“तुम बहुत अच्छे Employee हो…” लेकिन हर बड़ा मौका किसी और को मिलता रहा
ऑफिस में जब भी कोई urgent काम आता…
सबसे पहले अंजलि का नाम लिया जाता।
अगर किसी presentation की formatting खराब हो…
अंजलि।
अगर client deck आख़िरी मिनट में बदलनी हो…
अंजलि।
अगर किसी document में गलती पकड़नी हो…
अंजलि।
वो हर काम इतनी सफाई से करती थी कि पूरी टीम उस पर भरोसा करती थी।
लेकिन एक बात उसे हमेशा परेशान करती थी।
जब भी कोई नया initiative शुरू होता…
कोई बड़ा client मिलता…
या किसी project को lead करने का मौका आता…
नाम किसी और का होता।
एक दिन उसने हिम्मत करके अपने Manager से पूछा,
“Sir… क्या मैं leadership projects के लिए ready नहीं हूँ?”
Manager ने बिना देर किए कहा,
“Ready हो।”
“फिर मुझे मौका क्यों नहीं मिलता?”
Manager ने उसकी तरफ देखा और बोले,
“क्योंकि हम तुम्हें वहीं रखते हैं जहाँ तुम्हारी सबसे ज़्यादा ज़रूरत पड़ती है।”
अंजलि समझ नहीं पाई।
Manager ने आगे कहा,
“तुम execution में इतनी अच्छी हो कि अगर तुम्हें किसी नए project में भेज दें, तो रोज़मर्रा का काम कौन संभालेगा?”
ये तारीफ़ थी…
या सज़ा?
उसे समझ नहीं आया।
उस शाम उसने अपना पूरा साल याद किया।
उसने हर काम perfection से किया था।
लेकिन उसने कभी ये नहीं बताया कि वह सिर्फ execute ही नहीं…
सोच भी सकती है।
कभी किसी नए idea के लिए volunteer नहीं किया।
कभी किसी process improvement का proposal नहीं भेजा।
कभी किसी cross-functional project में हाथ नहीं उठाया।
वो अपने role में इतनी perfect हो गई थी…
कि लोग उसे उसी role से बाहर सोच ही नहीं पा रहे थे।
अगले महीने Company ने एक internal automation initiative शुरू किया।
इस बार Meeting में सन्नाटा था।
अंजलि ने पहली बार कहा,
“अगर आप चाहें तो मैं इसका pilot handle कर सकती हूँ।”
Manager ने हैरानी से पूछा,
“तुम्हें इसमें interest है?”
वो मुस्कुराई।
“Interest हमेशा था…
बस मैंने कभी बताया नहीं।”
उसे project मिल गया।
तीन महीने बाद वही automation पूरी Team का समय बचाने लगा।
अब लोग उसे सिर्फ detail-oriented employee नहीं…
problem solver के रूप में देखने लगे।
साल के आखिर में appraisal discussion फिर हुआ।
इस बार Manager ने कहा,
“इस साल हमने तुम्हें अलग नज़र से देखा।”
अंजलि ने पूछा,
“क्या बदला?”
Manager मुस्कुराए।
“पहले तुम सिर्फ दिए हुए काम पूरे करती थीं…
अब तुम नए काम शुरू भी करती हो।”
Workplace में कई बार आपकी सबसे बड़ी ताकत…
आपकी सबसे बड़ी सीमा भी बन जाती है।
अगर लोग आपको सिर्फ execution के लिए जानते हैं…
तो opportunities भी execution तक ही सीमित रह जाती हैं।
कभी-कभी Career आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले Promotion नहीं…
अपनी पहचान बदलनी पड़ती है।
क्योंकि लोग वही देखते हैं…
जो आप उन्हें लगातार दिखाते हैं।
इस कहानी से क्या सीख सकते हैं?
Workplace में केवल अच्छा काम करना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। लोग अक्सर हमें उसी पहचान से देखते हैं जिसे हम लगातार दोहराते रहते हैं। अगर आप हर बार केवल execution करते हैं, तो धीरे-धीरे लोग आपको execution expert मान लेते हैं—भले ही आपके भीतर leadership, strategy या innovation की क्षमता क्यों न हो।
Think: क्या आपकी पहचान सिर्फ “काम पूरा करने वाले” व्यक्ति की बन गई है? अगर हाँ, तो शायद लोग आपको नए अवसरों के लिए सोच ही नहीं रहे।
Decide: अपने वर्तमान काम में उत्कृष्ट बने रहिए, लेकिन साथ ही ऐसे अवसर खोजिए जहाँ आप नए ideas, process improvements या cross-functional initiatives में योगदान दे सकें।
Act: अगली Meeting में सिर्फ assigned work की update न दें। एक नया सुझाव रखें, किसी pilot project के लिए volunteer करें या किसी समस्या का बेहतर समाधान प्रस्तावित करें।
Career में Growth केवल मेहनत से नहीं, बल्कि perception से भी प्रभावित होती है। लोग आपको उसी भूमिका में देखते हैं जिसमें आप खुद को बार-बार प्रस्तुत करते हैं।
याद रखने वाली बात:
Career बदलने से पहले अक्सर अपनी Professional पहचान बदलनी पड़ती है।
— समाप्त —
— CVcon
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