Interview के बाद — Baap ने कुछ नहीं कहा, लेकिन सब कह दिया
Interview के बाद
Arjun घर आया तो सीधे अपने कमरे में चला गया।
जूते उतारे। Bag रखा। Bed पर लेट गया। Ceiling देखता रहा।
मां ने पूछा — “कैसा गया?”
“ठीक था।”
बस। दरवाज़ा बंद।
मां समझ गई थीं।
“ठीक था” का मतलब होता है — अच्छा नहीं गया। लेकिन अभी बात नहीं करनी।
उन्होंने पापा को बताया। आंखों से। एक भी शब्द नहीं।
पापा ने सिर हिलाया। समझ गए।
रात को खाने की table पर Arjun आया। चुप था। सब चुप थे।
दाल थी। सब्ज़ी थी। रोटी थी।
पापा ने अपनी plate में से एक रोटी उठाई। चुपचाप Arjun की plate में रख दी।
कुछ नहीं बोले।
Arjun ने देखा। पापा की तरफ देखा।
पापा खाना खा रहे थे। Normal। जैसे कुछ हुआ ही नहीं हुआ हो।
उस रात Arjun को नींद नहीं आई।
Interview की बातें replay होती रहीं।
वो सवाल जिसका जवाब अटक गया था।
वो moment जब interviewer ने slightly आगे झुककर लिखना बंद किया था।
“We’ll get back to you.”
वो नहीं करेंगे। Arjun जानता था।
लेकिन उस plate में रखी रोटी — वो याद रही।

पापा ने कुछ नहीं कहा।
“हिम्मत रखो” नहीं कहा।
“अगली बार हो जाएगा” नहीं कहा।
“मैंने कहा था पहले से तैयारी करो” — यह तो बिल्कुल नहीं कहा।
बस एक रोटी।
जिसका मतलब था — मैं यहाँ हूं। तुम ठीक हो। खाना खाओ।
कुछ लोग प्यार बोलते हैं।
कुछ लोग प्यार रखते हैं — plate में, चुपचाप।

आपके घर में भी कोई ऐसे प्यार करता है — बिना कहे?
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