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सात साल बाद… रेलवे स्टेशन पर जो हुआ, उसने एक वादा फिर से जगा दिया | Love Story


“सुनो…”

लड़की ने धीरे से कहा।

“अगर हम कभी बिछड़ गए… तो मुझे ढूँढ़ोगे?”

आरव मुस्कुराया।

“तुम खोओगी ही क्यों?”

“फिर भी…”

आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“जहाँ भी होगी… ढूँढ़ लूँगा।”

दोनों हँस पड़े।


फिर ज़िंदगी ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली।

नौकरी…

शहर…

परिवार…

ज़िम्मेदारियाँ…

धीरे-धीरे बातें कम होती गईं।

फिर एक दिन…

पूरी तरह बंद।


सात साल बाद…

आरव अपने गाँव लौटा।

बरसात की शाम थी।

वह यूँ ही पुराने रेलवे स्टेशन चला गया।

वहीं…

जहाँ दोनों घंटों बैठा करते थे।

प्लेटफ़ॉर्म लगभग खाली था।

तभी उसने देखा…

एक लड़की उसी पुरानी बेंच पर बैठी थी।

हाथ में वही नीली डायरी।

आरव के कदम रुक गए।

“मीरा?”

लड़की ने सिर उठाया।

वह सचमुच मीरा थी।

दोनों कुछ पल तक बस एक-दूसरे को देखते रहे।

न कोई शिकायत…

न कोई सवाल।

मीरा मुस्कुराई।

“तुमने ढूँढ़ लिया।”

आरव हँसा।

“तुम मिली ही कहाँ थीं…”

मीरा ने डायरी उसकी तरफ बढ़ाई।

पहले पन्ने पर सिर्फ़ एक लाइन लिखी थी—

“कुछ वादे समय नहीं… लोग निभाते हैं।”

ट्रेन आने की घोषणा हुई।

आरव ने पूछा,

“अब?”

मीरा ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“इस बार…

अगर सफ़र शुरू करें…

तो मंज़िल तक साथ चलेंगे?”

आरव ने कोई जवाब नहीं दिया।

बस…

उसका हाथ पहले से थोड़ा और कसकर पकड़ लिया।

कभी-कभी…

सबसे खूबसूरत प्रेम कहानी…

“आई लव यू” से नहीं,

“चलो, साथ चलते हैं…” से शुरू होती है।


— समाप्त —

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