पहले 5 साल लगातार सर्विस के बाद ही ग्रेच्युटी मिलती थी।
अब सरकार ने नियम बदल दिया – फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट वालों को भी सिर्फ़ 1 साल में ग्रेच्युटी मिलेगी।
परमानेंट और कॉन्ट्रैक्ट में अब कोई फर्क नहीं – मेडिकल बेनिफिट, मातृत्व अवकाश, लीव एनकैशमेंट, सब बराबर।
अपॉइंटमेंट लेटर अनिवार्य, समय पर सैलरी न देना कानूनी अपराध।
इससे कॉन्ट्रैक्ट कल्चर घटेगा, डायरेक्ट हायरिंग बढ़ेगी, युवाओं को स्थिरता और सुरक्षा मिलेगी।
करोड़ों कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के लिए ये सबसे बड़ा तोहफा है।
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