The Empty Chair: कुछ कुर्सियाँ रोज़ खाली नहीं रहनी चाहिए
Quick Read | The Empty Chair
रविवार की शाम थी।
घर में हल्की-हल्की बारिश की आवाज़ आ रही थी। डाइनिंग टेबल पर चार प्लेटें सजी थीं, लेकिन एक कुर्सी खाली थी।
“आरव को बुला लिया?” दादी ने पूछा।
“मैसेज कर दिया है,” उसकी माँ ने मोबाइल स्क्रीन देखते हुए कहा।
कुछ मिनट बाद जवाब आया—
“थोड़ा काम है… आप लोग खाना खा लीजिए।”
किसी ने कुछ नहीं कहा।
सबने खाना शुरू कर दिया।
लेकिन उस खाली कुर्सी की तरफ़ नज़र बार-बार चली जाती थी।
सोमवार सुबह।
ऑफिस पहुँचते ही आरव ने लैपटॉप खोला।
Inbox में 46 unread emails थीं।
Slack पर notifications लगातार आ रही थीं।
Calendar में तीन meetings पहले से तय थीं।
उसने गहरी साँस ली।
“बस आज का दिन निकल जाए।”
यह वाक्य वह पिछले कई महीनों से हर सुबह खुद से कह रहा था।
दोपहर में उसकी सहकर्मी ने पूछा,
“लंच?”
आरव ने बिना ऊपर देखे जवाब दिया,
“तुम लोग जाओ… मैं बाद में खा लूँगा।”
वह “बाद में” उस दिन भी नहीं आया।
शाम को घर लौटते समय उसने देखा कि उसके पिता बालकनी में बैठे थे।
उन्होंने सिर्फ़ इतना पूछा,
“आज ऑफिस कैसा था?”
आरव ने वही पुराना जवाब दिया।
“ठीक था।”
बात वहीं खत्म हो गई।
कुछ दिनों बाद दादी की तबीयत थोड़ी बिगड़ गई।
डॉक्टर ने आराम की सलाह दी।
उस रात पूरा परिवार फिर उसी डाइनिंग टेबल पर बैठा।
इस बार आरव भी समय पर आ गया।
दादी मुस्कुराईं।
“आज काम नहीं था?”
आरव हँस पड़ा।
“काम तो था…”
“…लेकिन आज लगा कि ये खाना मिस नहीं करना चाहिए।”
कुछ देर तक किसी ने मोबाइल नहीं उठाया।
कोई जल्दी में नहीं था।
बीच-बीच में छोटी-छोटी बातें होती रहीं।
पापा अपने कॉलेज के दिनों की कहानी सुनाने लगे।
माँ बीच में हँस पड़ीं।
दादी ने कहा,
“देखा… खाना आज ज़्यादा स्वादिष्ट लग रहा है।”
सब मुस्कुरा दिए।
अगले सोमवार फिर वही ऑफिस था।
वही emails।
वही meetings।
वही deadlines।
कुछ भी बदला नहीं था।
लेकिन शाम 8 बजे Calendar में एक नया reminder दिखाई दिया—
“Dinner at Home.”
उसने खुद लगाया था।
दो दिन बाद उसकी टीम में एक नया कर्मचारी शामिल हुआ।
शाम को उसने कहा,
“सर, थोड़ा और रुक जाएँ? काम पूरा कर लेते हैं।”
आरव ने स्क्रीन बंद कर दी।
“काम कल भी होगा।”
फिर मुस्कुराकर बोला,
“लेकिन कुछ कुर्सियाँ रोज़ खाली नहीं रहनी चाहिए।”
नया कर्मचारी कुछ समझा, कुछ नहीं।
दोनों ऑफिस से बाहर निकल गए।
उस रात डाइनिंग टेबल की चारों कुर्सियाँ भरी थीं।
किसी ने इस बारे में बात नहीं की।
ज़रूरत भी नहीं थी।
“लेकिन कुछ कुर्सियाँ रोज़ खाली नहीं रहनी चाहिए।”
Quick Read
हम अक्सर समय बचाने के लिए उन पलों को टाल देते हैं जो बाद में सबसे ज़्यादा याद आते हैं। कुछ रिश्ते हमारी मौजूदगी चाहते हैं, हमारा खाली समय नहीं।
One Small Thought
“कुछ कुर्सियाँ सिर्फ़ बैठने के लिए नहीं होतीं… वे बताती हैं कि हम किसे अपना समय दे रहे हैं।”
— समाप्त —
SMART READSQuick Reads — छोटे विचार, सच्ची कहानियाँ और व्यवहारिक सीख। कुछ ही मिनटों में पढ़े जाने वाले ऐसे संपादकीय लेखन, जिनका असर पढ़ने के बाद भी लंबे समय तक बना रहता है।
— Smart Reads
Waiting Feels Longer Why? इंतज़ार इतना मुश्किल क्यों है
हम सच में ठीक हैं? | The Hidden Psychology Behind “I’m Fine”
Silent Stress — क्या आपकी Body धीरे-धीरे burnout की तरफ बढ़ रही है?
Jouska: वह बहस जो खत्म हो चुकी है, लेकिन आपके दिमाग में अभी भी चल रही है
IGRS Complaint Registration: सड़क, पानी या सीवर की शिकायत ऑनलाइन कैसे दर्ज करें?




