अगली सुबह घर खामोश था… और chai ठंडी हो चुकी थी
एक emotional StoryLab कहानी जहाँ Aarohi अपनी दादी के साथ बिताई एक शांत शाम, chai, memories और एक unexpected goodbye को महसूस करती है।
✍️ by Shailesh | StoryLab Originals | InnaMax News
उस शाम chai थोड़ी ज़्यादा garam थी।
और वक़्त थोड़ा ज़्यादा ठंडा।
Aarohi office से थकी हुई लौटी थी — laptop bag कंधे पर, आँखों में deadline का बोझ।
लेकिन जैसे ही दादी के कमरे की चौखट पर पहुँची —
सब कुछ वहीं छूट गया।
दादी पहले से दो cups रखकर बैठी थीं।
जैसे उन्हें पता था।
खिड़की से ढलती धूप आ रही थी।
दोनों चुप थीं — पर वो चुप्पी comfortable थी।
जैसी सिर्फ कुछ ख़ास रिश्तों में होती है।
तभी दादी ने Aarohi का चेहरा ध्यान से देखा।
और बोलीं —
“तुम जब हँसती हो ना… बिल्कुल अपनी माँ जैसी लगती हो।”
Aarohi की आँखें भर आईं — पर उसने होंठों पर smile रखी।
उसने दादी का हाथ और tightly पकड़ लिया।
जैसे वो उस पल को हमेशा के लिए रोक लेना चाहती हो।
दादी ने chai का एक घूँट लिया और बोलीं —
“जब तुम छोटी थीं ना, रोज़ मेरे पल्लू से लिपटकर सोती थीं।”
“अब भी मन करता है,” Aarohi ने हँसते हुए कहा।
दादी भी हँस दीं — वो हँसी जो पूरे कमरे को warm कर देती थी।
टेबल के पीछे रखे photo frames में पुरानी memories मुस्कुरा रही थीं।
एक photo में young दादी cycle चला रही थीं — आँखों में ज़िद और हवा में dupatta।
एक में छोटी सी Aarohi उनकी गोद में बैठकर ice cream खा रही थी।
और एक में दोनों किसी शादी में dance कर रही थीं — बेशर्मी से, खुलकर।
“ये photos कभी मत हटाना,” दादी ने अचानक गंभीर होकर कहा।
“Memories ही insaan को ज़िंदा रखती हैं।”
Aarohi ने हँसते हुए सिर हिला दिया —
“आप भी कहाँ जा रही हैं दादी, बैठी तो हैं यहीं।”
दादी मुस्कुराईं। कुछ नहीं बोलीं।
बस खिड़की के बाहर देखती रहीं —
जैसे कुछ जानती हों जो Aarohi नहीं जानती थी।
उसे बिल्कुल idea नहीं था —
कि ये उनकी last evening chai होगी।
और last conversation भी।
अगली सुबह घर बहुत ज़्यादा खामोश था।
सब रो रहे थे।
पर Aarohi चुप थी।
वो धीरे से उसी table के पास जाकर बैठ गई —
जहाँ कल दोनों साथ बैठी थीं।
Cup अब भी वहीं रखा था।
Chai ठंडी हो चुकी थी।
पर Aarohi ने उसे हटाया नहीं।
उसने photos को एक-एक करके देखा —
दादी school function में सबसे loud clap करती हुईं।
दोनों बारिश में भीगते हुए pakode खाती हुईं।
वो dance वाली photo — जिसमें दोनों की आँखें बंद थीं और हँसी खुली।
और एक पुरानी photo के पीछे —
दादी की handwriting में लिखा था —
“जब मैं न रहूँ… मेरी कहानियाँ इसे सुना देना।”
ये पढ़ते ही Aarohi की आँखों से आँसू गिर पड़े।
उसने वो photo सीने से लगा ली।
वो समझ गई —
कुछ लोग चले जाते हैं।
पर उनकी आवाज़, उनकी आदतें,
उनकी हँसी, उनकी ज़िद —
और उनके साथ वाली chai की warmth…
वो कभी घर से नहीं जाती।
उस शाम Aarohi ने फिर दो cups रखे।
एक अपने लिए।
एक दादी के लिए।
और चुपचाप बैठकर chai पीती रही —
अकेले नहीं।
साथ में।

दादी गई थीं।
पर उनकी हर याद —
उस घर की हर दीवार में अभी भी साँस ले रही थी।
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