India में लड़कों पर घर का प्रेशर — शादी, नौकरी, सब एक साथ
25 साल का है। Job ढूंढ रहा है। Loan चल रहा है।
और घर में पूछा जा रहा है — “शादी कब करेगा?”
यह किसी एक लड़के की कहानी नहीं है।
यह लाखों Indian boys की reality है।
India में एक बेटे से expect किया जाता है कि वो एक साथ कई roles निभाए — कमाने वाला, घर चलाने वाला, शादी करने वाला, माँ-बाप का सहारा… और ऊपर से — खुश रहने वाला।
सब एक साथ। सब सही वक्त पर।
और अगर एक भी चीज़ miss हो जाए — तो सवाल शुरू हो जाते हैं।
यह pressure कितना real है, इसका असर क्या होता है, और इससे निकलने का रास्ता क्या है — आज उसी पर honest बात।

Problem क्या है — यह pressure आता कहाँ से है?
Indian family structure में बेटा अक्सर एक emotional और financial investment की तरह देखा जाता है — consciously नहीं, लेकिन culturally।
“बड़ा होगा तो सब संभाल लेगा” — यह sentence बचपन से सुनाया जाता है।
और जब वो बड़ा होता है — expectations की एक पूरी list तैयार मिलती है।
पहले नौकरी चाहिए — अच्छी, stable, respectable।
फिर शादी चाहिए — सही उम्र में, सही लड़की से।
फिर घर चाहिए।
फिर बच्चे।
और बीच में — माँ-बाप की ज़िम्मेदारी भी।
यह सब — एक साथ। एक ही इंसान से।
AISHE 2023 data के अनुसार, India में 20–29 age group के boys में unemployment और underemployment का rate historically high है। Job market tough है।
लेकिन घर की timeline अभी भी वही है।

Cause क्या है — सिर्फ परिवार की गलती है?
इतना simple नहीं है।
परिवार का pressure real है — लेकिन उसके पीछे एक पूरा cultural system है जो generations से चला आ रहा है।
माँ-बाप ने भी यही देखा। उनके माँ-बाप ने भी यही किया।
यह cycle है — intentional cruelty नहीं।
साथ में social comparison का pressure भी है।
“फलाने का बेटा इतना कमा रहा है।”
“उसकी शादी हो गई।”
“वो तो foreign जा रहा है।”
ये sentences सिर्फ घर तक सीमित नहीं — पूरी society में गूंजते हैं।
और social media ने इसे और intense बना दिया है।
LinkedIn पर promotions।
Instagram पर weddings।
हर जगह एक reminder — “तू कहाँ है?”
यह सब मिलकर एक ऐसा माहौल बना देता है जहाँ एक Indian boy खुद को हमेशा behind feel करता है — चाहे वो actually कितना भी achieve कर रहा हो।

Impact क्या होता है — असली नुकसान क्या है?
Mental Health
Anxiety। Chronic stress।
यह feeling कि “मैं कभी enough नहीं हो पाऊँगा।”
India में young men में burnout तेज़ी से बढ़ रहा है — और उसका एक बड़ा reason है family और societal expectations का combined weight।

Relationships
जब एक लड़का internally exhausted होता है — तो वो relationship में emotionally present नहीं रह पाता।
Partner को लगता है कि वो care नहीं करता।
असल में वो इतना overwhelmed होता है कि express ही नहीं कर पाता।

Wrong Decisions
Pressure में लिए गए decisions rarely सही होते हैं।
गलत job accept करना क्योंकि घर में जल्दी है।
गलत रिश्ते में जाना क्योंकि “उम्र हो रही है।”
ऐसे decisions बाद में बहुत costly साबित होते हैं — emotionally भी और financially भी।
Solution क्या है — practically क्या करें?
यहाँ दो perspectives हैं — लड़कों के लिए और परिवार के लिए।
लड़कों के लिए
पहली बात: अपनी timeline खुद define करो।
Society की timeline नहीं — अपनी।
25 पर job, 28 पर शादी — यह किसने तय किया?
दूसरी बात: घर में honestly बात करो।
“मुझ पर बहुत pressure है” — यह कहना weakness नहीं है।
ज़्यादातर parents सुनते हैं — जब बेटा खुलकर बोलता है।
Assume मत करो कि वो नहीं समझेंगे। Try करो।
तीसरी बात: एक समय में एक चीज़।
Job stable हो जाए — फिर शादी।
Career clear हो जाए — फिर next step।
Life की हर चीज़ multitasking से नहीं चलती।

परिवार के लिए
अगर यह article कोई parent पढ़ रहा है — तो एक छोटी-सी request है।
अपने बेटे से पूछिए —
“तू कैसा है?”
उसकी salary के बारे में नहीं।
उसकी achievement के बारे में नहीं।
बस — वो कैसा है।
यह एक सवाल बहुत कुछ बदल सकता है।
आगे का रास्ता — बदलाव कब आएगा?
जब तक हम collectively यह नहीं मानते कि एक बेटे की value सिर्फ उसकी कमाई और शादी से तय नहीं होती — यह cycle चलता रहेगा।
Indian boys deserve करते हैं कि उन्हें एक इंसान की तरह देखा जाए —
सिर्फ एक provider की तरह नहीं।
और यह बदलाव घर से शुरू होता है।
एक conversation से।

आपके घर में यह pressure है?
आपने इसे कैसे handle किया?
Comments में बताइए — यह conversation ज़रूरी है।
