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वसंता कॉलेज में ‘कबीरा आर्ट प्रोजेक्ट’ पर ओरिएंटेशन, लगभग 90 छात्राओं ने लिया हिस्सा


कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और विचारों को समझने का भी एक रास्ता है। इसी सोच के साथ किसी कला परियोजना से जुड़ने का पहला कदम केवल उसमें हिस्सा लेना नहीं, बल्कि उसके पीछे के विचार को समझना भी होता है। इसी उद्देश्य से वसंता कॉलेज फॉर वूमेन में महिन्द्रा कबीरा फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित होने वाले ‘कबीरा आर्ट प्रोजेक्ट’ के दूसरे संस्करण को लेकर एक ओरिएंटेशन एवं इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया।

महाविद्यालय की को-करिकुलर समिति की ओर से 4 नवंबर को दोपहर 1 बजे कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित इस सत्र में छात्राओं को परियोजना के उद्देश्य, स्वरूप और सहभागिता से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में लगभग 90 छात्राओं ने हिस्सा लिया।

STORY AT A GLANCE
✓ वसंता कॉलेज में महिन्द्रा कबीरा फेस्टिवल के अंतर्गत ओरिएंटेशन सत्र आयोजित।
✓ कबीरा आर्ट प्रोजेक्ट का दूसरा संस्करण 4–6 दिसंबर 2026 को होगा।
✓ अतिथि वक्ता राज जोग सिंह ने परियोजना से जुड़े पहलुओं पर संवाद किया।
✓ लगभग 90 छात्राओं ने कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़े सत्र में हिस्सा लिया।
✓ को-करिकुलर समिति ने छात्राओं को सांस्कृतिक एवं रचनात्मक सहभागिता के लिए तैयार किया।

दिसंबर में होने वाले कबीरा आर्ट प्रोजेक्ट की तैयारी कैसे शुरू हुई?

महिन्द्रा कबीरा फेस्टिवल के अंतर्गत कबीरा आर्ट प्रोजेक्ट का दूसरा संस्करण 4 से 6 दिसंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसी आयोजन की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए कॉलेज में यह परिचयात्मक सत्र रखा गया था।

इस अवसर पर महिन्द्रा कबीरा फेस्टिवल के समन्वयक श्री राज जोग सिंह अतिथि वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। महाविद्यालय की ओर से उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

सत्र का उद्देश्य छात्राओं को केवल आयोजन की तारीखों से परिचित कराना नहीं था, बल्कि उन्हें यह समझने का अवसर देना भी था कि इस परियोजना का स्वरूप क्या है और वे इससे किस तरह जुड़ सकती हैं।


कला की पढ़ाई से आगे, रचनात्मक अभिव्यक्ति का कितना बड़ा दायरा है?

कला से जुड़ी शिक्षा का दायरा केवल तकनीक सीखने या किसी चित्र को तैयार करने तक सीमित नहीं रहता। विचारों को देखना, उन्हें अपने ढंग से व्यक्त करना और अलग-अलग सांस्कृतिक संदर्भों को समझना भी इसका हिस्सा है।

ओरिएंटेशन सत्र में छात्राओं को कला, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक समझ से जुड़े पहलुओं से परिचित कराया गया। कबीरा आर्ट प्रोजेक्ट को इसी संदर्भ में छात्राओं के लिए एक ऐसे अवसर के रूप में प्रस्तुत किया गया, जहां वे अपनी कलात्मक दृष्टि को और विस्तार दे सकती हैं।

इस सत्र में स्नातक प्रथम वर्ष की छात्राओं के साथ BFA और पेंटिंग के सभी विद्यार्थियों की सहभागिता अनिवार्य निर्धारित की गई थी। इस तरह अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि की छात्राओं को भी इस पहल से जोड़ने का प्रयास किया गया।


90 छात्राओं की भागीदारी के पीछे कॉलेज की क्या पहल रही?

लगभग 90 छात्राओं की मौजूदगी ने इस परिचयात्मक सत्र को कॉलेज की सांस्कृतिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाया।

कार्यक्रम का समन्वयन एवं संचालन डॉ. मनीषा मिश्र ने किया। सत्र के समापन पर डॉ. तमन्ना शाहीन ने अतिथि वक्ता, समन्वयक, शिक्षकों, छात्राओं और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर प्रो. संजीव कुमार, प्रो. परवीन सुल्ताना, प्रो. सौरभ सिंह, डॉ. रश्मि राय, डॉ. तमन्ना शाहीन, डॉ. आकांक्षा चौरसिया, डॉ. शाहिना तहसीन और डॉ. सोनू सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।


Watercolour painting of Varanasi ghats with paintbrushes, palette and artistic sketchbook
कला केवल देखी नहीं, महसूस भी की जाती है।

अब दिसंबर के आयोजन पर रहेगी छात्राओं की नजर

4 से 6 दिसंबर तक प्रस्तावित कबीरा आर्ट प्रोजेक्ट इस परिचयात्मक सत्र का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। नवंबर में हुई इस पहल ने छात्राओं को आयोजन से पहले उसके विचार और सहभागिता के अवसरों को समझने का आधार दिया है।

कॉलेजों में इस तरह के आयोजन तब अधिक अर्थपूर्ण बनते हैं, जब विद्यार्थी केवल दर्शक बनकर नहीं, बल्कि अपनी सोच और रचनात्मकता के साथ उनमें भाग लेते हैं। कबीरा आर्ट प्रोजेक्ट के दूसरे संस्करण से भी छात्राओं को ऐसा ही अवसर मिलने की उम्मीद है।


InnaMax Campus Curious | कहानी से आगे के सवाल

1. कला परियोजनाओं में केवल कला-कौशल ही क्यों पर्याप्त नहीं होता?

किसी रचनात्मक काम में तकनीक के साथ विचार, अवलोकन और अपनी बात कहने का तरीका भी मायने रखता है। यही चीज किसी कलाकृति को व्यक्तिगत अभिव्यक्ति से आगे ले जाती है।

2. कबीर की विचारधारा आज के विद्यार्थियों के लिए प्रासंगिक क्यों है?

कबीर की वाणी में सवाल पूछने, रूढ़ियों पर विचार करने और मनुष्य को उसके कर्म एवं विचारों से समझने की दृष्टि मिलती है। आज के विद्यार्थियों के लिए यह आलोचनात्मक सोच और संवाद की एक उपयोगी प्रेरणा हो सकती है।

3. किसी नए कला प्रोजेक्ट से जुड़ने से पहले विद्यार्थी किस बात पर ध्यान दें?

विद्यार्थियों को सबसे पहले परियोजना के विषय और उद्देश्य को समझना चाहिए। इसके बाद अपने विचारों, अनुभवों और रचनात्मक रुचियों को उस विषय से जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए। जरूरी नहीं कि हर विचार पारंपरिक हो; मौलिक दृष्टि भी रचनात्मकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


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