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डॉ. अजीत सैगल: जब सर्जरी सिर्फ पेशा नहीं, एक साधना बन जाती है

Dr Ajit Saigal audio story cover about knee preservation and saving knees instead of replacement
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डॉ. अजीत सैगल: जब सर्जरी सिर्फ पेशा नहीं, एक साधना बन जाती है
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Medical Minds | InnaMax Profiles


एक ऑपरेशन थियेटर… जहाँ भैरवी बजती है

ऑपरेशन थियेटर में असामान्य शांति है।

मॉनिटर अपनी लय में चल रहे हैं। Anesthesia टीम तैयार है। तभी कमरे में उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ की शहनाई पर राग भैरवी गूंजने लगती है।

यही वह संगीत है जिसके साथ डॉ. अजीत सैगल वर्षों से सर्जरी करते आए हैं।

कुछ देर बाद उनके हाथों में एक स्टील की प्लेट आती है।

उस पर लिखा है—

Saigal.

यह सिर्फ एक implant नहीं, बल्कि एक ऐसे सर्जन की सोच है जिसने भारतीय मरीजों की ज़रूरतों को समझकर अपना समाधान विकसित किया।

शायद यही वजह है कि डॉ. अजीत सैगल की कहानी सिर्फ एक सफल Orthopedic Surgeon की नहीं, बल्कि उस डॉक्टर की है जिसने घुटना बदलने से पहले उसे बचाने की सोच को अपनी पूरी चिकित्सा यात्रा का आधार बनाया।


Profile at a Glance

✔ 46 वर्षों की सर्जरी, लेकिन आज भी पहला लक्ष्य Knee Preservation

Saigal Steel Plate—भारतीय जीवनशैली के लिए विकसित एक patented innovation।

✔ Melbourne से सीखी PRP Therapy, आज वाराणसी में उसी protocol के साथ।

✔ ऑपरेशन थियेटर में आज भी भैरवी की धुन के साथ सर्जरी।

✔ Surgeon, Inventor, Teacher और Medical Communicator—एक ही व्यक्तित्व के कई आयाम।

“सिर झुकाकर अपना काम करते रहो…”—चार दशकों की चिकित्सा यात्रा का मूल मंत्र।


काशी… जहाँ विरासत मिली, लेकिन पहचान खुद बनाई

बनारस की पहचान सिर्फ उसके घाट नहीं, उसकी परंपराएँ भी हैं। डॉ. अजीत सैगल का जन्म भी एक प्रतिष्ठित चिकित्सक परिवार में हुआ, लेकिन डॉक्टर बनना और अपनी अलग पहचान बनाना—दोनों अलग यात्राएँ हैं।

उन्होंने Orthopedics को चुना। ऐसा क्षेत्र जहाँ हर निर्णय किसी इंसान के चलने, बैठने और जीने की क्षमता तय करता है। लगभग 46 वर्षों की इस यात्रा में उन्होंने सिर्फ हड्डियों का इलाज नहीं किया, बल्कि यह समझने की कोशिश की कि घुटने को बदले बिना उसे कैसे बचाया जा सकता है।


Dr. Ajit Saigal
Senior Orthopedic Surgeon • Varanasi

Knee Replacement से पहले… Knee Preservation

डॉ. सैगल की चिकित्सा सोच एक सरल सिद्धांत पर आधारित है—

“जहाँ तक संभव हो, अपने प्राकृतिक घुटने को बचाइए।”

उनके अनुसार Osteoarthritis धीरे-धीरे बढ़ती है। शुरुआती चरणों में सही इलाज, PRP Therapy, व्यायाम और जीवनशैली में बदलाव से कई मरीज वर्षों तक Knee Replacement टाल सकते हैं। Grade 3 में High Tibial Osteotomy जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं, जबकि Replacement आमतौर पर अंतिम चरण के लिए रखा जाना चाहिए।

यही सोच आगे चलकर उनके पूरे पेशेवर जीवन की पहचान बनी—Knee Preservation


घुटने का दर्द सिर्फ दर्द नहीं होता

डॉ. सैगल कहते हैं कि घुटने की बीमारी केवल X-ray की रिपोर्ट नहीं बदलती, बल्कि जीवनशैली बदल देती है।

सीढ़ियाँ चढ़ना कठिन हो जाता है।

मंदिर में बैठना मुश्किल हो जाता है।

ज़मीन पर बैठना छूट जाता है।

और कई बार मरीज दर्द को सामान्य समझकर महीनों तक दर्दनिवारक दवाइयों पर निर्भर रहते हैं।

उनके शब्दों में—

“बीमारी को जितना जल्दी समझेंगे, उतनी देर तक अपना घुटना बचा पाएँगे।”

