रविदास ने किया लोकतंत्र का अद्भुत प्रयोग- प्रो.अनिल कुमार उपाध्याय

संत कुलभूषण कवि संत शिरोमणि रविदास उन महान सन्तों में अग्रणी थे जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान किया। उपरोक्त विचार पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग,  महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के आचार्य प्रो अनिल कुमार उपाध्याय व्यक्त किया। सामाजिक सरोकार एवं विचार मंच के तत्वाधान में आयोजित रविदास जी के पैतृक गांव  में मांडूर(मंडुवाडीह, डिहवा )  पर आगे  बतौर मुख्य अतिथि कहा कि  रविदास जी की रचनाओं की विशेषता लोक-वाणी का अद्भुत प्रयोग रही है जिससे जनमानस पर इनका अमिट प्रभाव पड़ता है। मधुर एवं सहज संत शिरोमणि रैदास की वाणी ज्ञानाश्रयी होते हुए भी ज्ञानाश्रयी एवं प्रेमाश्रयी शाखाओं के मध्य सेतु की तरह है।प्राचीनकाल से ही भारत में विभिन्न धर्मों तथा मतों के अनुयायी निवास करते रहे हैं। इन सबमें मेल-जोल और भाईचारा बढ़ाने के लिए सन्तों ने समय-समय पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

रविदास जी ने  आदर्श समाज बेगमपुरा की संकल्पना की :डा प्रभा शंकर मिश्र

काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता विभाग के प्राध्यापक डा प्रभा शंकर मिश्र ने संचालन करते हुए कहा कि रविदास जी ने  आदर्श समाज बेगमपुरा अर्थात जहां कोई गम नहीं की संकल्पना की। गुरु रविदास जी फरमान करते हैं कि जिस आत्मिक अवस्था वाले ‘शहर’ (माहौल, समाज) में मैं बसता हूं उसका नाम ‘बेगमपुरा’  है। वहां न कोई दुख है, न कोई चिंता और न ही कोई घबराहट है। वहां किसी को कोई पीड़ा नहीं है। वहां कोई जायदाद नहीं है और न ही कोई कर लगता है। वहां ऐसी सत्ता है जो सदा रहने वाली है। वहां कोई श्रेणी-भेद नहीं है।  डा मिश्र ने आगे कहा कि गुरु रविदास जी फरमान करते हैं कि ऐसी खुशनुमा आबो-हवा वाले ‘शहर’ में जो रहेंगे वही हमारे मित्र हैं। अध्यक्षता करते हुए सामाजिक सरोकार एवं विचार मंच के संयोजक सुवास राम ने कहा कि रैदास ने ऊँच-नीच की भावना तथा ईश्वर-भक्ति के नाम पर किये जाने वाले विवाद को सारहीन तथा निरर्थक बताया और सबको परस्पर मिलजुल कर प्रेमपूर्वक रहने का उपदेश दिया। फौजी राजकुमार ने कहा कि रविदास जी ने अभिमान त्याग कर दूसरों के साथ व्यवहार करने और विनम्रता तथा शिष्टता के गुणों का विकास करने पर उन्होंने बहुत बल दिया।  लालचंद प्रसाद के ने कहा कि मनुष्य अपने जन्म तथा व्यवसाय के आधार पर महान नहीं है बल्कि कर्म के आधार पर होता है।आभार प्रकाश टासी सिंह गौतम ने किया। कार्यक्रम में राजेन्द्र प्रसाद, सिद्धार्थ, मोतीलाल, गोले प्रसाद सोनकर, टार्जन सिंह गौतम, बृजेश यादव, जितेन्द्र, बाबू लाल गौतम  सहित बड़ी संख्या में गाँव वासी उपस्थित रहे।

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