राजेंद्र यादव — काशी का वो सेवक जो governance को जनता की ताकत बना रहा है
इस Profile में…
🔹 कारसेवा के दिनों से शुरू हुई एक राजनीतिक यात्रा
🔹 System से लड़ने नहीं, उसे समझने की philosophy
🔹 IGRS और GPS monitoring के ज़रिए governance को जनता तक लाने की कोशिश
🔹 सड़क, सीवर और बुनियादी सुविधाओं के विकास की ज़मीनी कहानी
🔹 एक ऐसे नेता की सोच जो काम को श्रेय से ऊपर रखता है
काशी की एक गली।
सुबह के छह बजे हैं।
वाराणसी अभी पूरी तरह जागी नहीं है।
लेकिन एक पार्षद अपने मोबाइल पर IGRS portal खोल चुका है।
किसी गली में सीवर का ढक्कन गायब है।
शिकायत रात में आई थी।
वह इंतज़ार नहीं करता।
वह निकल पड़ता है।
वो खुद उस गली में पहुँच जाता है।
यह कोई photo-op नहीं है। कोई camera नहीं है। कोई नहीं देख रहा।
यही है राजेंद्र यादव का असली परिचय।

वाराणसी नगर निगम के पार्षद। BJP के समर्पित कार्यकर्ता। BHU और काशी विद्यापीठ से double MA। लेकिन इन सब उपाधियों से बड़ी एक पहचान है — काशी का वो सेवक जिसने governance को सिर्फ office का काम नहीं, जनता की ताकत बनाया।
“राजनीति हमारा profession नहीं है। यह एक ज़िम्मेदारी है जो हमने खुद चुनी।”
“एक ऐसा पार्षद जो वोट से ज़्यादा काम की भाषा बोलता है”
वाराणसी के उस वार्ड के पार्षद जहाँ विविधता ही पहचान है।
लगभग ४० प्रतिशत मुस्लिम आबादी। बाकी हिंदू समाज। और इन सबके बीच — एक BJP नेता जो जाति, मज़हब, और मोहल्ले से ऊपर उठकर सिर्फ एक भाषा बोलता है — विकास की।
राजेंद्र यादव ने अपनी राजनीतिक यात्रा में यह सीखा है कि असली नेता वो नहीं जो भीड़ जुटाए — असली नेता वो है जो भीड़ की समस्याएँ हल करे। और उन्होंने यही किया — एक-एक गली, एक-एक complaint, एक-एक file।
“हम एक ऐसे काम में हैं जो किसी ने थोपा नहीं — हमने खुद चुना।”
Double MA की पढ़ाई ने उन्हें bureaucracy की भाषा दी। BJP की ideological training ने दिशा दी। और काशी की मिट्टी ने दिया — वो संकल्प जो सत्ता के लिए नहीं, सेवा के लिए होता है।
“जब एक युवा कारसेवक ने राजनीति को सेवा की तरह देखना शुरू किया”
जब राजेंद्र यादव ने होश संभाला, हिंदुस्तान एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा था।
बाबरी मस्जिद का मुद्दा सड़कों पर था। कारसेवा चल रही थी। काले झंडे लग रहे थे। कॉलोनी के बड़े-बुज़ुर्ग भी सामने नहीं आना चाहते थे। लेकिन कुछ नौजवानों में एक आग थी — उन्होंने केसरिया झंडा खरीदा, कपड़ा बाँधा, और निकल पड़े।
राजेंद्र यादव उन्हीं में से थे।
उन दिनों वो Central Jail, वाराणसी भी गए — दो दिन के लिए। लेकिन वो दो दिन एक जीवन को define कर गए। जेल के अंदर उत्तर भारत के कारसेवक थे, आंध्र से आए लोग थे। इडली और बाटी-चोखा एक ही पंगत में परोसी जा रही थी। ट्रकों पर गुड़, चना, लाई आ रही थी। कोई भेद नहीं था।
“अंदर एक अलग ही माहौल था। मन नहीं कर रहा था कि बाहर आएं।”
उस एकता ने — उस राष्ट्रीय भावना ने — एक नेता को जन्म दिया। वहीं से समाजसेवा की ललक जागी। वहीं से BJP के प्रति समर्पण और गहरा हुआ। और वहीं से शुरू हुई काशी की सेवा की एक लंबी यात्रा।
“System समझने से पहले System ने उन्हें बहुत रोका”
नया पार्षद था। System की कोई समझ नहीं थी।
काम लेकर जाओ — टरका दिया जाता था। File बनवाओ — estimate बनाकर भेज दो। लेकिन महीने बीत जाते, कुछ नहीं होता। Bureaucracy की दीवार थी, और अनुभव की कमी थी।
“नए-नए थे तो हमको तो टरका देते ना।”
यही वो दौर था जब राजेंद्र यादव ने एक बड़ा सबक सीखा — system से लड़ने वाले थक जाते हैं, system को समझने वाले जीत जाते हैं।
एक ₹13 लाख की file डेढ़ साल से अटकी थी। अधिकारी ने सुझाया — इसे दो हिस्सों में बाँटो। राजेंद्र यादव ने माना। दोनों files अलग-अलग sanction हुईं। काम पूरा हुआ।
“समन्वय से ज़्यादा काम होता है। मिलजुलकर काम अच्छा।”
यह उनका turning point था। और यहीं से एक साधारण पार्षद, एक visionary leader बनने की राह पर चल पड़ा।
“Complaint से Completion तक —
Governance को जनता की भाषा में लाना”
राजेंद्र यादव का सबसे बड़ा योगदान है — governance को जनता की भाषा में लाना।
IGRS — Integrated Grievance Redressal System। पूरे UP में लागू। लेकिन वाराणसी की अधिकांश जनता को इसका पता ही नहीं था।
राजेंद्र यादव ने यह बदला।
“जिसको पता है वो डालता है। जिसको नहीं पता — वो बस परेशान रहता है। हमारा काम है कि हर घर को पता हो।”

