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तनुश्री मिश्रा — जब रात के दस बजे भी गाना नहीं रुका

तनुश्री मिश्रा हारमोनियम के साथ — InnaMax Voice ऑडियो स्टोरी कवर
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तनुश्री मिश्रा — जब रात के दस बजे भी गाना नहीं रुका
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InnaMax Profile । तनुश्री मिश्रा — Banaras Gharana की आवाज़


रात के आठ बज चुके थे।

दो घंटे का स्लॉट था। चार घंटे बाद भी गाना जारी था।

दर्शकों की तादाद बढ़ती जा रही थी। गायिका को cervical का दर्द था — पर उसे पता नहीं चला।

जब घर पहुँची, तो साढ़े दस बज चुके थे।


विरासत — Banaras Gharana की जड़ें

बनारस का Banaras Gharana — जहाँ tabla, raag और riyaz सिर्फ शौक नहीं, विरासत है।

तनुश्री मिश्रा इसी घराने की तीसरी पीढ़ी हैं।

उनके परदादा— पद्मभूषण पंडित सामता प्रसाद मिश्रा उर्फ गुदई महाराज — Banaras Gharana के महारथी। एक किंवदंती।

उनके भाई — जय मिश्रा — tabla वादक।
माताजी — Kathak dancer।
और नाना — ओंकार नाथ मिश्रा — अपने समय के जाने-माने Kathak गुरु।

घर में सुर उठते थे सुबह पाँच बजे से।
रसोई से माँ सुनती थीं — और गलत सुर पर, वहीं से सुधार आ जाता था

“माताजी kitchen से सुन लेती हैं। अगर कोई गलत सुर लगा हो तो वहाँ से correct करने आती हैं — ऐसा नहीं। वह कहती हैं: गंगा!”


कला की यात्रा — आवाज़ ने रास्ता खुद बनाया

पहली stage performance किसी बड़े मंच पर नहीं थी।

घर की शादी थी। आठ-नौ साल की उम्र। Rajan-Sajan Mishra जी सामने बैठे थे।

गाया। तालियाँ बजीं। पैसों का बंडल आया — और वह सीधे पिताजी के पास।

वह moment उनकी turning point नहीं थी। वह observation था — audience की वह प्रतिक्रिया जिसने कुछ settle कर दिया भीतर।

उसके बाद — raag। riyaz। और एक ज़िद: परंपरा को ज़िंदा रखना है।


आज — उनकी गायकी

तनुश्री की गायकी का base Classical है — Khayal, Thumri, Dadra। पर जिस विधा में वे सबसे ज़्यादा खिलती हैं — वह है Ghazal।

Begum Akhtar। Gulam Ali। Jagjit Singh। इन्हीं की परंपरा में।

“जब मैं किसी दिन ठीक नहीं होती — किसी से झगड़ा हो जाए, मन अच्छा न हो — तो harmonium लेकर दो घंटे ghazal गाती हूं। वह मुझे heal करता है।”

Namo Ghat, Varanasi पर Varanasi DM के program में उनकी प्रस्तुति ने शहर और उससे बाहर के लोगों का ध्यान खींचा। Times of India ने इस musical performance को cover किया।

Sangeet Natak Academy के audition में — जहाँ unrecorded ghazal गाना था — उन्होंने कमरा बंद किया, tanapur set किया, 10 मिनट में धुन बनाई। वहाँ से select हुईं।


मुश्किल वक़्त — जब stage पर गुस्सा आया

एक performance थी। 400 लोगों की audience।

350 लोग थे जो ghazal, dadra सुन रहे थे। 50 थे जो ghazal खत्म होने का इंतज़ार नहीं कर सकते थे।

“पब्लिक ने एकदम Bhojpuri माँग लिया। तो 50 लोग पूरे program को disturb कर रहे थे। बहुत गुस्सा आया। लगा — उठकर चले जाएं।”

गई नहीं। गाती रहीं। पर वह moment उन्हें याद है — क्योंकि उसी से एक बात और पक्की हो गई:

“थोड़ा सुनिए। थोड़ा observe करिए। फिर हम आपकी फरमाइश भी गाएंगे।”


एक फर्क — Studio vs Stage

ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि stage पर अकेले खड़ा होना मुश्किल है। तनुश्री उलट मानती हैं।

“जब audience सामने होती है — challenges कम होते हैं। Studio में खुद की आवाज़ को खुद सुनना — वह ज़्यादा challenging है।”

Studio में 2-3 takes। बीच में 15 मिनट का break। Stage पर — एक flow।


उनका नज़रिया — संगीत पर

Classical music दूर क्यों हो रहा है?

