मेमो नहीं, मोटिवेशन — इस Workplace ने Discipline का पूरा Formula बदल दिया
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एक Organisation ने पूरे साल अपनी टीम को एक भी disciplinary memo नहीं दिया — और जो employee resignation देने आया था, वही बाद में टीम का सबसे strong performer बन गया।
— By CVCon Editorial |InnaMax News
Story At A Glance
✓ एक Organisation ने फैसला किया कि अब कोई भी Department Head अपनी टीम को memo नहीं देगा.
✓ यह कोई feel-good rule नहीं था — इसे सीधे appraisal से जोड़ा गया एक calculated experiment था.
✓ जो employee resignation देने आया था, वही कुछ महीनों बाद टीम का सबसे strong performer बन गया.
✓ क्या डर के बिना भी कोई टीम बेहतर perform कर सकती है, या discipline के लिए डर ज़रूरी है?
हर Organisation में एक दिन यह ज़रूर होता है
किसी भी बड़े workplace में एक चीज़ common होती है।
कोई target miss होता है।
कोई shift mismanage हो जाती है।
कोई complaint आती है।
और उसके बाद आता है — एक formal warning। एक memo।
शाम तक clarification माँगा जाता है।
24 घंटे के अंदर जवाब चाहिए।
जिसको लिखना नहीं आता, वह पूरा दिन उसी जवाब को draft करने में निकाल देता है — टेंशन में, काम छोड़कर।
अब सोचो — साल भर में ऐसे कितने घंटे सिर्फ warning के जवाब लिखने में चले जाते हैं?
यह सवाल किसी एक hospital या एक कंपनी का नहीं है।
यह हर उस जगह का सवाल है जहाँ लोग टीम में काम करते हैं।
और एक बार किसी ने इस सवाल का जवाब इतना अलग दिया कि पूरा सिस्टम बदल गया।

“आज से कोई Memo नहीं चलेगा” — पूरी Leadership को एक Order
इस organisation में पहले एक तय तरीका था।
Staff member से गलती हो — शाम को सीधा memo issue हो जाता।
24 घंटे में explanation चाहिए।
जिसकी drafting अच्छी नहीं, वह पूरे दिन उसी जवाब में फंस जाता।
साल के end में appraisal में यह भी देखा जाता — किसको कितने memo मिले।
यानी पूरा सिस्टम डर पर खड़ा था।
फिर एक दिन सभी Department Heads — फार्मेसी, मार्केटिंग, नर्सिंग, मेडिकल — सबको एक साथ बुलाया गया।
और एक ही बात कही गई—
“आज के बाद आप अपनी टीम को कोई memo नहीं दोगे।”
कमरे में सन्नाटा।
एक Head ने पूछा — “फिर काम कैसे होगा?”
जवाब आया —
“काम करवाने के लिए memo नहीं चाहिए। सपोर्ट चाहिए, बातचीत चाहिए, मोटिवेशन चाहिए।”
एक बात जो याद रखने लायक है
एक warning किसी को कुछ देर के लिए डरा सकता है। लेकिन वह उसे बेहतर employee नहीं बनाता — सिर्फ ज़्यादा डरा हुआ employee बनाता है।
Appraisal से जोड़ा गया — और यही असली बदलाव बना
सिर्फ एक rule बना देना काफी नहीं था।
बिना किसी incentive के कोई भी culture change टिकता नहीं।
तो एक नया पैमाना जोड़ा गया—
जो Department Head अपनी टीम से बिना memo दिए काम कराएगा, उसका appraisal उतना ही बेहतर होगा।
मतलब अब memo देना ताकत की निशानी नहीं, बल्कि एक चेतावनी की तरह देखा जाने लगा।
जिसे पहले discipline समझा जाता था, अब वही इस बात का संकेत बन गया — कि आप बातचीत नहीं कर पाए, इसलिए सीधा memo पर चले गए।
एक छोटा सा बदलाव — सिर्फ यह तय करना कि किस चीज़ को reward मिलेगा — और पूरी टीम की सोच बदल गई।
असली leadership rule बदलने में नहीं होती। यह तय करने में होती है कि किस behaviour को इनाम मिलेगा।