पानी नहीं आ रहा? IGRS में complaint डालो। सीवर का ढक्कन गायब है? IGRS में डालो। Complaint डालते ही दो घंटे के अंदर संबंधित अधिकारी के पास notification पहुँच जाती है। नगर निगम के through गई तो नगर आयुक्त तक। जलसंस्थान की है तो वहाँ।
यह सिर्फ एक platform नहीं — यह जनता को empowerment देना है।
और construction process में भी उन्होंने transparency की नई मिसाल देखी है। पहले क्या होता था? पार्षद को पता, अधिकारी को पता, जनता को नहीं — file बनी, पैसा मिला, बंदरबाट हुई।
अब? GPS से photo। तीन-चार angles से। पहले की condition, काम के दौरान, और काम के बाद — हर stage पर उसी angle से। बिना GPS photo के file स्वीकृत ही नहीं होती।
“झूठ नहीं बोलेंगे। फोटो के साथ। GPS से। सब कुछ record है।”
Proposal से tender तक कम से कम तीन महीने। लेकिन अब हर पैसे का हिसाब है। हर काम का प्रमाण है।
यही है accountability। यही है असली governance।

“वह सबक जिसने एक पार्षद को problem-solver बना दिया”
नेतृत्व की असली परीक्षा तब होती है जब system आपके खिलाफ हो।
राजेंद्र यादव उस परीक्षा में pass हुए — लड़कर नहीं, समझकर।
“अधिकारी हमारे दुश्मन नहीं हैं। जो उनसे लड़ता है उसका वार्ड रुक जाता है।
जो उनके साथ चलता है — काशी आगे बढ़ती है।”
यही वो insight है जो एक local leader को statesman बनाती है। Party चाहे जो हो — governance का यह सूत्र universal है।
“अगर सब योजना के अनुसार चला, तो दो साल बाद यह वार्ड कैसा दिखेगा?”
Smart Ward scheme चल रही है — 15-15 वार्डों में पूरी सीवर लाइन बदली जा रही है।
राजेंद्र यादव का संकल्प साफ है:
“दो साल में हम अपने वार्ड की पूरी model line तैयार कर देंगे।
पानी की, सीवर की — सब। चाहे credit हमारे नाम जाए या नहीं।”
यह वाक्य छोटा नहीं है।

राजनीति में जहाँ हर काम का श्रेय लेने की होड़ लगती है — जहाँ ribbon काटने के लिए नेताओं की queue लगती है — वहाँ एक नेता कह रहा है: काम हो जाए, बस यही काफी है।
“मान लीजिए नया आएगा उसके नाम जाएगा। लेकिन हमने पूरा बनवाकर करा दिया — यही काफी है।”
यही निःस्वार्थ सेवा है। यही BJP का “सबका साथ, सबका विकास” ज़मीन पर दिखता है।
“राजेंद्र यादव की राजनीति को समझने के तीन सूत्र”
तीन सीखें जो राजेंद्र यादव की governance philosophy को define करती हैं:
पहली — जनता को empower करो, सिर्फ represent नहीं। IGRS जैसे platforms को grassroot level पर लाना — यह सिर्फ complaint solve करना नहीं, जनता को यह बताना है कि system उनके लिए है। एक educated, empowered voter ही मज़बूत लोकतंत्र बनाता है।
दूसरी — Bureaucracy partner है, opponent नहीं। “पहले उनकी respect करें” — यह उनका मंत्र है। जो पार्षद अधिकारियों से उलझते हैं, उनके वार्ड का काम रुक जाता है। जो साथ चलते हैं — काशी आगे बढ़ती है। यह सोच MLA और MP स्तर पर भी उतनी ही कारगर होगी।
तीसरी — बड़े सपने, छोटे रास्ते। बड़ी file अटकती है, छोटी files चलती हैं। ₹13 लाख की एक file की जगह दो ₹6-7 लाख की files — काम भी हुआ, जनता को भी राहत मिली। यह समझौता नहीं, pragmatic leadership है।

