तीन दोस्त, एक भगोना खीर और तीन सपने: आखिर खीर किसने खाई?
कहानी एक नज़र में
तीन दोस्त जंगल में रास्ता भटक गए। शाम ढल गई, अंधेरा छा गया और भूख से उनका बुरा हाल था। काफी तलाश के बाद उन्हें एक छोटी-सी झोपड़ी दिखाई दी। वहां उन्हें थोड़े चावल, दूध और शक्कर मिले। तीनों ने मिलकर खीर बनाई, लेकिन जब खीर तैयार हुई, तो वह इतनी कम बची थी कि सिर्फ एक व्यक्ति का पेट भर सकता था।
अब सवाल था—खीर कौन खाएगा?
तीनों ने एक दिलचस्प फैसला किया। वे सोएंगे, अपने-अपने सपने सुनाएंगे और जिसका सपना सबसे अच्छा होगा, खीर उसी को मिलेगी।
लेकिन उन्हें कहां पता था कि सपनों का यह मुकाबला आखिर में एक ऐसे मोड़ पर पहुंचेगा, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।

कहानी का स्रोत
राजेश कुमार
सह प्रांत कार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली
इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र में आयोजित पत्रकार दीपावली मिलन समारोह में सुनाई गई कहानी पर आधारित।
भूख से बेहाल तीन दोस्त पहुंचे झोपड़ी में, लेकिन खीर ने खड़ी कर दी नई मुसीबत
कहानी की शुरुआत तीन दोस्तों से होती है, जो जंगल से गुजरते हुए रास्ता भटक जाते हैं। धीरे-धीरे शाम रात में बदल जाती है। थकान और भूख से परेशान तीनों को कोई रास्ता नहीं सूझता।
तभी उन्हें एक छोटी-सी झोपड़ी नजर आती है। वे वहां पहुंचकर घर के व्यक्ति से कहते हैं कि वे रास्ता भूल गए हैं। रात हो चुकी है और सुबह होने से पहले आगे बढ़ना मुश्किल है। अगर कुछ खाने को मिल जाए, तो बड़ी मेहरबानी होगी।
घर का व्यक्ति गरीब था। उसने साफ कहा कि उसके पास देने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। फिर भी उसने अपनी सामर्थ्य के अनुसार थोड़े चावल, दूध, शक्कर और एक भगोना दे दिया।
तीनों ने चावल, दूध और शक्कर मिलाकर खीर बनाई।
खीर पकती रही और धीरे-धीरे उसका पानी सूखता गया। जब वह तैयार हुई, तो उसकी मात्रा इतनी कम रह गई कि उससे केवल एक व्यक्ति का पेट भर सकता था।
तीनों के सामने अब एक नई समस्या थी। भूख सबको लगी थी, लेकिन खीर सिर्फ एक के लिए थी।
खीर सिर्फ एक के लिए बची थी, तो तीनों ने लिया यह अनोखा फैसला
काफी सोच-विचार के बाद एक दोस्त ने सुझाव दिया कि वे थोड़ी देर सो जाते हैं। जब उठेंगे, तो अपना-अपना सपना सुनाएंगे। जिसका सपना सबसे अच्छा होगा, वही खीर खाएगा।
बाकी दोनों को भी यह बात ठीक लगी।
तीनों सो गए।
कुछ घंटे बीते। फिर एक दोस्त उठा और उसने दूसरे दोस्त को झकझोरकर जगाया।
“अरे भाई, उठ! मेरा सपना बहुत शानदार था। अब तो खीर मैं ही खाऊंगा।”
दूसरे दोस्त ने आंखें मलते हुए पूछा, “ऐसा क्या देख लिया तूने सपने में? अभी से कैसे तय हो गया कि तेरा सपना सबसे अच्छा था?”
पहले दोस्त ने कहा, “अच्छा, सुन फिर।”
हाथी ने पहनाई माला, फिर हुई ऐसी घोषणा कि दोस्त खुद को राजा समझने लगा
पहले दोस्त ने बताया कि जैसे ही उसकी आंख लगी, उसने खुद को एक बड़े चौराहे पर खड़ा पाया। वहां बहुत भीड़ थी। लोग किसी खास घटना का इंतजार कर रहे थे।
तभी उसने एक हाथी को आते देखा। हाथी की सूंड में फूलों की माला थी। वह भीड़ में खड़े लोगों के पास जाता, उनके सिर को सूंघता और फिर आगे बढ़ जाता।
पहला दोस्त भी लोगों के बीच से निकलकर आगे पहुंच गया।
हाथी धीरे-धीरे उसके पास आया। उसने भी उसके सिर को सूंघा और फिर उसके गले में माला डाल दी।
बस, फिर क्या था!
