पुराने डिब्बे में मिली एक टूटी कार… और पूरा बचपन लौट आया | Childhood Memories
“मम्मी… ये पुराना डिब्बा फेंक दूँ?”
घर की सफ़ाई करते हुए आदित्य ने आवाज़ लगाई।
रसोई से माँ बोलीं—
“खोलकर तो देख।”
उसने धूल से भरा टिन का डिब्बा खोला।
अंदर…
कंचे।
एक टूटी सीटी।
पुराना वीडियो गेम।
कुछ रंग उड़े हुए टॉफी के रैपर।
और एक स्कूल का आई-कार्ड।
आदित्य हँस पड़ा।
“हम भी क्या-क्या संभालकर रखते थे।”
माँ बाहर आईं।
एक-एक चीज़ हाथ में लेकर मुस्कुराने लगीं।
“याद है…
इन कंचों के लिए तुम पूरे मोहल्ले से लड़ जाते थे।”
दोनों हँस पड़े।
फिर माँ ने डिब्बे से एक छोटी-सी लाल कार निकाली।
जिसका एक पहिया टूटा हुआ था।
आदित्य अचानक चुप हो गया।
“ये… अभी तक है?”
माँ ने धीरे से कहा—
“जिस दिन तू शहर नौकरी के लिए गया था…
उस दिन इसे फेंकने लगी थी।”
“फिर?”
“सोचा…
अगर कभी तू वापस आया…
तो शायद इसे ढूँढ़ेगा।”
आदित्य ने खिलौना हाथ में लिया।
वह अब चल भी नहीं सकता था।
लेकिन…
उसे पकड़ते ही जैसे पूरा बचपन फिर से दौड़ने लगा।
आँगन…
गर्मी की छुट्टियाँ…
बारिश में कागज़ की नाव…
दादी की आवाज़…
शाम की साइकिल…
सब कुछ।
आदित्य ने डिब्बा बंद किया।
और धीरे से कहा—
“मम्मी…
इसे मत फेंकना।”
माँ मुस्कुराईं।
“बेटा…
कुछ चीज़ें सामान नहीं होतीं…
वो वो दिन होते हैं…
जिनमें हम हमेशा के लिए रह जाते हैं।”
— समाप्त —
— StoryLab की और कहानियाँ
रात 2 बजे CCTV में जो दिखा, उसने सब कुछ बदल दिया
WFH Permanent था… फिर एक Monday Morning Call आ गई
पापा ने अपने लिए नए shoes कभी क्यों नहीं खरीदे? | A Story of Quiet Pride
रात के 2 बजे भी Scrolling क्यों करते रहते हैं? Sleep & Screen Time Psychology
लड़कियां पढ़ाई में आगे, घर में भी ज़िम्मेदार — फिर भी “settle” होने का pressure उन पर ज़्यादा क्यों?