यहीं से उनकी चिकित्सा यात्रा का अगला अध्याय शुरू होता है—PRP Therapy, जहाँ इलाज किसी बाहरी दवा से नहीं, बल्कि मरीज के अपने ही रक्त से शुरू होता है।


जब इलाज मरीज के अपने खून से शुरू होता है

घुटने की शुरुआती अवस्था वाले मरीजों के लिए डॉ. अजीत सैगल जिस तकनीक पर सबसे अधिक भरोसा करते हैं, वह है PRP Therapy (Platelet Rich Plasma)

इसमें किसी बाहरी दवा की नहीं, बल्कि मरीज के अपने रक्त की मदद ली जाती है।

रक्त को विशेष प्रक्रिया से तैयार कर Platelet Rich Plasma निकाला जाता है और फिर उसे प्रभावित जोड़ में इंजेक्ट किया जाता है। लेकिन डॉ. सैगल मानते हैं कि सिर्फ PRP निकाल लेना पर्याप्त नहीं है।

“Activation सबसे महत्वपूर्ण चरण है।”

यही वह प्रक्रिया है जिसमें Platelets से Growth Factors सक्रिय होते हैं, जो cartilage की मरम्मत में मदद करते हैं।

वे आज भी वही protocol अपनाते हैं जो उन्होंने Melbourne में Dr. Peter Lewis के साथ प्रशिक्षण के दौरान सीखा था—समय, प्रक्रिया और follow-up में बिना किसी शॉर्टकट के।

उनका मानना है कि इलाज सिर्फ तकनीक से नहीं, बल्कि सही protocol से सफल होता है।


विदेश से सीखी तकनीक, लेकिन भारतीय मरीजों के लिए

Melbourne की training ने उन्हें आधुनिक PRP Therapy की वैज्ञानिक समझ दी, लेकिन उसका उद्देश्य कभी विदेशी मॉडल की नकल करना नहीं था।

वापस लौटकर उन्होंने उसी तकनीक को वाराणसी के मरीजों के लिए सुलभ बनाया।

आज जहाँ कई बड़े शहरों में PRP Therapy की लागत कई गुना अधिक हो सकती है, वहीं डॉ. सैगल इसे उचित लागत पर उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं ताकि आधुनिक उपचार महानगरों तक सीमित न रहे।

लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान अभी बाकी थी।



जब एक सर्जन ने अपना Implant खुद डिज़ाइन किया

Orthopedics में कई सर्जन implants का उपयोग करते हैं।

डॉ. अजीत सैगल ने एक कदम आगे बढ़कर अपना implant डिज़ाइन किया।

Grade 3 Osteoarthritis में जब घुटने का संतुलन बिगड़ने लगता है, तब High Tibial Osteotomy (HTO) एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है। इस प्रक्रिया में हड्डी की alignment ठीक कर शरीर का भार घुटने के स्वस्थ हिस्से पर स्थानांतरित किया जाता है।

यहीं से जन्म हुआ Saigal Steel Plate का।

एक ऐसा patented implant जिसे भारतीय मरीजों की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया।


भारतीय जीवनशैली के लिए बना एक समाधान

डॉ. सैगल का मानना था कि किसी implant की सफलता सिर्फ X-ray में नहीं, बल्कि मरीज की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दिखाई देनी चाहिए।

भारतीय परिवारों में आज भी लोग मंदिर में बैठते हैं।

ज़मीन पर भोजन करते हैं।

उकड़ूँ बैठते हैं।

कई घरों में भारतीय शैली के शौचालय उपयोग में हैं।

उन्होंने महसूस किया कि यदि मरीज इन सामान्य गतिविधियों में सहज न लौट सके, तो उपचार अधूरा रह जाता है।

इसी सोच ने Saigal Steel Plate को आकार दिया।

उनके अनुसार इस implant की मदद से कई मरीज उपचार के बाद फिर से उकड़ूँ और चौकड़ी मारकर बैठने जैसी गतिविधियाँ कर सके।

यह सिर्फ एक तकनीकी innovation नहीं था।

यह भारतीय जीवनशैली को समझकर विकसित किया गया समाधान था।


एक X-ray जिसने उन्हें भी कुछ पल के लिए रोक दिया

चार दशकों की सर्जरी के अनुभव के बावजूद कुछ मामले ऐसे होते हैं जिन्हें देखकर अनुभवी डॉक्टर भी ठहर जाते हैं।

ऐसा ही एक X-ray कोलकाता से आया।

मरीज—

38 वर्ष की एक महिला।

कद—

लगभग 4 फीट 2 इंच।

घुटनों की स्थिति अत्यंत जटिल थी।

डॉ. सैगल स्वीकार करते हैं—

“X-ray देखकर मेरे भी हाथ-पाँव कुछ पल के लिए फूल गए थे।”

