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CCTV में शर्मा अंकल अकेले नहीं थे… लेकिन Video Call कुछ और दिखा रही थी


“अरे, एक बार ऊपर वाले कमरे का दरवाज़ा खोलकर देख ना…”

फोन पर माँ की आवाज़ आई।

अमन मुंबई में था। माँ-पापा गाँव गए हुए थे। उनके शहर वाले पुराने घर में पिछले तीन महीने से कोई नहीं रह रहा था।

घर में Wi-Fi कैमरे लगे थे।

माँ ने कहा, “कैमरे में लगता है ऊपर वाले कमरे की लाइट जल रही है।”

अमन ने मोबाइल खोला।

सच में…

ऊपर वाले कमरे की लाइट ऑन थी।

“शायद बिजली आने के बाद अपने आप जल गई होगी।”

तभी कैमरे में किसी के चलने की हल्की-सी आवाज़ आई।

माँ बोली, “बेटा… कोई घुस तो नहीं गया?”

अमन ने तुरंत पड़ोस के शर्मा अंकल को फोन किया।

दस मिनट बाद अंकल चाबी लेकर घर के अंदर पहुँचे।

वीडियो कॉल चालू थी।

“देखो बेटा… नीचे तो सब ठीक है।”

वो धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगे।

अमन एक साथ CCTV और वीडियो कॉल दोनों देख रहा था।

दोनों स्क्रीन बिल्कुल एक जैसी थीं…

फिर अचानक फर्क दिखा।

वीडियो कॉल में शर्मा अंकल अकेले थे।

लेकिन CCTV में…

उनके पीछे कोई और भी सीढ़ियाँ चढ़ रहा था।

सिर्फ़ दो कदम पीछे।

सफेद कुर्ता।

नंगे पैर।

चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।

“अंकल… पीछे कौन है?”

शर्मा अंकल रुक गए।

“क्या मतलब? मैं अकेला हूँ।”

अमन का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।

“मत मुड़िए… बस नीचे आ जाइए…”

लेकिन देर हो चुकी थी।

अंकल धीरे-धीरे पीछे मुड़े।

वीडियो कॉल में वहाँ कोई नहीं था।

CCTV में…

जिस आदमी को अमन देख रहा था, वह अब शर्मा अंकल के बिल्कुल सामने खड़ा था।

और अगले ही सेकंड…

CCTV की स्क्रीन काली हो गई।

वीडियो कॉल कट गई।

पूरी रात किसी का फोन नहीं लगा।

सुबह शर्मा अंकल मिले।

बिल्कुल ठीक।

उन्होंने कहा, “ऊपर कोई नहीं था। बस एक अजीब बात हुई…”

“क्या?”

“जब मैं नीचे उतर रहा था, किसी ने बहुत धीरे से कहा…”

‘धन्यवाद… आज फिर किसी को सच नहीं बताया।’

अमन ने कभी वह घर बेचा नहीं।

लेकिन आज भी…

ऊपर वाले कमरे में कोई नहीं जाता।

क्योंकि वहाँ की लाइट…

अब कभी बंद नहीं होती।


— समाप्त —

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