आख़िरी ओवर… और पूरे गाँव ने पहली बार उसका नाम पुकारा
“भाई… अगर आज हार गए ना, तो अगले साल फिर कोशिश करेंगे।”
मैच शुरू होने से पहले कप्तान अर्जुन ने पूरी टीम से कहा।
यह गाँव का फ़ाइनल था।
पूरा मैदान भरा हुआ था।
बच्चे पेड़ों पर चढ़कर मैच देख रहे थे।
बुज़ुर्ग चारपाइयों पर बैठे थे।
आख़िरी ओवर।
6 रन चाहिए।
सिर्फ़ 1 विकेट बाकी।
अर्जुन स्ट्राइक पर था।
पहली गेंद…
डॉट।
दूसरी…
एक रन।
अब 5 रन, 4 गेंद।
सामने था राहुल।
वही लड़का…
जिसे पूरे गाँव ने हमेशा “कमज़ोर खिलाड़ी” कहा था।
राहुल ने गहरी साँस ली।
तीसरी गेंद…
चौका।
पूरा मैदान गूँज उठा।
अब 1 रन चाहिए।
चौथी गेंद…
राहुल ने ज़ोर से शॉट खेला।
गेंद हवा में गई।
सबकी साँसें रुक गईं।
कैच…
छूट गया।
दोनों दौड़े।
एक रन पूरा।
पूरा गाँव मैदान में दौड़ पड़ा।
सब राहुल को कंधों पर उठाने लगे।
वह रो रहा था।
अर्जुन ने हँसते हुए पूछा—
“रो क्यों रहा है, पगले?”
राहुल बोला—
“आज पहली बार…
लोगों ने मेरा नाम लिया है।”
अर्जुन ने उसका कंधा थपथपाया।
“याद रख…
ट्रॉफी सिर्फ़ एक दिन खुश करती है।
लेकिन…
किसी का आत्मविश्वास जीत लेना…
ज़िंदगी भर याद रहता है।”
— समाप्त —
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