पापा का वो पुराना Scooter
पहली सैलरी: एक अनकहा त्याग
salary आने के बाद पहली रात नींद नहीं आती।
Rohan को भी नहीं आई थी। Account में ₹23,400 थे। पहली बार। खुद की मेहनत के। वो बार-बार phone उठाता, balance देखता, रख देता। फिर उठाता। फिर देखता।
उसने plan बना लिया था। नया phone। वो वाला जो पिछले छह महीने से wishlist में था। काम भी आएगा, और एक बार तो खुद पर खर्च करने का हक बनता है।
अगले दिन office से निकलते वक्त उसने तीन बार phone का page खोला। Cart में डाला। फिर सोचा — घर जाकर order करूंगा। घर पर बैठकर करना अच्छा लगेगा।
घर पहुंचा तो मां रसोई में थीं। पापा बाहर बरामदे में बैठे थे — वो पुराना Bajaj Chetak सामने खड़ा था।
“कब से खड़ा है यह?” Rohan ने पूछा।
मां ने आवाज़ दी अंदर से — “तीन दिन से। Mechanic कह रहा है gear cable गई है। पाँच सौ लगेंगे।”
पापा ने कुछ नहीं कहा। बस scooter की तरफ देखते रहे।

Rohan समझ गया।
पाँच सौ रुपये। जिसे वो बिना सोचे Swiggy पर खर्च कर देता था — वो पाँच सौ रुपये पापा के पास नहीं थे। या थे, लेकिन उन्होंने खर्च नहीं किए। शायद सोच रहे थे — Rohan की नई job है, अभी बोझ मत बनो।
“पापा, mechanic का number दो।”
“अरे रहने दो बेटा, हो जाएगा।”
“नहीं, मैं करवाता हूं। आप बैठिए।”
Rohan ने खुद mechanic को call किया। अगले दिन scooter ठीक हो गया। ₹480 लगे।
उस रात phone का cart खुला रहा — लेकिन order नहीं हुआ।

कुछ दिन बाद Rohan की colleague Priya ने पूछा — “यार, नया phone नहीं लिया अभी तक?”
Rohan ने कहा — “लेंगे। जल्दी क्या है।”
जल्दी सच में नहीं थी।
उस दिन के बाद उसे समझ आया कि पहली salary का सबसे बड़ा खर्च वो नहीं होता जो आप खुद पर करते हैं। सबसे बड़ा खर्च वो होता है जो आप किसी के लिए करते हैं — और जिसके बारे में वो इंसान जानता भी नहीं कि आप कुछ त्याग कर रहे थे।
पापा ने कभी नहीं पूछा Rohan ने phone लिया या नहीं।
Rohan ने कभी नहीं बताया कि वो लेने वाला था।
कुछ बातें घर की दीवारों में रहती हैं — न कही जाती हैं, न भुलाई जाती हैं।

आपकी भी कोई ऐसी पहली salary की याद है? Comments में ज़रूर लिखिए।
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