“रामलला के नए द्वार के सामने बैठे रमेश जी ने कहा — ‘यह गली अब पहचानी नहीं जाती’
नए मंदिर की चमक के सामने रमेश जी की आँखों में वह अयोध्या तैर गई, जो अब सिर्फ़ याद में बची है।
शाम ढल रही थी और हनुमानगढ़ी की तरफ़ जाने वाली गली के मोड़ पर रमेश जी अपनी लाठी टिकाए बैठे थे। भीड़ उनके सामने से गुज़र रही थी — नए जूते, नए बैग, कैमरे में कैद होती हर सीढ़ी। किसी ने उनकी तरफ़ देखा तक नहीं। वे भी किसी से कुछ नहीं कह रहे थे, बस सामने देखते रहे, जैसे भीड़ के पार कुछ और देख रहे हों।
उनके पास एक पुरानी पीतल की छड़ी रखी थी, जिसकी मूठ बरसों के इस्तेमाल से चमक चुकी थी। पास ही एक कुत्ता सो रहा था, जो शायद हर शाम यहीं आकर बैठता। हवा में अगरबत्ती और धूल की मिली-जुली गंध थी — कुछ नया, कुछ बरसों पुराना।
पूछने पर उन्होंने धीरे से लाठी को थोड़ा घुमाया और कहा —
“यह गली पहले इतनी चौड़ी नहीं थी। यहाँ एक पीपल का पेड़ हुआ करता था, जिसके नीचे शाम को लोग बैठकर रामायण की चौपाई गाते थे। अब वहाँ दुकान है।”
उनकी आवाज़ में शिकायत नहीं थी, बस एक ठहराव था — जैसे कोई बात बरसों से कहने का मौका ढूंढ रही हो।
उन्होंने बताया कि जिस जगह आज पक्की सड़क है, वहाँ कभी कच्चा रास्ता था जिस पर बारिश में पानी भर जाता था, और बच्चे कागज़ की नाव तैराते थे। हाथ की उँगलियों से उन्होंने हवा में वह पुराना मोड़ दिखाने की कोशिश की, जो अब वहाँ नहीं है।
“अब सब कुछ पक्का हो गया है,”
रमेश जी ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा,
“रास्ते भी, और शायद दिल भी।”
फिर मंदिर की तरफ़ से घंटियों की आवाज़ आई। उन्होंने आँखें बंद कर लीं, कुछ पल के लिए साँस रोकी, और फिर बोले —
“आवाज़ वही है। बस रास्ता बदल गया है।”
आज का भाव
रमेश जी की बात सिर्फ़ एक गली की नहीं थी। हर बदलते शहर में एक ऐसी आवाज़ होती है जो पुराने रास्तों को याद रखती है, भले ही वे रास्ते अब नक़्शे में न हों। शायद यात्रा का असली अर्थ यही है — नए को देखना, और पुराने को सुनना।
क्या आपने भी ऐसा कोई पल जिया है? अपनी कहानी हमें कमेंट में बताइए।
नोट: यह एक काल्पनिक/रचनात्मक कहानी है। पात्र और संवाद वास्तविक साक्षात्कार पर आधारित नहीं, बल्कि अयोध्या में कई पुराने निवासियों के सामान्य अनुभवों से प्रेरित हैं।
— समाप्त —
TRAVEL DIARYTravel Diary — एक पल, एक दृश्य, एक अनजान चेहरा। InnaMax Tourism की वे छोटी यात्रा-कहानियाँ, जो किसी जगह से ज़्यादा उस पल को याद रखती हैं जो वहाँ महसूस हुआ।
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