मां का gas cylinder
एक छोटी सी कहानी… जो आज के India को समझाती है
रात के नौ बज रहे थे।
Arjun office से लौटा तो देखा — मां चूल्हे के पास खड़ी हैं। हाथ में करछुल है। लेकिन gas on नहीं है।
“क्या हुआ मां?”
“कुछ नहीं। बस सोच रही थी कि आज कम बनाऊं। तुम अकेले हो, ज़्यादा बनाने से बचेगा नहीं।”
Arjun ने कुछ नहीं कहा। लेकिन उसने देखा था — cylinder का knob कस कर बंद था। और एक छोटी सी diary मेज़ पर रखी थी जिसमें मां ने लिखा था — “cylinder — 14 तारीख को।“
आज 2 तारीख थी।
अगले दिन Arjun ने office lunch skip किया। घर आया। मां से पूछा — “कितने दिन से बचा रही हो?”
मां ने पहले टाला। फिर बोलीं — “अरे, बस थोड़ा ध्यान रखती हूं। ₹913 हो गया है अब। पहले ₹800 के नीचे था।”
“तो मुझे बोलती।”
“तुम्हें पता नहीं है क्या? सब महंगा हो गया है। तुम्हारी EMI है, petrol है, किराना है। मुझे क्या ज़रूरत थी बोलने की?”
Arjun के पास कोई जवाब नहीं था।

वो उस दिन शाम को cylinder लेकर आया। नया। Full।
मां ने कुछ नहीं कहा। बस उठकर kitchen में चली गईं।
थोड़ी देर बाद आवाज़ आई — “चाय पिएगा?”
उस चाय में चीनी थोड़ी ज़्यादा थी। Arjun को पता था — मां खुश होती हैं तो हाथ थोड़ा भारी हो जाता है।
उस रात Arjun ने phone उठाया। Why It Matters article पढ़ा जो उसके दोस्त ने WhatsApp पर share किया था — Strait of Hormuz, crude oil prices, ₹913 cylinder।
Numbers पढ़े। समझे।
लेकिन numbers से पहले उसे वो diary याद आई।
“Cylinder — 14 तारीख को।”
मां ने कोई article नहीं पढ़ा था। कोई news नहीं देखी थी। उन्हें Hormuz का नाम भी नहीं पता था।
लेकिन दुनिया में जो हो रहा था — वो उनकी रसोई तक पहुंच गया था। चुपचाप। बिना किसी warning के।
और मां ने — हमेशा की तरह — adjust कर लिया था। बिना किसी से कहे।

आपकी मां भी कुछ ऐसे ही adjust करती हैं? उनसे आज बात करिए।
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