रक्षा बंधन पर DPS Kashi के बच्चों ने बाल गृह (शिशु) में बाँधी राखी
रक्षा बंधन के मौके पर DPS Kashi के बच्चों ने Babatpur के बाल गृह (शिशु) में बच्चों के साथ राखी, मिठाई और अपनापन साझा किया।
Story at a Glance
- ✓ 27 अगस्त 2026 को Babatpur स्थित बाल गृह (शिशु) में रक्षा बंधन कार्यक्रम हुआ
- ✓ Delhi Public School, Kashi के 30 बच्चों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया
- ✓ बाल गृह (शिशु) के 12 बच्चों सहित कुल 42 बच्चे मौजूद रहे
- ✓ बच्चों ने तिलक, राखी और मिठाई के साथ पर्व मनाया
- ✓ कार्यक्रम में बच्चों के बीच स्नेह, अपनापन और सामाजिक समरसता का माहौल रहा
रक्षा बंधन के अवसर पर Delhi Public School, Kashi, Varanasi के 30 बच्चों ने 27 अगस्त 2026 को Babatpur स्थित बाल गृह (शिशु) का भ्रमण किया। इस दौरान बच्चों ने वहाँ रह रहे बच्चों के साथ मिलकर रक्षा बंधन का पर्व मनाया।
बाल गृह (शिशु) के 12 बच्चों की मौजूदगी के साथ कार्यक्रम में कुल 42 बच्चे शामिल रहे। राखी बाँधने, चंदन का तिलक लगाने और मिठाई खिलाने के बीच बच्चों ने एक-दूसरे के साथ समय बिताया और त्योहार की खुशियाँ साझा कीं।
राखी के साथ साझा हुआ भाई-बहन का भाव
कार्यक्रम में Delhi Public School, Kashi की छात्राओं ने बाल गृह (शिशु) के बच्चों के माथे पर चंदन का तिलक लगाया। इसके बाद उन्होंने बच्चों की कलाई पर राखी बाँधी और उन्हें मिठाई खिलाई।
रक्षा बंधन की इन पारंपरिक गतिविधियों के दौरान बच्चों के बीच सहज interaction देखने को मिला। उन्होंने आपस में प्रेम और स्नेह साझा करते हुए त्योहार मनाया।
यह आयोजन केवल राखी बाँधने तक सीमित नहीं रहा। बच्चों को एक-दूसरे के साथ समय बिताने और भाई-बहन के भाव को साझा करने का अवसर भी मिला।

42 बच्चों ने मिलकर मनाया रक्षा बंधन
कार्यक्रम में school की ओर से 30 बच्चे शामिल हुए, जबकि बाल गृह (शिशु) के 12 बच्चों ने भी इसमें हिस्सा लिया। इस तरह कुल 42 बच्चों की मौजूदगी में रक्षा बंधन का आयोजन हुआ।
बच्चों ने साथ मिलकर celebration की गतिविधियों में भाग लिया। राखी और मिठाई के बीच उनके बीच उत्साह और अपनापन दिखाई दिया।
बाल गृह (शिशु) के बच्चों के लिए यह अवसर विशेष रूप से आनंददायक और यादगार रहा।
School team के मार्गदर्शन में हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम Delhi Public School, Kashi, Varanasi के Principal Mridal Chaudhary, Coordinator Mrs. Renu Shukla तथा शिक्षकगण Rashid Ahmad और Disha Agrahari के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
बाल गृह (शिशु) की ओर से अधीक्षक श्री यहुशफत शिवपुरी (बाबू) के साथ श्री सर्वेश कुमार मिश्र, श्री रवि जायसवाल, श्री राजु कुमार सरोज, श्री रमेश कुमार और श्रीमती बाबुना देवी भी उपस्थित रहे।
इनकी मौजूदगी में बच्चों ने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया और रक्षा बंधन का पर्व साथ मनाया।

बच्चों के बीच दिखा अपनापन
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के बीच सौहार्द और आत्मीयता का माहौल देखने को मिला। अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए बच्चों ने साथ समय बिताया और त्योहार की खुशियाँ साझा कीं।
रक्षा बंधन का यह आयोजन बच्चों के लिए एक ऐसा अवसर बना, जहाँ पारंपरिक पर्व के साथ आपसी जुड़ाव और सामाजिक समरसता का अनुभव भी देखने को मिला।
विशेष रूप से बाल गृह (शिशु) के बच्चों के लिए यह दिन आनंद और अपनापन लेकर आया।
आभार के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में बाल गृह (शिशु) की संस्था की ओर से Delhi Public School, Kashi, Varanasi के Principal, Coordinator, शिक्षकगण और सभी बच्चों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। राखी, तिलक और मिठाई के साथ यह आयोजन प्रेम, भाईचारे और आत्मीयता के वातावरण में सम्पन्न हुआ।

एक छोटी-सी बात
त्योहारों की खुशी तब और meaningful हो जाती है, जब वह केवल अपने तक सीमित न रहकर दूसरों के साथ भी साझा हो। बाल गृह (शिशु) में बच्चों का यह साथ हमें याद दिलाता है कि अपनापन कई बार किसी बड़े आयोजन से नहीं, बल्कि साथ बैठने, समय देने और खुशी बाँटने से महसूस होता है।
यही छोटे moments समाज में संवेदना और जुड़ाव की जगह बनाते हैं।
कुछ सवाल, कुछ जवाब
1. रक्षा बंधन पर school visits बच्चों के लिए क्यों meaningful हो सकते हैं?
ऐसे visits बच्चों को classroom के बाहर अलग social settings को समझने और नए लोगों के साथ सहज interaction का अवसर दे सकते हैं।
2. क्या ऐसे कार्यक्रम केवल त्योहार मनाने तक सीमित होते हैं?
ज़रूरी नहीं। सही तरीके से आयोजित होने पर ये activities बच्चों में sharing, empathy और social interaction जैसे experiences को भी बढ़ा सकती हैं।
3. बच्चों को community activities में शामिल करने का क्या महत्व है?
इससे उन्हें समाज के अलग-अलग लोगों और परिस्थितियों के साथ जुड़ने का practical experience मिलता है, जो classroom learning से अलग होता है।
4. ऐसे कार्यक्रमों में schools को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
बच्चों की safety, dignity, privacy और comfortable participation को प्राथमिकता देना जरूरी है। Activity बच्चों की इच्छा और सहजता के अनुरूप होनी चाहिए।
5. क्या त्योहार community interaction का अवसर बन सकते हैं?
हाँ। त्योहारों की familiar और participatory nature अलग-अलग groups को एक साथ आने और positive interaction का अवसर दे सकती है।
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