ऑपरेशन आसान नहीं था।

लेकिन ऑपरेशन थियेटर में वही भैरवी बज रही थी।

सर्जरी पूरी हुई।

कुछ समय बाद वही मरीज अपने पैरों पर चल रही थी।

उस सफलता का श्रेय वे अपने कौशल को नहीं, बल्कि विनम्रता से ऊपर वाले को देते हैं।

“ऊपर वाला मेहरबान है।”


सर्जन के भीतर का कलाकार

हर सर्जन की अपनी एक लय होती है।

डॉ. अजीत सैगल के लिए यह लय संगीत से शुरू होती है।

सुबह हो या ऑपरेशन थियेटर, उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ, उस्ताद विलायत ख़ाँ, तलत महमूद, मेहदी हसन और मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ें उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे खुद भी गाते हैं, तो उन्होंने मुस्कुराकर कुछ पंक्तियाँ गुनगुना दीं।

यह शायद उनके व्यक्तित्व का सबसे अलग पक्ष है।

जहाँ एक ओर ऑपरेशन थियेटर में मिलीमीटर की सटीकता चाहिए, वहीं दूसरी ओर संगीत उन्हें वही धैर्य और एकाग्रता देता है जिसकी हर सर्जन को ज़रूरत होती है।


सिर्फ ऑपरेशन नहीं… संवाद भी

डॉ. अजीत सैगल का मानना है कि डॉक्टर की ज़िम्मेदारी ऑपरेशन थियेटर के दरवाज़े पर खत्म नहीं होती।

मरीज को बीमारी समझाना भी इलाज का हिस्सा है।

इसी सोच के साथ वे वर्षों तक Siti TV और DEN Kashi पर प्रसारित स्वास्थ्य कार्यक्रम “Hello Doctor” और “Health Watch” से जुड़े रहे। लगभग 50 लाइव एपिसोड्स के माध्यम से उन्होंने जटिल चिकित्सा विषयों को सरल भाषा में लोगों तक पहुँचाया।

वे “Lok Manavadhikar Sansar” मासिक समाचार पत्र के संपादक भी रहे हैं और समय-समय पर सामाजिक विषयों पर लेखन करते रहे हैं।

उनके लिए ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह लोगों तक पहुँचे।


क्लिनिक से बाहर भी समाज के साथ

चिकित्सा सेवा के साथ-साथ उनकी सक्रियता कई सामाजिक संस्थाओं तक फैली हुई है।

Rotary हो, Red Cross हो या Blind Federation—वे अलग-अलग मंचों पर स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक भागीदारी से जुड़े रहे हैं।

यह भूमिका किसी पद या सम्मान की नहीं, बल्कि उस विश्वास की है कि डॉक्टर समाज का भी उतना ही हिस्सा है जितना अस्पताल का।


इलाज से पहले सोच बदलना ज़रूरी है

चार दशकों से अधिक की प्रैक्टिस में अगर कोई एक बात उन्हें सबसे अधिक परेशान करती है, तो वह है Self-medication

दर्द शुरू हुआ।

Painkiller ले लिया।

कुछ दिन आराम मिला।

फिर वही दर्द लौट आया।

कई मरीज महीनों, कभी-कभी वर्षों तक इसी चक्र में फँसे रहते हैं और जब डॉक्टर के पास पहुँचते हैं, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।

डॉ. सैगल साफ़ कहते हैं—

“किसी भी हालत में Self-medication नहीं करनी चाहिए।”

उनके अनुसार सही समय पर सही जाँच, आगे की बड़ी सर्जरी की ज़रूरत भी कम कर सकती है।


एक X-ray… जो हमेशा खड़े होकर होना चाहिए

घुटने के इलाज से जुड़ी एक बात वे लगभग हर मरीज को बताते हैं।

X-ray हमेशा Standing View में कराइए।

लेटकर कराए गए X-ray में शरीर का भार घुटने पर नहीं पड़ता, इसलिए कई बार जोड़ सामान्य दिखाई देता है।

लेकिन जैसे ही मरीज खड़ा होता है, घुटने पर वास्तविक दबाव आता है और बीमारी की सही स्थिति सामने आती है।

उनके लिए सही diagnosis की शुरुआत यहीं से होती है।


उम्मीद… लेकिन वास्तविकता के साथ

मरीज अक्सर डॉक्टर के पास सिर्फ इलाज नहीं, उम्मीद लेकर भी आते हैं।

लेकिन डॉ. अजीत सैगल ऐसी उम्मीद देने में विश्वास नहीं करते जो सच न हो।

वे मुस्कुराते हुए कहते हैं—

“50 साल के आदमी को 20 साल का नहीं बना सकते। प्रकृति को कोई हरा नहीं सकता।”

शायद यही ईमानदारी उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान है।

वे बीमारी छिपाते नहीं।

झूठी उम्मीद नहीं देते।

और जहाँ घुटना बच सकता है, वहाँ उसे बचाने की पूरी कोशिश करते हैं।


Dr Ajit Saigal at an orthopedic conference with fellow doctors
सिर्फ practice नहीं — field में active presence भी।

InnaMax View | असली विरासत किसे कहते हैं?

