दमनक की विजय या नीति की हार? | जब षड्यंत्र तात्कालिक जीत दिलाता है 🦊⚖️पंचतंत्र Episode–3
पंचतंत्र Episode–3 में बड़ा सवाल — क्या षड्यंत्र करने वाला दमनक जीता, या नीति हार गई? यह कथा सत्ता, स्वार्थ और विवेक की असली परीक्षा है।
पिछले Episode में आपने देखा —
कैसे संदेह ने
🦁 सिंह पिंगलक और
🐂 संजिवक बैल
की सच्ची मित्रता को नष्ट कर दिया।
एक और गहरा प्रश्न उठता है —
👉 क्या षड्यंत्र रचने वाला दमनक दंडित हुआ?
👉 या चतुराई ने उसे विजेता बना दिया?
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पंचतंत्र कथा: दमनक की विजय या नीति की हार?
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कथा आगे बढ़ती है: सत्ता का खाली सिंहासन
संजिवक के वध के बाद सिंह पिंगलक फिर अकेला पड़ गया।
वन में भय तो था, पर विवेक नहीं।
दरबार में अब केवल एक ही स्वर गूँजता था — 🦊 दमनक का।
उसने स्वयं को “राजा का सबसे निकटस्थ” सिद्ध कर दिया।
कर्तक, जो नीति और धर्म की बात करता था, चुपचाप अलग हो गया।
दमनक का तर्क
कर्तक ने पूछा —
“तुमने निर्दोष संजिवक का नाश किया, क्या यह नीति है?”
दमनक हँसा और बोला —
👉 “नीति वही है, जो सत्ता तक पहुँचाए।”
उसके लिए सही–गलत, धर्म–अधर्म, मित्रता–विश्वास — सब गौण थे।
केवल स्वार्थ सर्वोपरि।
पंचतंत्र का कठोर सत्य
यह कोई आदर्श लोककथा नहीं, यह जीवन का यथार्थ है।
नीति-सूत्र:
“उपायेन जयो यत्र न तत्र धर्मविचारणा।”
अर्थ: जहाँ केवल विजय का लक्ष्य हो, वहाँ धर्म-विचार पीछे छूट जाता है।
पंचतंत्र यह नहीं कहता कि दमनक सही था —
यह दिखाता है कि चतुर अधर्मी कभी-कभी सफल हो जाते हैं।
क्या दमनक सच में जीता?
बाहरी दृष्टि से — हाँ।
पर भीतर से —
👉 भय में जीवन
👉 पकड़े जाने का डर
👉 किसी पर विश्वास नहीं
यहीं पंचतंत्र मौन होकर पाठक से पूछता है —
“ऐसी विजय का मूल्य क्या है?”

पंचतंत्र Episode–3 एक असहज प्रश्न खड़ा करता है —
क्या चतुर षड्यंत्र सत्ता तक पहुँचा सकता है, भले ही वह अधर्म पर आधारित हो?
संजिवक के वध के बाद दमनक सत्ता के निकट है, पर क्या यही वास्तविक विजय है?
➡️ See Slider “दमनक का मार्ग: सत्ता, मौन और भय”
आज के समय में अर्थ
आज भी —
दमनक आगे बढ़ जाता है
संजिवक पीछे छूट जाता है
कर्तक मौन हो जाता है
पर समाज दीर्घकाल में कर्तक की नीति को ही याद रखता है।

🤔 आप क्या मानते हैं?
आज की दुनिया में दमनक ज़्यादा सफल है या कर्तक?
कमेंट में अपनी राय साझा करें 💬
नीति देर से जीतती है, पर स्थायी जीत उसी की होती है।

How This Still Matters Today
आज के समय में,
जहाँ हर फैसला तुरंत लिया जाता है
और हर प्रतिक्रिया सार्वजनिक होती है,
यह कहानी याद दिलाती है कि—
- चुप रहना कमजोरी नहीं, कभी-कभी समझदारी होती है
- हर चालाकी दूरदर्शिता नहीं होती
- और हर जीत, आगे की सही दिशा नहीं दिखाती
आज भी सबसे टिकाऊ फैसले
वही होते हैं जो शोर नहीं करते,
लेकिन असर छोड़ जाते हैं।

Kanchan Kalash – जहाँ पंचतंत्र कहानियों से आगे जीवन की समझ देता है।
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