पापा नए जूते क्यों नहीं खरीदते थे? StoryLab Moments
“पापा…”
आयान ने झुंझलाकर कहा।
“आप हर बात पर ‘पैसे बचाओ’ क्यों कहते हैं?”
पापा मुस्कुराए।
“आदत है बेटा।”
आयान ने बात टाल दी।
उसे लगता था…
पापा ज़िंदगी जीना नहीं जानते।
न नए कपड़े…
न महँगा फोन…
न अपनी कोई इच्छा।
बस…
घर।
एक दिन ऑफिस से लौटते हुए आयान ने देखा…
पापा पुराने जूते सिलवा रहे थे।
उसने कहा,
“नए ले लेते हैं ना!”
पापा हँस दिए।
“अभी ये चल रहे हैं।”
कुछ महीने बाद…
आयान की नौकरी चली गई।
EMI…
किराया…
ज़िम्मेदारियाँ…
सब एक साथ सामने खड़े थे।
उसने किसी को कुछ नहीं बताया।
लेकिन…
शाम को पापा उसके कमरे में आए।
चुपचाप एक पुराना लिफाफा उसके हाथ में रख दिया।
अंदर…
काफ़ी पैसे थे।
आयान हैरान रह गया।
“ये…?”
पापा मुस्कुराए।
“हर महीने थोड़ा-थोड़ा बचाता था।”
“किसलिए?”
“पता नहीं…
बस लगता था…
कभी मेरे बेटे को मेरी ज़रूरत पड़ सकती है।”
आयान की आँखें भर आईं।
उसे अचानक याद आया…
वही पुराने जूते…
वही पुरानी घड़ी…
वही अधूरी इच्छाएँ।
उसने पहली बार समझा…
पापा कंजूस नहीं थे।
वो…
उसके आने वाले मुश्किल दिनों के लिए सपने जमा कर रहे थे।
कुछ महीनों बाद…
आयान को नई नौकरी मिल गई।
पहली सैलरी से उसने पापा के लिए नए जूते खरीदे।
पापा ने डिब्बा खोला…
फिर मुस्कुराकर पूछा,
“इतने महँगे क्यों?”
आयान हँस पड़ा।
“क्योंकि…
अब मेरी बारी है बचाने की नहीं…
आप पर खर्च करने की।”
उस दिन…
दोनों की आँखें नम थीं।
लेकिन…
किसी ने आँसू नहीं छिपाए।
क्योंकि कुछ रिश्ते…
‘आई लव यू’ नहीं कहते।
वो चुपचाप पूरी ज़िंदगी आपका भविष्य बचाते रहते हैं।
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