मनुस्मृति, पराशर स्मृति और वेद कहते हैं – कान आकाश तत्व का स्थान है, जो कभी अपवित्र नहीं होता।
दाहिना कान तो और भी पवित्र – इंद्र, अग्नि, चंद्र, वायु, वरुण, मित्र सबका निवास।
झूठ बोलो, छींक आ जाए, गलती हो जाए – दाहिना कान पकड़ने से प्रायश्चित पूरा।
आधुनिक साइंस भी मानता है – कान के पीछे की नसें दिमाग के गिल्ट सेंटर से जुड़ी हैं।
कान पकड़ते ही गिल्ट सिग्नल एक्टिव होता है और हम अंदर से सुधार का संकल्प लेते हैं।
यही कारण है कि गुरु दीक्षा भी दाहिने कान में मंत्र देकर शुरू होती है।
तो अगली बार जब कोई कान पकड़े तो समझ जाना – ये सिर्फ़ सजा नहीं, आत्म-शुद्धि का प्राचीन तरीका है।
आपने आज तक कितनी बार कान पकड़े हैं? 😂 कमेंट करें।

