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दो साल तक वह Delhi Metro में सिर्फ दिखती रही… फिर एक दिन बात हो गई


उन्होंने कभी names exchange नहीं किए।
फिर भी… दोनों एक-दूसरे को miss करना सीख गए थे।

कुछ लोग रोज़ दिखते-दिखते… आदत बन जाते हैं।

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Platform Number 3 पर उस दिन अजीब silence था।

ना usual announcement।
ना भागती हुई crowd।
ना किसी के कदमों की जल्दी।

बस closed gates…
और ऊपर blinking board पर लिखा हुआ—

“Services Delayed Due To Strike.”

वह लड़की पहली बार अपने phone से नज़र उठाकर आसपास देख रही थी।

शायद इसलिए क्योंकि आज कोई train आने वाली नहीं थी।

और वह लड़का…
जो पिछले दो साल से सिर्फ opposite platform पर खड़े होकर उसे देखता था…
आज पहली बार उसी platform पर था।

पास।

इतना पास कि उसकी grey hoodie पर बारिश की छोटी बूंदें दिख रही थीं।

दो साल में उन्होंने कभी बात नहीं की थी।

लेकिन दोनों एक-दूसरे की छोटी habits याद रखने लगे थे।
बिना कोशिश किए।

उसे पता था—
वह लड़की हमेशा left AirPod लगाती है…
और right वाला कान खाली छोड़ देती है।

जैसे किसी के लिए जगह बचाकर रखी हो।

उसे यह भी पता था कि वह हर Monday visibly tired लगती है।
और Friday को थोड़ी हल्की।

लड़की को पता था—
वह लड़का हर बार train आने से पहले watch देखता है।

भले ही वह कभी late नहीं होता था।

उसे यह भी पता था
कि वह हमेशा platform की yellow line से दो कदम पीछे खड़ा होता है।

जैसे उसे भीड़ से थोड़ा डर लगता हो।

कुछ लोग
धीरे-धीरे strangers नहीं रहते।


Single AirPod resting on rainy metro platform railing
कुछ connections conversation से पहले शुरू हो जाते हैं।

बस…
आपकी रोज़ की आदत बन जाते हैं।

आज कोई train नहीं थी।
कोई जल्दी नहीं थी।

फिर भी…
दोनों बार-बार अपने phones unlock कर रहे थे।

बिना reason।

बारिश बाहर तेज़ होने लगी थी।
Platform पर हल्की ठंडी हवा आ रही थी।

और शायद पहली बार
दोनों को समझ नहीं आ रहा था
कि अब कहाँ देखें।

“Excuse me…”

दो साल में पहली बार उसने उसकी आवाज़ सुनी।

लड़की ने थोड़ा झिझककर पूछा—

“क्या आपको पता है strike कब तक है?”

लड़के ने ऊपर notice board देखा।
फिर उसकी तरफ।

“शायद… थोड़ी देर।”

बस इतना।

फिर दोनों चुप।

लेकिन यह वही चुप्पी नहीं थी
जो पिछले दो साल से थी।

यह नई थी।
थोड़ी awkward।
थोड़ी real।

ऊपर से एक empty metro धीरे से निकल गई।


Empty Delhi Metro train moving through rainy station at night
उस दिन किसी को train का इंतज़ार नहीं था।

बिना रुके।

लड़की अचानक हँस पड़ी।

“Funny ना…”

वह उसकी तरफ देख रहा था।

“दो साल train ने बात नहीं होने दी।
आज train ही नहीं है।”

वह भी हँसा।
थोड़ा ज़्यादा…
जितना joke funny था।

फिर दोनों yellow line से थोड़ा पीछे आ गए।

बारिश अब platform की सीढ़ियों तक आ रही थी।

“वैसे…”
उसने धीरे से पूछा,

“आप हमेशा opposite platform पर ही क्यों खड़े होते थे?”

लड़का कुछ seconds चुप रहा।

जैसे सच बोलने से पहले लोग रुकते हैं।

फिर उसने हल्की सी smile के साथ कहा—

“क्योंकि वहीं से आप साफ दिखती थीं।”

लड़की पहली बार उसकी तरफ पूरी तरह मुड़ी।

और शायद…
उसी moment दोनों को एहसास हुआ
कि वे strangers बहुत पहले रहना बंद कर चुके थे।

बस introduction बाकी था।

Announcement speaker अचानक crackle हुआ—

“Services will resume shortly.”

दोनों ने एक साथ ऊपर देखा।

फिर हल्का सा awkward silence।

जैसे दोनों secretly चाहते हों
कि announcement गलत निकले।

अगली train आने वाली थी।

और पहली बार…
दोनों चाहते थे
कि वह थोड़ी late हो जाए।


Delhi Metro card on rainy empty platform bench at night
कुछ conversations बहुत देर से शुरू होती हैं।

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