बहुत से डॉक्टर सफल ऑपरेशन करते हैं।

कुछ नई तकनीकें सीखते हैं।

कुछ शोधपत्र प्रकाशित करते हैं।

लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो समस्या को देखकर समाधान भी विकसित करते हैं।

डॉ. अजीत सैगल ने ऐसा ही किया।

उन्होंने देखा कि विदेशी implants भारतीय जीवनशैली की हर ज़रूरत पूरी नहीं करते।

उन्होंने समाधान तैयार किया।

उसे patent कराया।

और उसे अधिक सुलभ बनाने का प्रयास भी किया।

लेकिन उनकी विरासत सिर्फ Saigal Steel Plate नहीं है।

वह सोच है जो कहती है—

“जहाँ तक संभव हो, शरीर को बचाइए; बदलना आख़िरी विकल्प होना चाहिए।”

और शायद यही कारण है कि उनके ऑपरेशन थियेटर में आज भी भैरवी बजती है।

क्योंकि कुछ लोग सर्जरी केवल हाथों से नहीं करते।

वे उसे साधना की तरह जीते हैं।


InnaMax की नज़र में — यह एक professional की असली legacy है। नाम plate पर छपे या न छपे।


कहानी पढ़ने के बाद यह सवाल भी उठते हैं…


डॉ. अजीत सैगल कौन हैं?

डॉ. अजीत सैगल वाराणसी के वरिष्ठ Orthopedic Surgeon हैं। लगभग 46 वर्षों के अनुभव के साथ वे Knee Preservation, PRP Therapy और High Tibial Osteotomy (HTO) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने भारतीय जीवनशैली के अनुरूप Saigal Steel Plate भी विकसित की है।


Knee Preservation क्या है?

Knee Preservation का उद्देश्य घुटने को समय से पहले बदलने के बजाय उसे यथासंभव सुरक्षित रखना है। शुरुआती और मध्य चरण की Osteoarthritis में PRP Therapy, HTO और अन्य उपचारों के माध्यम से कई मरीजों में Knee Replacement को टाला जा सकता है।


PRP Therapy किन मरीजों के लिए उपयोगी है?

PRP (Platelet Rich Plasma) Therapy मुख्य रूप से शुरुआती Osteoarthritis वाले मरीजों के लिए उपयोगी मानी जाती है। इसमें मरीज के अपने रक्त से तैयार Platelet Rich Plasma को प्रभावित जोड़ में इंजेक्ट किया जाता है।


Saigal Steel Plate क्या है?

यह डॉ. अजीत सैगल द्वारा विकसित और patented orthopedic implant है। इसका उपयोग High Tibial Osteotomy (HTO) में किया जाता है और इसे भारतीय जीवनशैली को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है।


घुटने का X-ray कैसे कराना चाहिए?

डॉ. सैगल Standing View X-ray की सलाह देते हैं, क्योंकि खड़े होने पर घुटने पर शरीर का वास्तविक भार पड़ता है और बीमारी की सही स्थिति स्पष्ट होती है।


Self-medication क्यों नुकसानदायक हो सकती है?

बिना सही जाँच के दर्दनिवारक दवाएँ लेने से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन बीमारी आगे बढ़ती रहती है। सही समय पर Orthopedic Surgeon से सलाह लेना बेहतर विकल्प है।


डॉ. सैगल से कहाँ और कैसे मिल सकते हैं?

Mangalam Clinic & Trauma Centre, D-61/23, A-1, Sidhgiri Bagh, Varanasi – 221 010।

Contact: +91-9415204489 / 9889296528 Email: drajitsaigal@gmail.com Website: drajitsaigal.com


InnaMax Takeaways

✔ इलाज का सबसे अच्छा तरीका हमेशा ऑपरेशन नहीं होता।

✔ सही समय पर पहचान कई मरीजों को Knee Replacement से बचा सकती है।

✔ Innovation तब सबसे सार्थक होती है जब वह स्थानीय ज़रूरतों को समझकर विकसित की जाए।

✔ एक अच्छा सर्जन केवल ऑपरेशन नहीं करता, मरीज को सही निर्णय लेने में भी मदद करता है।

✔ चिकित्सा में तकनीक जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही ईमानदारी भी।


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