वहां मौजूद लोगों ने जयकारे लगाने शुरू कर दिए। उसे कंधों पर उठाया गया और राजमहल ले जाया गया। वहां राजा ने अपनी बेटी की शादी उससे करा दी। इस तरह वह उस राज्य का राजा बन गया।
पहले दोस्त ने बड़े गर्व से कहा, “सोचो, मुझे राजपाट मिल गया, राजकुमारी से विवाह हो गया और मैं राजा बन गया। इससे अच्छा सपना भला क्या हो सकता है? इसलिए खीर तो मुझे ही खानी चाहिए।”
लेकिन दूसरा दोस्त उसकी बात सुनकर मुस्कराया।
“रुक जा भाई! अभी मेरा सपना सुना ही कहां है?”
राजा बनने का सपना पड़ा पीछे, दूसरे दोस्त को हुए भगवान विष्णु के दर्शन
दूसरे दोस्त ने कहा कि राजपाट और धन-दौलत से भी बड़ी आकांक्षा मनुष्य के जीवन में हो सकती है। उसके अनुसार, जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति और मोक्ष प्राप्त करना भी मनुष्य की एक बड़ी आध्यात्मिक कामना है।
फिर उसने अपना सपना सुनाना शुरू किया।
उसने बताया कि जैसे ही वह सोया, थोड़ी देर बाद उसे भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप के दर्शन हुए।
भगवान ने उससे कहा, “उठो बेटा! मैं तुम्हारी तपस्या से बहुत प्रसन्न हूं। बताओ, तुम्हें क्या चाहिए?”
दोस्त ने कहा कि भगवान के दर्शन होना ही अपने आप में बहुत बड़ी बात थी। वह उनके चरणों में झुक गया। भगवान उसकी इच्छा पूरी करने के लिए तैयार थे, लेकिन तभी पहले दोस्त ने उसे झकझोरकर जगा दिया।
वह अपनी मनोकामना बता भी नहीं पाया।
अब दूसरे दोस्त ने तर्क दिया, “एक तरफ राजा बनने का सपना है और दूसरी तरफ भगवान विष्णु के दर्शन! इससे बड़ा सपना क्या हो सकता है? इसलिए खीर पर मेरा अधिकार बनता है।”
अब दोनों दोस्त अपने-अपने सपने को श्रेष्ठ बता रहे थे।
लेकिन तीसरा दोस्त अब तक चुपचाप लेटा हुआ था।

तीसरे दोस्त की नींद खुली तो सामने था भूत, फिर उसने मांगी ऐसी माफी
दोनों ने तीसरे दोस्त को जगाया और कहा, “अब तू अपना सपना सुना। फिर तय करेंगे कि खीर कौन खाएगा।”
तीसरे दोस्त ने पहले तो टालने की कोशिश की।
“अरे भाई, मेरा सपना तो बहुत खराब था। तुम दोनों मिलकर खीर खा लो।”
लेकिन दोनों दोस्त नहीं माने। उन्होंने कहा कि फैसला तभी होगा, जब वह भी अपना सपना सुनाएगा।
आखिरकार तीसरे दोस्त ने बोलना शुरू किया।
उसने बताया कि जैसे ही वह सोया, कुछ देर बाद उसे महसूस हुआ कि किसी ने उसकी पीठ पर जोर से लात मारी है। दर्द के कारण वह हड़बड़ाकर उठ बैठा।
उसने सामने देखा तो एक भूत खड़ा था!
भूत को देखते ही उसके होश उड़ गए। डर के मारे उसकी टांगें कांपने लगीं। उसने तुरंत भूत के पैर पकड़ लिए और पूछा, “महाराज, मुझसे क्या गलती हो गई, जो आपने मुझे इतनी जोर से मारा?”
भूत ने पूछा, “ये दोनों कौन हैं, जो तेरे साथ सो रहे हैं?”