“क्योंकि लोगों को उसकी positivity का पता नहीं। राग भैरव सुबह सुनने से migraine में फर्क पड़ता है — यह prove है। राग यमन शाम को stress release करता है।”

वे Music Therapy को गंभीरता से लेती हैं। और यह भी मानती हैं कि classical सुनने के लिए ठहराव चाहिए — एक-एक स्वर पर ध्यान।


नई पीढ़ी को संदेश:

“खामोशी से बनाते रहिए पहचान अपनी। हवा खुद गुनगुनाएगी नाम आपका।”


Varanasi — विरासत और ज़िम्मेदारी

Banaras Gharana सिर्फ एक label नहीं है उनके लिए।

वह उनके नाना की विरासत है। वह Sangeet Natak Academy के audition में select होने की ज़मीन है। वह Namo Ghat पर बजने वाला वह raag है जो किसी tourist की video में capture हुआ और वायरल हो गया।

Sankatkochhan Music Festival के बारे में उनकी पीड़ा real है:

वे Varanasi की classical tradition की वारिस हैं — और उस ज़िम्मेदारी को हल्के में नहीं लेतीं।


InnaMax View

बनारस में संगीत बहता है — घाटों पर, घरों में, रात की हवा में।
लेकिन उसे थामे रखना — यह किसी की ज़िम्मेदारी होती है।

तनुश्री मिश्रा उस उम्र में हैं जब ज़्यादातर artists viral होने की होड़ में हैं। वे वहाँ नहीं हैं

वे Begum Akhtar की ghazal गाती हैं।

वे भैरव की दो लाइनें ऐसे पेश करती हैं — जैसे ठहरते मन को दवाई मिल गई हो।

वे Sangeet Natak Academy में unrecorded ghazal 10 मिनट में बनाकर गाती हैं।

InnaMax की नज़र में — यह सिर्फ talent नहीं है।
यह एक commitment है — उस gharane के साथ, उस शहर के साथ, उस परंपरा के साथ।

काशी ने बहुत आवाज़ें दी हैं।
तनुश्री मिश्रा — उनमें से एक होने की राह पर हैं


▶️ — Tanushree Mishra की अपनी कहानी

इस बातचीत में तनुश्री मिश्रा अपने संगीत, रियाज़ और Banaras Gharana की परंपरा के बारे में खुलकर बात करती हैं।


कुछ आवाज़ें trending नहीं होतीं। लेकिन वही आवाज़ें समय के साथ timeless बन जाती हैं।


What People Often Ask

तनुश्री मिश्रा कौन हैं? तनुश्री मिश्रा वाराणसी की एक young classical और ghazal गायिका हैं। वे पद्म भूषण पंडित शांता प्रसाद (Godai Maharaj) की पारिवारिक परंपरा से आती हैं — Banaras Gharana की तीसरी पीढ़ी। Classical के साथ-साथ ghazal, thumri और dadra में भी वे काम करती हैं।

उनका Banaras Gharana से क्या संबंध है? उनके Great Grand Father पद्म भूषण पंडित शांता प्रसाद जी — जिन्हें Godai Maharaj भी कहा जाता था — Banaras Gharana के महान tabla वादक थे। भाई Jai Mishra tabla बजाते हैं, माताजी Kathak dancer हैं। संगीत उनके घर की भाषा है।

तनुश्री किस तरह का संगीत गाती हैं? उनका base Classical है — Khayal, Raag। साथ में Ghazal, Thumri और Dadra। वे Ghazal में सबसे ज़्यादा comfortable हैं और Begum Akhtar, Jagjit Singh की परंपरा को आगे बढ़ाती हैं।

Classical music को वे आज की पीढ़ी से कैसे connect करती हैं? वे Music Therapy के ज़रिए इसे समझाती हैं — राग भैरव और migraine, राग यमन और stress। उनका मानना है कि जब लोग खुद पर classical का असर देखेंगे, तभी इसे समझेंगे।

Sangeet Natak Academy में उनका अनुभव कैसा रहा? वहाँ unrecorded ghazal गाने का task था। उन्होंने कमरा बंद किया, 10 मिनट में धुन बनाई और गाकर दिखाया — और select हुईं।

रात को रियाज़ करने का उनका तरीका क्या है? वे सुबह पाँच बजे उठकर sirf tanapur के साथ riyaz करती हैं। Harmonium नहीं — सिर्फ kharja का riyaz। इससे किसी को disturb नहीं होता।

नई generation को उनका क्या संदेश है? Music में patience ज़रूरी है। Outcome की चिंता नहीं — riyaz की ज़िद रहे। और: खामोशी से बनाते रहो पहचान — हवा खुद गुनगुनाएगी नाम आपका।

तनुश्री मिश्रा को कहाँ सुन सकते हैं / follow कर सकते हैं? Varanasi के cultural events, Namo Ghat programs और Banaras Gharana से जुड़े आयोजनों में इनकी प्रस्तुतियाँ होती हैं। Pls follow her on Instagram and on youtube


— InnaMax News Desk

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