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पत्रकार पक्षकार हो जाए, तो पत्रकार कहाँ रह जाएगा? मृगांक शेखर से बातचीत


त्रकार किसी खबर को सामने लाता है, किसी घटना की पड़ताल करता है और जनता तक जानकारी पहुँचाता है। लेकिन जब खबरों के साथ निजी विचारधारा, संस्थागत दबाव या किसी पक्ष के प्रति झुकाव जुड़ने लगे, तो एक बुनियादी सवाल उठता है—पत्रकार की पहचान आखिर किससे बनती है?

क्या पत्रकार का निष्पक्ष होना सिर्फ एक अच्छी खूबी है, या यह उसके पेशे की बुनियादी शर्त है?

InnaMax News की बातचीत श्रृंखला ‘एक सवाल’ में कार्यकारी संपादक देवेश दत्त मिश्र ने वरिष्ठ पत्रकार मृगांक शेखर से यही सवाल पूछा। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में लंबे अनुभव वाले मृगांक शेखर ने पत्रकारिता में निष्पक्षता को पेशेवर जिम्मेदारी से जोड़कर देखा।


पत्रकार पक्षकार हो जाए, तो पत्रकार कहाँ रह जाएगा?

निष्पक्षता पर पूछे गए सवाल के जवाब में मृगांक शेखर ने स्पष्ट कहा कि पत्रकार का निष्पक्ष होना ही चाहिए। उनके अनुसार, अगर पत्रकार किसी पक्ष का प्रतिनिधि बन जाता है, तो उसकी पत्रकारिता की भूमिका पर सवाल खड़े होने लगते हैं।

उन्होंने निजी राय और पेशेवर जिम्मेदारी के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। किसी व्यक्ति की अपनी विचारधारा या निजी मत हो सकते हैं, लेकिन खबर रिपोर्ट करते समय पत्रकार का दायित्व तथ्यों के आधार पर जानकारी देना है।

यह बात पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत की ओर इशारा करती है: पत्रकार की व्यक्तिगत मान्यताएँ और उसकी पेशेवर भूमिका हमेशा एक जैसी नहीं होतीं। खबरों में तथ्यों की जाँच, अलग-अलग पक्षों को सुनना और संदर्भ को सही तरीके से सामने रखना विश्वसनीय रिपोर्टिंग के जरूरी हिस्से हैं।


क्या आज के दौर में सभी पत्रकार निष्पक्ष हैं?

बातचीत में देवेश दत्त मिश्र ने एक फॉलो-अप सवाल भी पूछा—क्या मौजूदा परिस्थितियों में सभी पत्रकार निष्पक्ष हैं?

इस सवाल पर मृगांक शेखर ने किसी पत्रकार या मीडिया संस्थान के बारे में व्यापक टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि लोगों के काम और उनकी भूमिका को लेकर समाज में पहले से चर्चा होती रहती है।

उन्होंने एक दूसरी चुनौती की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक, कभी-कभी पत्रकारों को उनके काम के बजाय उनकी पहचान या उस मीडिया संस्थान से जुड़ाव के आधार पर निशाना बनाया जाता है। उन्होंने जंतर-मंतर पर एक रिपोर्टर को लेकर हुई चर्चा का उदाहरण दिया, जहाँ उनके अनुसार रिपोर्टर के काम के बजाय उसके संस्थान से जुड़े होने पर सवाल उठाए गए थे।

इस उदाहरण का व्यापक संदर्भ यह है कि किसी पत्रकार के काम का मूल्यांकन करते समय उसकी रिपोर्टिंग, तथ्यों और पेशेवर आचरण को देखना जरूरी है। केवल उसकी पहचान या संस्थान के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।


निष्पक्षता और विश्वसनीयता का रिश्ता क्या है?

पत्रकारिता में निष्पक्षता का अर्थ यह नहीं कि हर मुद्दे पर सभी पक्षों को बिना जाँच के समान रूप से सही मान लिया जाए। इसका अर्थ है तथ्यों को ईमानदारी से प्रस्तुत करना, प्रमाणों को महत्व देना और किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले जरूरी सवाल पूछना।

कभी किसी खबर में एक पक्ष के दावे के समर्थन में अधिक प्रमाण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में निष्पक्ष रिपोर्टिंग का अर्थ दोनों पक्षों को बराबर सही दिखाना नहीं, बल्कि उपलब्ध प्रमाणों को उनके वास्तविक महत्व के साथ सामने रखना है।

इसीलिए निष्पक्षता, तथ्य-जाँच, पारदर्शिता और जवाबदेही एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। पाठक या दर्शक पत्रकार पर तभी भरोसा कर सकते हैं, जब उन्हें लगे कि खबर का उद्देश्य किसी पक्ष का प्रचार करना नहीं, बल्कि घटना को समझना है।


पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ा सवाल

मृगांक शेखर के साथ हुई इस बातचीत में निष्पक्षता को पत्रकारिता की पेशेवर जिम्मेदारी के रूप में रेखांकित किया गया। चर्चा यह भी याद दिलाती है कि किसी पत्रकार के काम को उसकी पहचान या संस्थान के बजाय उसकी रिपोर्टिंग की गुणवत्ता के आधार पर परखना चाहिए।

पत्रकारिता में निजी विचार होना असामान्य नहीं है। लेकिन खबरों के माध्यम से जनता तक जानकारी पहुँचाते समय तथ्यों, संदर्भ और पेशेवर नैतिकता के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है।

आपकी राय क्या है? क्या आज के मीडिया माहौल में निष्पक्ष रहना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है? और किसी पत्रकार की विश्वसनीयता परखने के लिए आप किन बातों को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं?

कमेंट में अपनी राय साझा कीजिए।


बातचीत देखें – एक सवाल | InnaMax News

वरिष्ठ पत्रकार मृगांक शेखर से पत्रकारिता में निष्पक्षता, पेशेवर नैतिकता और मीडिया की विश्वसनीयता पर बातचीत।

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आपके मन में भी हैं ये सवाल?

1. पत्रकारिता में निष्पक्षता क्यों जरूरी है?

निष्पक्षता पत्रकार को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर खबर प्रस्तुत करने में मदद करती है। इससे पाठकों और दर्शकों का भरोसा बनाए रखने में सहायता मिलती है।

2. क्या पत्रकार की अपनी विचारधारा हो सकती है?

हाँ। पत्रकार की निजी मान्यताएँ हो सकती हैं। लेकिन पेशेवर रिपोर्टिंग में उसे अपनी निजी राय और सत्यापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना चाहिए।

3. क्या निष्पक्षता का मतलब हर पक्ष को बराबर जगह देना है?

हर स्थिति में नहीं। निष्पक्षता का मतलब तथ्यों को सही संदर्भ में रखना, संबंधित पक्षों को उचित अवसर देना और प्रमाणों के महत्व को नज़रअंदाज़ न करना है।

4. पत्रकार की विश्वसनीयता कैसे परखी जा सकती है?

उसकी तथ्य-जाँच, स्रोतों की विश्वसनीयता, गलती होने पर सुधार करने की तत्परता और रिपोर्टिंग में पारदर्शिता जैसे पहलुओं को देखकर।

5. क्या किसी मीडिया संस्थान से जुड़ाव के आधार पर पत्रकार का मूल्यांकन करना उचित है?

केवल संस्थान के आधार पर किसी पत्रकार के काम को सही या गलत ठहराना उचित नहीं है। उसकी रिपोर्टिंग और पेशेवर आचरण का मूल्यांकन करना अधिक उपयोगी है।


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