NO बोलना अब Skill है – जो सीख गया, वही सबसे आगे निकला
हर काम में हाँ बोलने वाला बर्नआउट होता है। जो साफ़ NO बोलता है – वो प्रोडक्टिव, रिस्पेक्टेड और मेंटली […]
Innamax StoryLab की Human stories—morale, culture, behaviour, business insights और workplace life पर खास फ़ीचर।
हर काम में हाँ बोलने वाला बर्नआउट होता है। जो साफ़ NO बोलता है – वो प्रोडक्टिव, रिस्पेक्टेड और मेंटली […]
बंद दरवाज़ों के पीछे प्रमोशन, प्रोजेक्ट, सैलरी डिसीजन। बाहर अफवाहों का बाज़ार गर्म। “सुना है कुछ बड़ा होने वाला है…”
10 लोग मीटिंग में, 8 बोल रहे हैं, 2 सोच रहे हैं “असली काम तो हम ही करेंगे”। क्लासिक सीन।
71% भारतीय कर्मचारी कहते हैं – वर्क-लाइफ बैलेंस अब सपना बन गया। लेट नाइट ईमेल्स, वीकेंड कॉल्स, “urgent” टास्क की
आजकल हर दूसरी कंपनी कहती है – “हम फैमिली हैं”। लेकिन HR एक्सपर्ट्स इसे सबसे बड़ा रेड फ्लैग मानते हैं।
ऑफिस में हर काम के लिए हाँ बोल रहे हो? Boundaries न होने से करियर टूट रहा है आज हर
नई रिसर्च चौंकाने वाली है – भारत में 62% मीटिंग्स में लोग सुनते तो हैं, बोलते नहीं। कारण? माइक्रोमैनेजमेंट का
एक लग्ज़री होटल में एक ग्राहक ने 90 रुपये की चाय ऑर्डर की। वेटर ने मुस्कुराते हुए पूछा – “Regular
Innamax StoryLab: बदलाव ज़िंदगी का हिस्सा है, लेकिन अक्सर हम अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर आने में हिचकिचाते हैं। Innamax