसी के पास कोई तकलीफ़ है, कोई डर है, कोई उम्मीद है।
“जो खुश है वो आपके पास नहीं आएगा। जो आता है वो किसी न किसी परेशानी में है। उनसे patience आई। बहुत patience आई।”
और यही patience — जो हर मरीज़ को बराबर वक़्त देने में दिखती है — वो कोई technique नहीं है। वो character है।
InnaMax View
Dr. Ishtpreet कोई extraordinary story नहीं हैं।
और यही बात उन्हें important बनाती है।
वो उन हज़ारों doctors में से एक हैं जो हर रोज़ government hospitals में जाती हैं, बिना किसी feature के, बिना किसी award के। System उन्हें highlight नहीं करता। Social media उन्हें नहीं जानता।
लेकिन जो मरीज़ उनके पास आया — जिसे लगता था धुंधला दिखना उम्र का हिस्सा है — और जो उनके पास से इस जानकारी के साथ गया कि यह ठीक हो सकता है — उसके लिए Dr. Ishtpreet बहुत matter करती हैं।
InnaMax यह profile इसलिए नहीं लिख रहा कि Dr. Ishtpreet कोई exceptional case हैं। यह इसलिए लिख रहा है क्योंकि जो लोग system के अंदर रहकर, बिना शोर के, अपना काम ईमानदारी से करते हैं — उनकी कहानी भी कहीं होनी चाहिए।

हर मरीज़ उनके लिए पहला मरीज़ है। यही बात है।
— InnaMax News Desk
What People Often Ask
Dr. Ishtpreet Mann कहाँ मिलती हैं?
— Northern Railway Central Hospital, Connaught Place, New Delhi में। यह एक government hospital है। OPD में जाकर appointment ली जा सकती है।
आँख लाल हो तो क्या करें — खुद दवा लें या doctor के पास जाएं?
— Dr. Ishtpreet Mann साफ कहती हैं — खुद दवा न लें। आँख लाल होने के कई कारण हो सकते हैं — viral infection, bacterial infection, glaucoma attack या uveitis तक। हर कारण का treatment अलग होता है। इसलिए आँख लाल होने पर doctor को दिखाना ज़रूरी है।
बच्चों को चश्मा लगाने से डरना चाहिए?
— नहीं — उल्टा। चश्मा न लगाने से आँख कमज़ोर होती है, चश्मा लगाने से नहीं। उम्र के साथ नंबर अपने आप ठीक नहीं होता। 18 साल के बाद नंबर हटाने के कई options होते हैं, लेकिन आँखों की सेहत बनी रहनी चाहिए।
40 के बाद आँखों में क्या बदलता है?
— 40 के बाद नज़दीक का नंबर आना natural है। यह lens की aging है। इसे कोई दवा नहीं रोक सकती। चश्मा लगाना ही इसका solution है, और यह बिल्कुल normal है।
Cornea donation कैसे काम करती है?
— आँख नहीं निकाली जाती — यह सबसे बड़ा myth है। सिर्फ सामने का cornea निकाला जाता है। Body की shape बिल्कुल नहीं बदलती। एक व्यक्ति के दोनों corneas से चार लोगों को रोशनी मिल सकती है। Cornea donation के लिए किसी भी registered eye bank से contact किया जा सकता है।
आँखों को पानी या गुलाबजल से धोना चाहिए?
— नहीं। आँखें खुद को साफ कर लेती हैं। आँखें खोलकर पानी या गुलाबजल डालना नुकसानदेह है — tap water में infection हो सकता है। यह एक बहुत common गलती है जो लोग “exercise” समझकर करते हैं — लेकिन इसका कोई फ़ायदा नहीं है।
Diabetic मरीज़ों को आँखों के बारे में क्या जानना चाहिए?
— Diabetes से आँख के पीछे के पर्दे (retina) को नुकसान होता है — और यह अक्सर बिना किसी symptom के होता है। हर diabetic मरीज़ को साल में कम से कम एक बार retina की जाँच ज़रूर करानी चाहिए। जल्दी पता चले तो रोका जा सकता है।
बच्चों की आँखें healthy रखने के लिए क्या करें?
— रोज़ एक से डेढ़ घंटा बाहर खेलने दें — दूर देखने से आँखों का natural development होता है। Diet में हरी सब्ज़ियाँ और लाल-पीले रंग के फल शामिल करें। नींद पूरी हो। और screen time जितना कम हो सके।
और पढ़ें — InnaMax Profiles:
निर्मला सिंह पटेल — सेवा से गढ़ी एक शांत नेतृत्व यात्रा
अरुण आहूजा — जिनके गोदाम से गुज़रती है पूर्वांचल की साइकिल
Dr. Ajit Saigal — जिनके नाम पर है Patent, जिनके OT में बजती है भैरवी
ओम प्रकाश सिंह पटेल — जब राजनीति accident बन जाए, मगर इरादा नहीं
आसमान जितना बड़ा काम — Archana Singh और Arsh Interior की कहानी




