दादी की आख़िरी Video Call में वह अकेली नहीं थीं
रिया कनाडा पढ़ने चली गई थी। जाने से पहले उसने अपनी दादी से वादा किया था, “हर रात वीडियो कॉल करूँगी।”
शुरू के कुछ महीने तक कॉल होती रही। फिर पढ़ाई, पार्ट-टाइम जॉब और नई ज़िंदगी के बीच कॉल धीरे-धीरे कम होती गई।
एक रात अचानक फोन बजा।
स्क्रीन पर लिखा था—”दादी Calling…”
रिया मुस्कुराई। “आज इतनी रात को?”
उसने कॉल उठाई।
दादी कुछ नहीं बोलीं। बस वैसे ही मुस्कुरा रही थीं, जैसे हमेशा मुस्कुराती थीं।
“दादी… आवाज़ नहीं आ रही।”
सामने सिर्फ़ उनकी मुस्कान थी।
कुछ सेकंड बाद कॉल अपने आप कट गई।
रिया ने सोचा नेटवर्क की दिक्कत होगी और वापस कॉल किया।
फोन स्विच ऑफ था।
अगली सुबह भारत से मम्मी का फोन आया।
रोते हुए उन्होंने कहा, “बेटा… कल रात 9 बजे दादी हमें छोड़कर चली गईं।”
रिया के हाथ काँपने लगे।
उसी समय…
जब उसके फोन पर वीडियो कॉल आई थी।
रिया ने खुद को समझाया कि शायद सदमे में समय याद नहीं रहा होगा।
लेकिन उस रात उसने गैलरी खोली।
वीडियो कॉल का स्क्रीनशॉट अपने आप सेव हो गया था।
तस्वीर में दादी अकेली नहीं थीं।
उनके पीछे घर की बालकनी में एक छोटी-सी लड़की खड़ी थी।
सफेद फ्रॉक…
बिखरे बाल…
और उसका चेहरा कैमरे की तरफ़ नहीं, दादी की तरफ़ था।
रिया ने तुरंत अपने छोटे भाई को वह फोटो भेजी।
कुछ मिनट बाद उसका जवाब आया।
“दीदी… ये वही बालकनी है ना जहाँ दादी कभी किसी को रात में जाने नहीं देती थीं?”
रिया ने फोटो दोबारा खोली।
इस बार बालकनी खाली थी।
लेकिन दादी की मुस्कान…
अब पहले जैसी नहीं थी।
ऐसा लग रहा था…
जैसे वह किसी को देखकर नहीं…
किसी से बचाने की कोशिश कर रही थीं।
— समाप्त —
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