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तीन बजे का WhatsApp — मां-बेटी की एक छोटी सी Emotional कहानी

तीन बजे का WhatsApp

रात के 3:07 बज रहे थे।

Neha का laptop अभी भी खुला था। Screen की रोशनी में वो ceiling देख रही थी। Melbourne में यह रात थी। Varanasi में सुबह के साढ़े सात।

Phone vibrate हुआ।

एक WhatsApp message।

मां: “सो गई?”

Neha ने screen देखी। थोड़ी देर रुकी।

फिर लिखा — “हाँ मां।”

Message भेजा। Phone रख दिया।


उस तरफ़ — Varanasi में — मां भी जाग रही थीं।

वो kitchen में थीं। सुबह की चाय बना रही थीं। Neha का जाना तीन साल पहले हुआ था। तब से यह routine बन गई थी — सुबह उठते ही एक message। बस यह जानने के लिए कि रात ठीक रही।

Neha का “हाँ” देखा।

मां ने phone रख दिया। चाय में चीनी डाली।


रात में खिड़की के पास रखा चाय का कप और बाहर शहर की रोशनी, emotional connection का दृश्य
दो शहर। एक रात। एक रिश्ता — जो जाग रहा है।

दोनों जानती थीं।

Neha सोई नहीं थी। मां को पता था।

मां भी रात भर ठीक से नहीं सोई थीं। Neha को पता था।

लेकिन यही जवाब था जो दोनों को चाहिए था। एक reassurance — झूठी सही, लेकिन ज़रूरी।

“हाँ मां” का मतलब था — मैं यहाँ हूं। ठीक हूं। आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं।

और मां का “सो गई?” का मतलब था — मुझे याद है। हर रात। तुम कितनी भी दूर हो।


कुछ देर बाद Neha का phone फिर vibrate हुआ।

मां: “नाश्ते में क्या खाया?”

Neha मुस्कुराई। अंधेरे में। अकेले।

लिखा — “Oats।”

मां: “Oats क्या होता है ठीक से? रोटी नहीं मिलती वहाँ?”

Neha ने phone रख दिया। आंखें थोड़ी भर आईं।

लेकिन नींद आ गई।


कभी-कभी घर की सबसे बड़ी comfort यह नहीं होती कि कोई आपकी problem solve करे।

बस यह काफी होता है —
कि कोई पूछे।

तीन बजे भी।

आप भी किसी से बहुत दूर हैं? आज एक message कीजिए — बिना किसी reason के।


दो लोग अपने phone पर WhatsApp chat देखते हुए, मां बेटी emotional connection story
कभी-कभी एक message ही काफी होता है।

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