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काशी में 200 साल बाद ‘दंडक्रम पारायण’ का इतिहास रचा गया

काशी में 200 साल बाद हुआ दंडक्रम पारायण — युवा विद्वान Devvrat Mahesh Rekhe ने इतिहास लिखा

वाराणसी (काशी) में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। 19 वर्षीय वैदिक विद्वान देवव्रत महेश रेखे ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के दंडक्रम पारायण (Dandakrama Parayanam) को सफलतापूर्वक पूरा किया है — यह वह कठिन वैदिक अनुष्ठान है जिसे लगभग 200 वर्षों से किसी ने पूर्ण नहीं किया था।

50 दिनों तक लगातार किए गए इस पारायण में उन्होंने लगभग 2,000 मंत्रों का उच्चारण किया। मंदिर-विद्यालयों, धार्मिक संस्थानों और वैदिक विद्वानों ने इसे “वैदिक परंपरा का पुनरुत्थान” बताते हुए बड़ी उपलब्धि माना है।

उनकी सफलता की चर्चा देशभर में फैल गई और कई प्रमुख धार्मिक एवं शैक्षणिक संगठनों ने उन्हें सम्मानित किया। काशी में उनके सम्मान में एक भव्य शोभायात्रा और अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें गुरुजन, विद्वान, श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस उपलब्धि ने पूर्वजों की वैदिक ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को फिर से जीवंत किया है। कई लोगों को उम्मीद है कि इससे युवा पीढ़ी में वैदिक अध्ययन और संस्कृति के प्रति नया उत्साह पैदा होगा।

Devvrat Mahesh Rekhe honoured for Dandakrama Parayanam in Varanasi 2025

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