InnaMax View
काशी सिर्फ एक शहर नहीं — यह भारत की आत्मा है।
और इस शहर की आत्मा तब जीवित रहती है जब उसकी गलियाँ सुरक्षित हों, नालियाँ साफ हों, पानी आए, और जनता को पता हो कि शिकायत कहाँ करनी है।
राजेंद्र यादव यह काम कर रहे हैं — बिना शोर के, बिना camera के।
BJP के लिए वो एक ऐसी asset हैं जो party की ground connect को मज़बूत करती है। Double MA की academic depth, कारसेवा के दिनों से आई ideological clarity, और एक पार्षद के रूप में earned governance experience — यह combination बहुत कम नेताओं में मिलता है।
वाराणसी जैसे politically sensitive और historically significant शहर में ऐसे नेताओं की ज़रूरत है जो सड़क पर भी काम करें और meeting room में भी बोल सकें।
राजेंद्र यादव काशी की उन आवाज़ों में हैं जो धीरे बोलती हैं — लेकिन जिनकी गूँज दूर तक जाती है।
— InnaMax News Desk
What People Often Ask – राजेंद्र यादव के बारे में लोग क्या जानना चाहते हैं?
राजेंद्र यादव कौन हैं और काशी में उनकी क्या पहचान है?
राजेंद्र यादव वाराणसी नगर निगम के पार्षद और BJP के समर्पित नेता हैं। BHU और काशी विद्यापीठ से double MA करने वाले राजेंद्र यादव ने अपने वार्ड में IGRS platform और GPS-based governance के ज़रिए एक नई मिसाल कायम की है। काशी में उनकी पहचान एक निःस्वार्थ सेवक के रूप में है।
IGRS क्या है और राजेंद्र यादव इसे क्यों ज़रूरी मानते हैं?
IGRS यानी Integrated Grievance Redressal System — पूरे UP में नागरिकों के लिए एक online complaint platform। राजेंद्र यादव का मानना है कि यह platform जनता की असली ताकत है। Complaint दर्ज होते ही दो घंटे के अंदर संबंधित अधिकारी को notification मिल जाती है। वो खुद अपने वार्ड में घर-घर इसकी जानकारी देते हैं।
उनकी governance की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
Transparency और accountability। अब नगर निगम में बिना GPS photo के कोई construction file स्वीकृत नहीं होती — काम से पहले, काम के दौरान, और काम के बाद — हर stage की photo record होती है। राजेंद्र यादव इस system के मज़बूत समर्थक हैं।
राजेंद्र यादव BJP में कब और किस प्रेरणा से आए?
जब से होश संभाला तब से BJP से जुड़े। बाबरी मस्जिद और कारसेवा के दौर ने उन्हें हिंदुत्व और राष्ट्रसेवा की तरफ प्रेरित किया। उन दिनों Central Jail में दो दिन बिताए — और उस अनुभव ने उनके अंदर समाजसेवा की एक गहरी ललक जगाई।
उनके वार्ड में अभी कौन से बड़े काम हो रहे हैं?
Smart Ward scheme के तहत पूरी सीवर और पानी की लाइन बदली जा रही है। राजेंद्र यादव का दो साल का vision है — उनका वार्ड पूरे वाराणसी नगर निगम के लिए एक model ward बने।
अगर कोई नागरिक पानी या सीवर की समस्या से परेशान हो तो क्या करे?
राजेंद्र यादव की सलाह है — सबसे पहले IGRS platform पर complaint दर्ज कराएं। एक दिन में response न आए तो उस complaint number के साथ सीधे अधिकारी से मिलें। यह approach much faster और more accountable है।
क्या वो सिर्फ BJP voters की मदद करते हैं?
नहीं। उनके वार्ड में लगभग ४० प्रतिशत मुस्लिम आबादी है और वो सबके लिए काम करते हैं। उनकी governance philosophy है — विकास का कोई मज़हब नहीं होता, सेवा का कोई vote bank नहीं होता।
BJP में उनका भविष्य क्या है?
Grassroot level पर इतनी strong governance command और ideological clarity के साथ राजेंद्र यादव BJP में एक serious और capable नेता के रूप में उभर रहे हैं। वाराणसी जैसे politically significant शहर में उनकी ज़मीनी पकड़ और vision उन्हें बड़ी ज़िम्मेदारियों के लिए तैयार बनाती है।
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एक अच्छा लीडर जो कि हमारे क्षेत्र में बहुत दिन बाद मिला जो अपने कार्य को ही पूजा माना है । हर एक की बात सुनना उनकी समस्या का समाधान करना । अपने जनता के बीच रहना उन्हें समझना खैर कितना भी लिखूं कम है ।I like my leder rajendra yadav ।
Dhanyawad
Vikas Vikas sirf bolte hai karke dikhate aisa hi Vikas ho raha hai humare ward main rajandra bhaiya dwara…
Good Work Bhaiya 💐
Keep it up 👍
Pranam 🙏
Good work done by you…more power to you 💪…keep it up 💗