तीसरे दोस्त ने जवाब दिया, “महाराज, ये मेरे दोस्त हैं।”
भूत बोला, “आज मैं इन दोनों को खा जाऊंगा। ये मेरे घर की तरफ पैर करके सो रहे हैं।”
यह सुनकर तीसरा दोस्त घबरा गया। उसने भूत से विनती की कि उसके दोस्तों को छोड़ दे।
उसने कहा, “महाराज, ये मेरे मित्र हैं। इन्हें मत खाइए। अगर आपको किसी को खाना ही है, तो मुझे खा लीजिए, लेकिन मेरे दोस्तों को छोड़ दीजिए।”
भूत ने उसकी बात सुनी, लेकिन कहा कि गलती की सजा तो मिलेगी। चाहे गलती जानबूझकर हुई हो या अनजाने में, उसका परिणाम भुगतना ही पड़ता है।
तीसरा दोस्त अपने मित्रों को बचाने के लिए लगातार विनती करता रहा।
तभी भूत की नजर खीर के भगोने पर पड़ी।
भूत की नजर खीर पर पड़ी और तीसरे दोस्त के सामने आ गया सबसे बड़ा संकट
भूत ने पूछा, “इस भगोने में क्या है?”
तीसरे दोस्त ने बताया कि उन्होंने खीर बनाई थी। तीनों ने तय किया था कि सोने के बाद जिसका सपना सबसे अच्छा होगा, वही खीर खाएगा।
भूत ने उससे कहा, “जा, खीर लेकर आ और खा ले।”
तीसरे दोस्त ने याद दिलाया कि खीर खाने का फैसला सपनों के आधार पर होना था। लेकिन भूत ने साफ कर दिया कि या तो वह खीर खाए, या फिर खुद भूत का भोजन बने।
अब तीसरे दोस्त के सामने कोई विकल्प नहीं बचा था।
अपने दोनों दोस्तों की जान बचाने के लिए उसने खीर खा ली।
कुछ देर बाद पहले और दूसरे दोस्त की नींद खुली। दोनों उठकर सीधे भगोने के पास पहुंचे।
लेकिन भगोना खाली था!
वे हैरान रह गए। उन्होंने तीसरे दोस्त से पूछा, “अरे भाई, खीर कहां गई? और जब भूत आया था, तो तूने हमें जगाया क्यों नहीं?”
तीसरे दोस्त ने जवाब दिया, “मैंने तो तुम्हें जगाने की बहुत कोशिश की थी। लेकिन एक दोस्त अपने सपने में राजा बना हुआ था। उसके यहां शादी के बैंड-बाजे बज रहे थे। दूसरा भगवान के सामने खड़ा था और अपनी मनोकामना पूरी होने का इंतजार कर रहा था। तुम दोनों ने मेरी बात सुनी ही नहीं।”
फिर उसने कहा, “अब बताओ, मैं क्या करता? भूत तुम्हें खाने की धमकी दे रहा था। तुम्हारी जान बचाने के लिए आखिरकार मुझे ही खीर खानी पड़ी।”
दोनों दोस्त अपने सपनों में इतने खोए हुए थे कि वास्तविक परिस्थिति को समझ ही नहीं पाए। तीसरे दोस्त ने परिस्थिति का सामना किया और अपने मित्रों को बचाने की कोशिश की।
इस तरह खीर के एक भगोने पर शुरू हुआ मुकाबला एक अप्रत्याशित अंत तक पहुंच गया।

दोस्त सपनों में खोए रहे, तीसरे ने कर दिया ऐसा काम कि खीर उसी को मिली
यह कहानी केवल तीन दोस्तों और खीर की नहीं है। इसके भीतर जीवन को देखने का एक नजरिया छिपा है।
पहला दोस्त राजा बनना चाहता था। दूसरे की आकांक्षा भगवान के दर्शन और मोक्ष से जुड़ी थी। दोनों के सपने अपने-अपने तरीके से बड़े थे। लेकिन कहानी का तीसरा दोस्त एक ऐसी परिस्थिति का सामना कर रहा था, जहां उसे अपने मित्रों की चिंता करनी थी और फैसला भी लेना था।
यहां कहानी हमें एक जरूरी सवाल के सामने खड़ा करती है—क्या केवल अच्छी आकांक्षाएं रखना पर्याप्त है, या उनके अनुरूप काम करना भी जरूरी है?
