जब धरती डगमगाई, तब अवतरित हुई शक्ति: दशावतार और धर्म की रक्षा का रहस्य
Dashavatar teaches balance, responsibility, and protection of dharma in every era.
कभी सोचा है…
जब सब कुछ टूटता हुआ लगता है,
जब व्यवस्था लड़खड़ाती है,
और जब सही–गलत की रेखा धुंधली हो जाती है —
तब क्या होता है?
सनातन परंपरा कहती है — तब अवतार होते हैं।
दशावतार कोई mythological checklist नहीं है।
यह एक सनातन चेतना का संदेश है —
कि जब पृथ्वी और धर्म असंतुलन में जाते हैं,
तब संतुलन लौटाने के लिए शक्ति स्वयं प्रकट होती है।
यह शक्ति हमेशा युद्ध नहीं करती।
कभी वह मछली बनकर प्रलय से बचाती है,
कभी कछुए की तरह बोझ उठाती है,
कभी नृसिंह बनकर अन्याय को रोकती है,
और कभी राम बनकर मर्यादा सिखाती है।

Dashavatar – Guardians of Dharma and Earth
धर्म का असली अर्थ
आज धर्म को अक्सर ritual तक सीमित कर दिया जाता है।
लेकिन सनातन दृष्टि में धर्म का अर्थ है — balance।
Balance between:
- शक्ति और करुणा
- अधिकार और जिम्मेदारी
- प्रकृति और मानव
जब यह संतुलन टूटता है, तब दशावतार का सिद्धांत सक्रिय होता है।
शक्ति का सही मतलब
दशावतार हमें सिखाते हैं कि:
Power is not domination. Power is protection.
शक्ति का मतलब है:
- कमजोर के पक्ष में खड़ा होना
- सही समय पर हस्तक्षेप करना
- विनाश से पहले विवेक चुनना
आज
के समय में जब:
- पृथ्वी climate crisis से जूझ रही है
- समाज extreme opinions में बंट रहा है
- युवा direction खोता जा रहा है
दशावतार हमें याद दिलाते हैं —
हर युग में जिम्मेदारी नए रूप में आती है।
When Balance Breaks, Dharma Awakens
आधुनिक युग का अवतार कौन?
शायद आज अवतार किसी शरीर में नहीं,
चेतना में आते हैं।
जब कोई व्यक्ति:
- प्रकृति की रक्षा के लिए खड़ा होता है
- अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है
- धर्म को hatred नहीं, harmony बनाता है
वही दशावतार का भाव जीवित करता है।
दशावतार का संदेश clear है:
“जब व्यवस्था बिगड़े, तब भागो मत — जागो।”
KanchanKalash – Faith • Culture • Consciousness