जो Resignation देने आया, वही सबसे मजबूत Performer बन गया
एक घटना इस पूरी सोच को सबसे अच्छे से समझाती है।
एक staff member सीधा resignation लेकर आया।
गुस्से में नहीं — परेशान होकर।
बात हुई तो पता चला — असली problem कुछ और थी। काम का तरीका नहीं, सिर्फ एक miscommunication थी — एक session online बताया गया था, लेकिन last moment पर offline कर दिया गया, और उस छोटी सी बात ने पूरे दिन का mood बिगाड़ दिया था।
उसे डांटा नहीं गया।
बैठाया गया, सुना गया, और एक ही सवाल पूछा गया—
“क्या तुम भी कभी गलती करते हो? तो जैसे तुम्हें समझाया जाता है, वैसे ही तुम भी अपनी टीम को समझाओ।”
उस इंसान की पूरी सोच बदल गई।
resignation वापस गया।
और कुछ ही समय में, वही व्यक्ति टीम के सबसे energetic members में से एक बन गया।
ज़ोर से डांटने से इंसान नहीं बदलता — समझाने से बदलता है।
एक छोटी सीढ़ी, एक बड़ा Leadership Lesson
सिर्फ बोलने से लोग बदलते नहीं — कोई खुद वह बनकर दिखाता है तो असर अलग होता है।
एक बार किसी टीम में ज़्यादातर लोग अपनी fitness को लेकर परेशान थे।
बहाना भी तैयार था — “सुबह टाइम नहीं मिलता, घर के काम होते हैं।”
तो एक बहुत छोटा सा rule दिया गया—
ग्राउंड फ्लोर से एक फ्लोर ऊपर तक lift नहीं — सीढ़ियाँ। बस इतना ही।
पूरी इमारत नहीं, सिर्फ एक फ्लोर।
धीरे-धीरे हफ्ते-दर-हफ्ते एक और फ्लोर जुड़ता गया।
तीन-चार महीनों में, पूरी टीम बिना किसी extra effort के चार फ्लोर आराम से चढ़ने-उतरने लगी।
और सबसे ज़रूरी बात — पहले इस rule को खुद follow किया गया, फिर टीम को बताया गया।
Leadership लेक्चर देने से नहीं बनती — खुद उस रास्ते पर चलकर बनती है।

InnaMax Perspective
Memo भेजना आसान है।
किसी को बैठकर समझाना मुश्किल है — समय लगता है, patience लगता है।
लेकिन एक रास्ता चलता है डर पर। दूसरा चलता है trust पर।
डर पर चलने वाली टीम सिर्फ तब तक काम करती है जब तक कोई देख रहा हो।
जबकि trust पर बनी टीम — बिना देखे भी वैसे ही काम करती है।
और सच कहें तो — यह सिर्फ किसी एक hospital या एक industry की बात नहीं। Startup हो, बड़ी कंपनी हो, या आपकी अपनी छोटी टीम — यही सवाल हर जगह लागू होता है।
अगली बार जब किसी की गलती पर गुस्सा आए, एक पल रुकें।
खुद से पूछें — मैं warning दे रहा हूँ, या बातचीत कर रहा हूँ?
जवाब वहीं आपकी leadership style तय कर देगा।
(यह idea Dr. Manesh Agarwal के एक interview से प्रेरित है — जिन्होंने अपने करियर में यह तरीका खुद अपनाया और टीम पर लागू किया।)


This article draws inspiration from leadership experiences shared by Dr. Manesh Agarwal, Group CEO, LJ Hospitals & Medical College, during a during a phone conversation with Innamax Infotainment Media. The story has been written as a universal workplace lesson and does not represent any specific organisation or institution.
आपने पूछा | InnaMax Answers
क्या Memo देना पूरी तरह गलत है?
नहीं। Memo एक formal HR process है और गंभीर मामलों में ज़रूरी भी है। यहाँ बात यह नहीं कि memo कभी न दें — बात यह है कि memo को पहला और इकलौता tool न बनाएं। ज़्यादातर छोटी गलतियों को counselling से ही सुलझाया जा सकता है।
क्या यह तरीका सिर्फ Hospitals के लिए काम करता है?
नहीं, यह principle किसी भी industry में लागू होता है — IT, retail, manufacturing, या startups। जहाँ भी टीम है और टीम से गलतियाँ होती हैं, वहाँ memo बनाम counselling वाला यह सवाल relevant रहता है।
एक छोटी टीम का Manager इस तरीके को कैसे अपना सकता है?
शुरुआत बहुत छोटी हो सकती है — किसी गलती पर तुरंत reaction देने से पहले 24 घंटे रुकना, फिर एक one-on-one conversation करना, और गलती को सिखाने के मौके की तरह treat करना। बड़ा policy change नहीं, यह एक daily habit है।
क्या Employees Memo के डर के बिना ज़्यादा गलतियाँ नहीं करने लगेंगे?
यह सबसे common doubt है, लेकिन असल अनुभव में अक्सर उल्टा होता है — जब लोगों को लगता है कि उनकी गलती को समझा जाएगा, डाँटा नहीं जाएगा, तो वे ज़्यादा ज़िम्मेदारी से काम करने लगते हैं, क्योंकि अब वजह trust होती है, डर नहीं।
Appraisal से Memo को जोड़ने का असली फायदा क्या है?
इससे managers का behaviour बदल जाता है, सिर्फ employees का नहीं। जब एक manager जानता है कि memo देना उसके अपने appraisal को नुकसान पहुंचा सकता है, तो वह पहले counselling और support के तरीके खोजने लगता है — जिससे पूरी टीम की culture धीरे-धीरे बदल जाती है।
— CVcon
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