जीवन में लक्ष्य देखना महत्वपूर्ण है। सपने हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। लेकिन जब तक हम उनके लिए प्रयास नहीं करते, वे केवल कल्पना बनकर रह सकते हैं।
इसी तरह समाज में बदलाव की उम्मीद करना आसान है, लेकिन उस बदलाव में अपनी भूमिका निभाना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
अगर हम चाहते हैं कि हमारा परिवार, समाज और देश बेहतर बने, तो केवल यह सोचना पर्याप्त नहीं कि सब कुछ कैसा होना चाहिए। हमें यह भी तय करना होगा कि उसके लिए हम स्वयं क्या कर सकते हैं।
भारत को आगे बढ़ाना है तो सिर्फ सपने नहीं, जमीन पर काम भी करना होगा
कहानी का संदेश व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता। इसे देश के भविष्य से भी जोड़ा जा सकता है।
भारत एक युवा देश है। दुनिया में अपनी क्षमता और योगदान के अनुरूप स्थान प्राप्त करने के लिए उसे केवल बड़े सपने देखने की नहीं, बल्कि उन सपनों को पूरा करने के लिए लगातार काम करने की जरूरत है।
समाज में सकारात्मक बदलाव तभी आएगा, जब लोग अपनी जिम्मेदारी समझेंगे और सामूहिक रूप से प्रयास करेंगे।
यह विचार भी महत्वपूर्ण है कि हर व्यक्ति का योगदान एक जैसा नहीं होता। कोई विचार देता है, कोई रास्ता बनाता है, कोई कठिन परिस्थिति में जिम्मेदारी उठाता है और कोई दूसरों को आगे बढ़ने में मदद करता है। बदलाव के लिए इन सभी प्रयासों की जरूरत पड़ती है।
तीन दोस्तों की कहानी में तीसरे दोस्त का फैसला इसी बात की याद दिलाता है कि केवल अपने सपनों में खोए रहने के बजाय कभी-कभी सामने मौजूद जिम्मेदारी को समझना अधिक जरूरी होता है।
सपना तो आपने भी देखा है, लेकिन उसे पूरा करने के लिए क्या किया?
हम सभी के कुछ सपने होते हैं। कोई बेहतर करियर चाहता है, कोई परिवार के लिए अच्छा भविष्य बनाना चाहता है, कोई समाज में बदलाव देखना चाहता है और कोई देश को आगे बढ़ते हुए देखना चाहता है।
लेकिन इन सपनों के बीच एक सवाल हमेशा बना रहता है—क्या हम उनके लिए कुछ कर भी रहे हैं?
किसी मंजिल की कल्पना करना शुरुआत हो सकती है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए कदम उठाने पड़ते हैं। बदलाव की इच्छा को प्रयास में और प्रयास को जिम्मेदारी में बदलना पड़ता है।
तीन दोस्तों और खीर के एक भगोने की यह कहानी हंसाते-हंसाते यही बात समझाती है कि सपनों का महत्व अपनी जगह है, लेकिन जीवन में कर्म और जिम्मेदारी की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्योंकि सपने देखने से मंजिल का पता चल सकता है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए चलना खुद पड़ता है।

आपके मन में उठ सकते हैं ये सवाल
1. क्या सिर्फ बड़ा सपना देखना सफलता की गारंटी है?
नहीं। सपना हमें दिशा देता है, लेकिन उसे हकीकत में बदलने के लिए अनुशासन, मेहनत और लगातार प्रयास जरूरी हैं। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि हम अपने लक्ष्य के लिए आज क्या कर रहे हैं।
2. जब निजी इच्छा और दूसरों की जिम्मेदारी आमने-सामने हों, तो क्या करना चाहिए?
फैसला लेते समय अपने हित के साथ दूसरों पर पड़ने वाले असर को भी समझना चाहिए। जिम्मेदारी का अर्थ हमेशा खुद को पीछे रखना नहीं, बल्कि परिस्थिति को समझकर संतुलित और संवेदनशील फैसला लेना है।
3. क्या अच्छे इरादे समाज में बदलाव लाने के लिए काफी हैं?
अच्छे इरादे शुरुआत हैं, समाधान नहीं। बदलाव के लिए विचारों को काम में बदलना, अपनी भूमिका निभाना और परिणामों की जिम्मेदारी लेना जरूरी है।
4. सामूहिक प्रयास किसी देश के भविष्य को कैसे बदल सकते हैं?
किसी देश की प्रगति केवल सरकार या कुछ चुनिंदा लोगों से नहीं होती। जब नागरिक, संस्थाएँ और समुदाय अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, तब छोटे प्रयास मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
5. अपने सपने को हकीकत में बदलने के लिए आज क्या कर सकते हैं?
अपने लक्ष्य को स्पष्ट करें, उसे छोटे कामों में बाँटें और पहला कदम आज ही उठाएँ। नियमित प्रगति की समीक्षा करें और जरूरत पड़ने पर अपनी रणनीति बदलें। शुरुआत के लिए सही समय अक्सर वही होता है, जब हम इंतजार करना छोड़ देते हैं।
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