Kangaroo Mother Care — Premature Baby के लिए माँ की गोद क्यों ज़रूरी है
कंगारू मदर केयर एक आसान skin-to-skin technique है जो premature और low birth weight babies को warmth, feeding और protection देती है।
Expert Input: Dr. Alok Pandey, Pediatrician, Purvanchal
भारत में हर साल दुनिया में सबसे ज़्यादा premature babies पैदा होते हैं।
हर 8 में से 1 बच्चा समय से पहले जन्म लेता है। Uttar Pradesh में newborn deaths का एक बड़ा कारण भी यही है — premature birth।
लेकिन इस कहानी में एक उम्मीद भी है।
एक ऐसी technique — जिसके लिए किसी machine की ज़रूरत नहीं। किसी expensive medicine की भी नहीं।
सिर्फ एक माँ की छाती। उसका warmth। उसका touch।
इसे कहते हैं — Kangaroo Mother Care।
आख़िर Kangaroo Mother Care है क्या?
Purvanchal के Pediatrician Dr. Alok Pandey बताते हैं —
“Australia में kangaroo अपने बच्चे को body pouch में रखता है। उसी idea से Kangaroo Mother Care technique आई है।”
उनके अनुसार, यह एक simple लेकिन बेहद effective technique है, जिसमें premature baby को माँ के शरीर के close रखा जाता है ताकि उसे warmth, feeding और protection मिल सके।
WHO भी इसे premature और low birth weight babies के लिए recommend करता है। Studies बताती हैं कि यह technique दुनिया भर में हर साल लाखों newborns की जान बचाने में मदद कर सकती है।
यह technique खासकर उन babies के लिए ज़्यादा ज़रूरी मानी जाती है जिनका वज़न ढाई किलो से कमs के लिए ज़्यादा ज़रूरी मानी जाती है जिनका वज़न ढाई किलो से कम हो — या जो समय से पहले पैदा हुए हों।

तीन खतरे… और एक माँ की गोद
Dr. Pandey के अनुसार, समय से पहले जन्मे babies को सबसे ज़्यादा खतरा तीन चीज़ों से होता है — ठंड, sugar level गिरना और infection।
सबसे पहला खतरा है Hypothermia — यानी शरीर का temperature कम हो जाना। माँ के पेट के अंदर baby लगातार warmth में रहता है। बाहर आते ही उसे अचानक ठंड लग सकती है — जो premature babies के लिए dangerous हो सकती है। Kangaroo Mother Care में skin-to-skin contact बच्चे को वही warmth देने में मदद करता है।
दूसरा खतरा है Hypoglycemia — यानी blood sugar कम होना। Premature babies कई बार ठीक से feed नहीं कर पाते, जिससे उनके brain को ज़रूरी glucose नहीं मिल पाता। KMC में baby माँ के करीब रहता है — इसलिए breastfeeding आसान और frequent हो जाती है।
तीसरा बड़ा खतरा है Sepsis — यानी infection। Studies बताती हैं कि जिन babies को समय पर KMC मिलता है, उनमें neonatal mortality risk काफी कम देखा गया है।
कैसे किया जाता है Kangaroo Mother Care
Dr. Pandey बताते हैं कि Kangaroo Mother Care में माँ front-open gown पहनती है और baby को दोनों breasts के बीच skin-to-skin position में रखा जाता है। Baby की गर्दन हल्की extend रहती है ताकि breathing clear रहे। माँ की body heat धीरे-धीरे बच्चे तक transfer होती रहती है।
बच्चा माँ के करीब होता है — इसलिए breastfeeding भी आसानी से हो जाती है। वह माँ की heartbeat सुनता है — वही आवाज़ जिससे वह pregnancy के दौरान familiar था।
“यह एक ऐसी technique है जो hospital में और घर — दोनों जगह हो सकती है। बस discipline चाहिए।”

Purvanchal में यह इतना ज़रूरी क्यों है
UP में आज भी कई deliveries trained medical professionals के बिना घर पर होती हैं। Rural areas में NICU — यानी Neonatal Intensive Care Unit — तक पहुँचना हर परिवार के लिए आसान नहीं होता।
ऐसे में Kangaroo Mother Care कई families के लिए उम्मीद बनकर सामने आती है। यह ऐसी technique है जिसे कहीं भी किया जा सकता है — बिना किसी expensive machine या extra cost के।
India Newborn Action Plan का लक्ष्य है कि 2030 तक 90% eligible babies को KMC मिल सके। लेकिन ground level पर इसकी awareness और coverage अभी भी काफी कम है — खासकर UP के rural areas में।
एक छोटी जानकारी — जो किसी newborn की जान बचा सकती है
अगर आपके घर में कोई pregnant है — या recently delivery हुई है — तो कुछ बातें याद रखें:
- अगर घर पर delivery हुई हो और baby का वज़न कम लगे — तो बिना delay किए नज़दीकी health center जाएँ।
- Hospital में doctor से Kangaroo Mother Care के बारे में ज़रूर पूछें — especially अगर baby का वज़न कम है।
- यह article उन families तक share करें जहाँ ऐसी जानकारी अभी भी नहीं पहुँच पाती — खासकर rural areas में।
- Papa भी KMC कर सकते हैं। अगर माँ थकी हो, तो skin-to-skin contact किसी भी caring adult से हो सकता है।
एक सच जिसे समझना ज़रूरी है
एक माँ की छाती पर लेटा एक छोटा सा बच्चा — यह सिर्फ एक emotional moment नहीं है।
यह science है। यह life-saving care है। और सबसे बड़ी बात — यह free है।
Purvanchal में Dr. Alok Pandey जैसे doctors लगातार लोगों तक यह जानकारी पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जब तक यह awareness हर घर तक नहीं पहुँचती — तब तक यह काम अधूरा रहेगा।
अगर यह जानकारी आपको useful लगी हो — तो इस article को आगे share ज़रूर करें।

Expert Acknowledgment: This article is based on medical insights shared by Dr. Alok Pandey, Pediatrician at S.P. Surgical & Fracture Hospital, Chandauli.
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