क्या आपने कभी किसी आदमी को चुप होते देखा है?
वही आदमी, जो पहले argue करता था, अपनी बात समझाता था, emotions express करता था…
आज बस हल्की सी मुस्कान के साथ कह देता है — “I’m okay…”
असल में यह silence हार नहीं होती, यह थकान होती है।
Emotionally, mentally और कहीं ना कहीं spiritually भी।
शुरुआत में आदमी fight करता है — अपनी feelings के लिए, रिश्तों के लिए, respect के लिए, dreams के लिए।
पर धीरे-धीरे उसे समझ आता है — हर चीज़ fight करके नहीं मिलती… कभी-कभी बस accept करना पड़ता है।
और फिर ये changes दिखने लगते हैं:
1️⃣ वह कम बोलना शुरू करता है — क्योंकि अब उसे पता है, लोग सुनते हैं लेकिन समझते नहीं।
2️⃣ वह समझाना छोड़ देता है — बस कहता है “It’s fine” और अंदर ही अंदर सब सह लेता है।
3️⃣ वह silence choose करता है — क्योंकि उसे लगता है कि peace, जीत से ज़्यादा कीमती है।
4️⃣ वह अपनी पसंद की चीज़ों से दूर हो जाता है — कभी guitar, कभी writing, कभी अपना मुस्कुराता हुआ चेहरा।
5️⃣ वह खुद को prove करना छोड़ देता है — क्योंकि उसे अहसास होता है कि self-worth किसी explanation से नहीं बढ़ती।
पर सबसे ज़रूरी बात यह है:
वह लड़ना छोड़ देता है… लेकिन caring नहीं।
वह लोगों से दूर हो जाता है, पर रिश्ते नहीं तोड़ता।
वह हँसना कम कर देता है, पर अपने दर्द को humor में छुपा लेता है।
वह busy दिखने लगता है — पर असल में वह अपनी feelings से भाग रहा होता है।
लोग कहते हैं — “वह बदल गया है।”
लेकिन सच ये है — वह बदला नहीं… बस समझदार हो गया।
क्योंकि आदमी हमेशा ज़ोर से टूटता नहीं…
कभी-कभी वह चुपचाप थक जाता है।
और जब कोई आदमी चुप हो जाए…
तो यह मत समझना कि वह हार गया है,
समझना… वह बहुत लड़ चुका है।
इसलिए अगली बार अगर कोई सिर्फ मुस्कुरा कर बोले — “I’m fine…”
तो उसकी ख़ामोशी को महसूस करना।
क्योंकि silence भी कभी-कभी सबसे ज़ोर से बोलती है।
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